बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सुप्रीमो मायावती ने बुधवार को अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद को पार्टी का नया नेशनल कोऑर्डिनेटर नियुक्त किया। यह फैसला BSP की राष्ट्रीय क…

बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सुप्रीमो मायावती ने बुधवार को अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद को पार्टी का नया नेशनल कोऑर्डिनेटर नियुक्त किया। यह फैसला BSP की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता खुद मायावती ने की। ईशान आनंद को यह जिम्मेदारी ऐसे समय मिली है, जब उनके बड़े भाई आकाश आनंद को पार्टी की सभी जिम्मेदारियों से हटाया जा चुका है। ईशान ने LLM और कानून की पढ़ाई पूरी की है। मायावती के इस फैसले ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में परिवारवाद बनाम संगठनात्मक नेतृत्व की बहस को फिर चर्चा में ला दिया है। खास तौर पर 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले BSP के संगठन में यह बदलाव राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मायावती के फैसले को समझने के लिए BSP के हालिया चुनावी प्रदर्शन को देखना भी जरूरी है। 2017 के विधानसभा चुनाव में BSP ने 19 सीटें जीती थीं और उसका वोट शेयर 22.23 फीसदी था। 2022 के चुनाव में पार्टी सिर्फ एक सीट जीत सकी और उसका वोट शेयर 12.88 फीसदी रहा। ऐसे में ईशान आनंद को संगठन में अहम जिम्मेदारी दिए जाने को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के संगठनात्मक बदलाव के संदर्भ में देखा जा रहा है।

UP की राजनीति में परिवारवाद की बहस

उत्तर प्रदेश की राजनीति में कई प्रमुख दलों में राजनीतिक परिवारों की भूमिका रही है। समाजवादी पार्टी में अखिलेश यादव यादव परिवार की राजनीतिक विरासत संभाल रहे हैं। राष्ट्रीय लोक दल में चौधरी चरण सिंह से लेकर अजीत सिंह और जयंत चौधरी तक परिवार की राजनीतिक भूमिका रही है। अपना दल (सोनेलाल) भी सोनेलाल पटेल के परिवार से जुड़ी राजनीतिक विरासत के कारण चर्चा में रहा है। निषाद पार्टी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी में भी शीर्ष नेताओं के परिवार के सदस्यों की राजनीति में मौजूदगी रही है।

ADR के आंकड़ों में भी सामने आई तस्वीर

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और नेशनल इलेक्शन वॉच की 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के विश्लेषण किए गए 604 सांसदों, विधायकों और विधान परिषद सदस्यों में 141 यानी करीब 23 फीसदी की राजनीतिक पारिवारिक पृष्ठभूमि थी। रिपोर्ट में देशभर के 5,203 मौजूदा सांसदों, विधायकों और MLCs के विश्लेषण में 21 फीसदी के राजनीतिक परिवारों से आने की बात कही गई थी।

2022 में किस पार्टी के पास कितनी सीटें?

2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में BJP ने 255 सीटें जीती थीं। उसके सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) को 12 और निषाद पार्टी को 6 सीटें मिलीं। समाजवादी पार्टी ने 111, RLD ने 8 और SBSP ने 6 सीटें जीतीं। BSP के खाते में सिर्फ एक सीट आई, जबकि कांग्रेस को दो सीटें मिली थीं। ईशान आनंद को राष्ट्रीय स्तर की संगठनात्मक जिम्मेदारी दिए जाने से BSP में उनकी भूमिका बढ़ी है। यह फैसला आकाश आनंद को जिम्मेदारियों से हटाए जाने के कुछ ही समय बाद आया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि ईशान आनंद को मिली नई जिम्मेदारी BSP के संगठन को किस तरह प्रभावित करती है और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी अपनी राजनीतिक और संगठनात्मक रणनीति को किस दिशा में आगे बढ़ाती है