Explainer: संयुक्त राष्ट्र महासभा के मौजूदा सत्र में एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में सुधार और भारत को स्थायी सदस्यता देने का मुद्दा चर्च…
Explainer: संयुक्त राष्ट्र महासभा के मौजूदा सत्र में एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में सुधार और भारत को स्थायी सदस्यता देने का मुद्दा चर्चा में है. 24 सितंबर 2026 को पुर्तगाल के प्रधानमंत्री लुइस मोंटेनेग्रो ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप सुरक्षा परिषद की संरचना में भी बदलाव होना चाहिए. उन्होंने अफ्रीका के साथ भारत और ब्राजील को सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट देने की वकालत की
पुर्तगाल का यह रुख भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नई दिल्ली लंबे समय से UNSC की मौजूदा संरचना में बदलाव और स्थायी सदस्यता की मांग कर रही है. हाल के दिनों में भी भारत की दावेदारी के समर्थन में यूरोप के कई देशों की आवाज सामने आई है. 22 सितंबर को पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य ने भी भारत की स्थायी सदस्यता के समर्थन की बात कही थी
लेकिन सवाल यह है कि भारत को स्थायी सदस्यता की जरूरत क्यों महसूस होती है? सुरक्षा परिषद में फिलहाल कितने सदस्य हैं? स्थायी सदस्य बनने के बाद भारत के अधिकार क्या होंगे और इस पूरी प्रक्रिया में सबसे बड़ी अड़चनें कौन-सी हैं? आइए समझते हैं
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद संयुक्त राष्ट्र की सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं में से एक है. इसका प्राथमिक दायित्व अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना है. परिषद संघर्षों पर चर्चा कर सकती है, शांति कायम करने के उपाय सुझा सकती है और कुछ परिस्थितियों में प्रतिबंध लगाने या सैन्य कार्रवाई को अधिकृत करने जैसे फैसले भी ले सकती है
सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं. इनमें पांच स्थायी और 10 गैर-स्थायी सदस्य शामिल हैं. गैर-स्थायी सदस्यों का चुनाव संयुक्त राष्ट्र महासभा दो साल के कार्यकाल के लिए करती है
Portugal PM Luís Montenegro backs UNSC expansion, with seats for India, Africa, Brazil pic.twitter.com/f0RwnwRM7x
सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन हैं. इन्हें आमतौर पर P5 कहा जाता है.इन पांचों देशों को एक विशेष अधिकार हासिल है, जिसे वीटो पावर कहा जाता है
सुरक्षा परिषद के महत्वपूर्ण प्रस्तावों को पारित करने के लिए कम से कम नौ सदस्यों का समर्थन चाहिए और स्थायी सदस्यों में से किसी एक की नकारात्मक वोटिंग प्रस्ताव को रोक सकती है. यही वीटो शक्ति UNSC की मौजूदा व्यवस्था को बेहद प्रभावशाली बनाती है
भारत का तर्क लंबे समय से यह रहा है कि आज की दुनिया और 1945 की दुनिया में काफी बदलाव आ चुका है. संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के समय जो वैश्विक शक्ति-संतुलन था, वह अब वैसा नहीं है
आज एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका की वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में भूमिका काफी बढ़ी है. लेकिन सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता अभी भी पांच देशों तक सीमित है
भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और ग्लोबल साउथ में उसका महत्वपूर्ण स्थान है. भारत संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में लंबे समय से सैनिक और अन्य संसाधन उपलब्ध कराता रहा है. इसके अलावा भारत पहले भी कई बार UNSC का गैर-स्थायी सदस्य रह चुका है
संयुक्त राष्ट्र के रिकॉर्ड के मुताबिक भारत 2021-22 में आखिरी बार सुरक्षा परिषद का निर्वाचित सदस्य था और कुल मिलाकर कई कार्यकालों में परिषद में रह चुका है. इसी आधार पर भारत सुरक्षा परिषद की निर्णय प्रक्रिया में स्थायी भूमिका की मांग करता रहा है
24 सितंबर को पुर्तगाल के प्रधानमंत्री लुइस मोंटेनेग्रो ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार की जरूरत बताई. उन्होंने कहा कि दुनिया बदल चुकी है और परिषद की संरचना को भी मौजूदा वैश्विक वास्तविकताओं को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित करना चाहिए
उन्होंने अफ्रीका, ब्राजील और भारत के लिए स्थायी सीटों की वकालत की. उनके अनुसार इससे परिषद में प्रतिनिधित्व बढ़ेगा और संस्था को अधिक प्रभावी तथा चुस्त बनाया जा सकेगा
यह पहला मौका नहीं है जब पुर्तगाल ने भारत की स्थायी सदस्यता के पक्ष में बात की हो. पुर्तगाल की ओर से पहले भी UNSC सुधार के संदर्भ में भारत और ब्राजील को शामिल करने का समर्थन सामने आ चुका है
भारत की स्थायी सदस्यता की मुहिम केवल भारत तक सीमित नहीं है. भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान मिलकर G4 समूह बनाते हैं
