विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों से जुड़ी रिपोर्ट के बाद भारत निर्वाचन आयोग ने बुधवार को अपनी कार्यप्रणाली को लेकर विस्तृत…

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों से जुड़ी रिपोर्ट के बाद भारत निर्वाचन आयोग ने बुधवार को अपनी कार्यप्रणाली को लेकर विस्तृत बयान जारी किया। आयोग ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 324, वैधानिक नियमों और स्थापित संस्थागत परंपराओं के तहत काम करने वाला बहु-सदस्यीय संवैधानिक निकाय है। आयोग ने स्पष्ट किया कि लिखित टिप्पणियां, सुझाव, तकनीकी सलाह और आंतरिक जांच-पड़ताल उसकी नियमित निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं। इनके जरिए पारदर्शिता, कानूनी अनुपालन और चुनावी प्रक्रिया में आवश्यक सख्ती सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाता है।

आयोग के सभी आदेश वैधानिक प्रक्रिया के तहत जारी

ECI ने कहा कि उसके सभी आधिकारिक आदेश, फैसले और प्रशासनिक निर्देश पूरी कानूनी मान्यता रखते हैं। ये निर्देश मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार जारी किए जाते हैं। आयोग के मुताबिक, किसी फैसले के मसौदा चरण में सदस्यों की ओर से उठाए गए परिचालन संबंधी सवाल या सुझाव सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। इनका उद्देश्य मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा और चुनावी प्रक्रिया में सुधार करना है। चुनाव आयोग ने कहा कि किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां सामने आना सामान्य है। अंतिम निर्णय से पहले होने वाली चर्चा इसी प्रक्रिया का हिस्सा होती है। आयोग ने यह भी कहा कि केवल तीनों चुनाव आयुक्त ही नहीं, बल्कि आयोग का प्रत्येक अधिकारी चुनावी व्यवस्था में सुधार के लिए अपने सुझाव देने के लिए अधिकृत है।

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10 महीने की टिप्पणियों से पूरी तस्वीर सामने नहीं आती: ECI

आयोग ने कहा कि 10 महीने की अवधि के दौरान सामने आए कुछ चुनिंदा आंतरिक नोट या टिप्पणियों को उजागर करने से पूरी तस्वीर सामने नहीं आती, यदि इस दौरान लिए गए व्यापक फैसलों, मंजूरियों, निर्देशों और पहलों को नजरअंदाज किया जाए। ECI के अनुसार, पिछले एक साल में आयोग ने कई फैसले लिए, निर्देश जारी किए और करीब 40 नई पहल व चुनावी सुधार शुरू किए। इनमें देशभर में मतदाता सूची के संशोधन और SIR जैसी प्रक्रियाएं भी शामिल हैं। आयोग ने कहा कि ये सभी फैसले पूर्ण आयोग के सर्वसम्मत निर्णयों का परिणाम हैं। चुनाव आयोग ने अपने बयान में बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में हाल में कराए गए प्रमुख चुनावों का भी उल्लेख किया। आयोग के मुताबिक, इस दौरान चुनावों और अन्य चुनावी गतिविधियों के संचालन के लिए बड़े प्रशासनिक और परिचालन तंत्र का इस्तेमाल किया गया तथा कई मंजूरियां और निर्देश जारी किए गए।

ECI के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सख्त सुरक्षा व्यवस्था

मतदाता डेटा की सुरक्षा को लेकर आयोग ने कहा कि उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म, जिनमें ECINet भी शामिल है, सख्त डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत संचालित होते हैं। आयोग के मुताबिक, अनधिकृत छेड़छाड़ और हेरफेर को रोकने के लिए आईटी सुरक्षा जांच और ऑडिट नियंत्रण लागू हैं। ECI ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) और जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) मतदाताओं के पंजीकरण और नाम हटाने से जुड़े मामलों में कानून के तहत मिली अपनी वैधानिक शक्तियों के अनुसार काम करते हैं। आयोग ने बयान के अंत में कहा कि वह अपने संवैधानिक दायित्वों का पूरी निष्ठा के साथ निर्वहन करने के लिए प्रतिबद्ध है। ECI ने कहा कि लोकतंत्र को आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका को वह समझता है और इसी जिम्मेदारी के तहत अपने संवैधानिक कर्तव्यों का पालन करता रहेगा।