उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने अपने आठ उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है, 16 अक्टूबर को होने वाले चुनाव के लिए पार्टी की ओर से जारी सू…
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने अपने आठ उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है, 16 अक्टूबर को होने वाले चुनाव के लिए पार्टी की ओर से जारी सूची में धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया गया है, बीजेपी की इस सूची में सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखा गया है, रिपोर्टों के मुताबिक, आठ उम्मीदवारों में तीन OBC, दो अनुसूचित जाति और तीन सामान्य वर्ग से हैं, दो महिला उम्मीदवारों—प्रियंका सिंह रावत और श्रुति गंगवार—को भी सूची में जगह मिली है।
– चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ शिकायत मामले में 23 अक्टूबर को अगली सुनवाई, दिल्ली पुलिस को जांच पूरी करने का समय
उम्मीदवारों की सूची में धर्मपाल सिंह, प्रकाश पाल और श्रुति गंगवार को OBC वर्ग से जोड़ा जा रहा है, वहीं विद्यासागर सोनकर के साथ प्रियंका सिंह रावत को दलित प्रतिनिधित्व के संदर्भ में देखा जा रहा है, इस तरह पार्टी ने अलग-अलग सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है, सामान्य वर्ग से राधाकांत ओझा, गोपी कृष्ण पांडेय और राम प्रताप सिंह चौहान को उम्मीदवार बनाया गया है, इस सूची में संगठन से जुड़े नेताओं को भी प्रमुखता मिली है।
बीजेपी की सूची में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा का नाम नहीं है, दोनों मौजूदा राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल नवंबर में समाप्त होने वाला है, इससे पहले दोनों नेताओं के दोबारा उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा थी, वहीं, स्मृति ईरानी और कुमार विश्वास जैसे नाम भी अंतिम सूची में शामिल नहीं हैं, रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी के राज्य पैनल में कई नामों पर विचार किया गया था, लेकिन केंद्रीय स्तर पर अंतिम सूची में संगठन और राज्य से जुड़े चेहरों को जगह दी गई, उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होना है, नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है, जबकि नामांकन पत्रों की जांच 7 अक्टूबर और नाम वापसी की अंतिम तारीख 9 अक्टूबर है। मतदान के बाद उसी दिन मतगणना प्रस्तावित है।
– योगी सरकार ने बदली यूपी की जर्जर जल संरचनाओं की तस्वीर, बैराजों के पुराने गेटों को मिला नया जीवन
राज्यसभा चुनाव के साथ ही उत्तर प्रदेश की राजनीति में सामाजिक प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक समीकरणों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है, हालांकि, उम्मीदवारों की सूची को लेकर राजनीतिक दलों की अपनी-अपनी व्याख्याएं हैं और इसके व्यापक चुनावी प्रभाव का आकलन आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा।






टिप्पणियाँ 0