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3 लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन का आज आखिरी दिन है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा के लिए अपने आठ उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है। बीजेपी की सूची सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी से निष्कासित गोसाईगंज विधायक अभय सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सपा के PDA फॉर्मूले पर सवाल खड़े किए हैं।
अभय सिंह ने अपनी पोस्ट में समाजवादी पार्टी के राज्यसभा उम्मीदवारों का जिक्र करते हुए लिखा कि सपा जिस PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक की राजनीति की बात करती है, उसकी उम्मीदवारों की सूची में इन वर्गों का प्रतिनिधित्व कहां दिखाई देता है। उन्होंने प्रो. राम गोपाल यादव और उद्योगपति धनराज परिमल नथवानी के नाम का जिक्र करते हुए सपा पर निशाना साधा।इसके मुकाबले अभय सिंह ने बीजेपी की ओर से घोषित आठ उम्मीदवारों की सामाजिक पृष्ठभूमि का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी की सूची में OBC, अनुसूचित जाति, ब्राह्मण, राजपूत और महिला वर्ग से जुड़े चेहरों को जगह दी गई है।
बीजेपी के उम्मीदवारों में धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार शामिल हैं।अभय सिंह ने अपनी पोस्ट के अंत में लिखा कि नारा घोषणा है, जबकि प्रतिनिधित्व उसकी परीक्षा है और भाषण आश्वासन है, जबकि अवसर उसका प्रमाण है। उन्होंने कहा कि समाज का नाम लेना राजनीति है, लेकिन समाज को स्थान देना प्रतिनिधित्व है। साथ ही उन्होंने कहा कि राजनीति भाषण से नहीं, बल्कि फैसलों से पहचानी जाती है।राज्यसभा चुनाव के बीच अभय सिंह का यह बयान सपा के PDA मॉडल और बीजेपी की उम्मीदवार चयन प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है। अब निगाहें नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों दलों की रणनीति और चुनावी समीकरण पर टिकी हैं।
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