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4 लखनऊ: कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत विपक्ष के कई सांसदों के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद इस मामले पर सियासत तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को उचित बताया है। उन्होंने कहा कि किसी सरकारी संस्थान में बिना अनुमति जबरन प्रवेश करने या वहां तोड़फोड़ करने की कोशिश की जाएगी तो पुलिस कार्रवाई करेगी और गिरफ्तारी भी हो सकती है।
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ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि सरकारी संस्थानों में प्रवेश और प्रदर्शन के लिए नियमों का पालन जरूरी है। अगर कोई व्यक्ति या समूह जबरन परिसर में प्रवेश करता है और वहां अव्यवस्था पैदा करता है, तो पुलिस की ओर से कार्रवाई किया जाना स्वाभाविक है। राजभर के मुताबिक, कानून सभी के लिए समान है और किसी भी व्यक्ति को नियम तोड़ने पर कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, विपक्षी सांसदों ने संसद भवन से निर्वाचन सदन तक मार्च निकालने की योजना बनाई थी। पुलिस का कहना है कि इस मार्च के लिए जरूरी अनुमति नहीं ली गई थी। जब प्रदर्शनकारी चुनाव आयोग की ओर बढ़े तो पुलिस ने रास्ते में बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। इसके बाद कई विपक्षी नेता सड़क पर बैठ गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाने का प्रयास किया। इसी दौरान कुछ कांग्रेस नेता आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंच गए और वहां भी प्रदर्शन जारी रखा।
पुलिस के मुताबिक, आकाशवाणी भवन परिसर में मौजूद नेताओं से वहां से हटने के लिए कहा गया था। हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने परिसर खाली नहीं किया। उनकी मांग थी कि विपक्षी सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल को चुनाव आयोग के अधिकारियों से मिलने की अनुमति दी जाए। काफी देर तक बातचीत के बावजूद जब प्रदर्शन समाप्त नहीं हुआ तो पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाने की कार्रवाई शुरू की। करीब आठ घंटे चले गतिरोध के बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया।
पुलिस के अनुसार, पूरे दिन चले विरोध प्रदर्शन के दौरान लगभग 260 लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें करीब 10 सांसद भी शामिल थे। हिरासत में लिए गए लोगों को किंग्सवे कैंप स्थित नई पुलिस लाइन्स ले जाया गया। बाद में सभी को रिहा कर दिया गया।
आकाशवाणी भवन परिसर में प्रवेश और वहां प्रदर्शन करने के मामले में दिल्ली पुलिस ने अब FIR दर्ज की है। इसमें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई अन्य लोगों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस का आरोप है कि कुछ नेता बिना अनुमति परिसर में दाखिल हुए और वहां विरोध प्रदर्शन किया। फिलहाल FIR में लगाई गई सभी धाराओं की विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। इस कार्रवाई के बाद विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। जहां विपक्ष इसे लोकतांत्रिक विरोध की आवाज बता रहा है, वहीं सरकार की ओर से नियम-कानून का पालन करने पर जोर दिया जा रहा है।
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