चारों देश सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने की मांग का समर्थन करते हैं. उनका मानना है कि वर्तमान संरचना आज की वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक वास्तविकताओं को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करती
हालांकि स्थायी सदस्यता के सवाल पर अलग-अलग देशों और क्षेत्रीय समूहों के बीच मतभेद भी हैं. इसलिए भारत का समर्थन करने वाले देशों की संख्या बढ़ना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन इससे अपने आप UNSC में बदलाव नहीं हो जाता
UNSC सुधार की चर्चा में सिर्फ भारत और ब्राजील का मुद्दा नहीं है. अफ्रीकी देश भी सुरक्षा परिषद में स्थायी प्रतिनिधित्व की मांग लंबे समय से उठा रहे हैं
अफ्रीका का तर्क है कि महाद्वीप के देशों की संख्या और वैश्विक शांति-सुरक्षा से जुड़े मुद्दों में उनकी भूमिका को देखते हुए परिषद में उन्हें स्थायी प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए
पुर्तगाल के प्रधानमंत्री ने भी अपने हालिया बयान में अफ्रीका को भारत और ब्राजील के साथ जोड़कर स्थायी सीटों की वकालत की
यानी UNSC सुधार की बहस अब सिर्फ दो-चार देशों की सदस्यता का सवाल नहीं रह गई है, बल्कि इसमें क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी जुड़ा हुआ है
अगर भविष्य में भारत को स्थायी सदस्यता मिलती है, तो सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि भारत सुरक्षा परिषद का स्थायी हिस्सा बन जाएगा. इससे अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर भारत की भागीदारी संस्थागत रूप से लगातार बनी रहेगी
अगर सुधार के तहत नए स्थायी सदस्यों को वीटो का अधिकार भी दिया जाता है, तो भारत को मौजूदा P5 के समान विशेष मतदान शक्ति मिल सकती है. लेकिन यह जरूरी नहीं कि किसी भी प्रस्तावित सुधार मॉडल में नए स्थायी सदस्यों को वीटो अधिकार उसी रूप में मिले. यही मुद्दा UNSC सुधार की बातचीत में महत्वपूर्ण और जटिल विषयों में से एक है
भारत की दावेदारी के पक्ष में कई देशों के बयान सामने आते रहे हैं, लेकिन UNSC में सुधार करना आसान प्रक्रिया नहीं है.सुरक्षा परिषद की संरचना में बदलाव के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन करना पड़ता है. इसके लिए व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहमति की आवश्यकता होती है
इसके अलावा मौजूदा स्थायी सदस्यों और विभिन्न क्षेत्रीय समूहों के बीच यह सहमति बनाना भी जरूरी है कि कितने नए स्थायी सदस्य जोड़े जाएं, किन क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व मिले और नए सदस्यों के अधिकार क्या हों
एक अन्य चुनौती यह है कि अलग-अलग क्षेत्रीय समूहों की अपनी प्राथमिकताएं हैं. अफ्रीका अपने लिए प्रतिनिधित्व चाहता है, G4 देश स्थायी सदस्यता के पक्ष में हैं और कुछ देशों के बीच नए सदस्यों की भूमिका तथा वीटो जैसे मुद्दों पर अलग-अलग विचार हैं
इसलिए किसी देश का सार्वजनिक समर्थन महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत तो है, लेकिन वह सदस्यता के लिए अंतिम फैसला नहीं होता
पुर्तगाल का ताजा बयान भारत की लंबे समय से चली आ रही मांग को मिला एक और अंतरराष्ट्रीय समर्थन है. खासकर तब, जब UNSC में सुधार को लेकर वैश्विक बहस फिर तेज है
हाल के दिनों में V4 समूह के चार यूरोपीय देशों ने भी भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया है. इससे यह दिखता है कि UNSC सुधार के मुद्दे पर भारत के पक्ष में अलग-अलग क्षेत्रों से आवाजें उठ रही हैं.लेकिन समर्थन से आगे की असली चुनौती संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के बीच औपचारिक सहमति बनाने की है
UNSC सुधार की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है और इसका कोई तत्काल समाधान दिखाई नहीं देता. भारत के लिए अब चुनौती केवल समर्थन जुटाने की नहीं, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रीय और राजनीतिक समूहों के बीच व्यापक सहमति बनाने की भी है
पुर्तगाल का ताजा बयान इसी लंबी कूटनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा है. इससे भारत की स्थायी सदस्यता की मांग को एक और सार्वजनिक समर्थन मिला है, लेकिन सुरक्षा परिषद की संरचना बदलने का अंतिम फैसला व्यापक बहुपक्षीय बातचीत और संयुक्त राष्ट्र चार्टर में आवश्यक संशोधनों पर निर्भर करेगा
फिलहाल इतना साफ है कि 1945 में बनी UNSC संरचना को 21वीं सदी की वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप बदलने की मांग लगातार मजबूत हो रही है. भारत, ब्राजील और अफ्रीका को लेकर पुर्तगाल का समर्थन इसी व्यापक सुधार बहस की ताजा कड़ी है






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