दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रस्तावित प्रदर्शन के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के…

दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रस्तावित प्रदर्शन के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आंदोलन के समर्थन का ऐलान करते हुए बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है, उन्होंने कहा कि सरकार अगर ताकत के बल पर जनता और युवाओं को रोकने की कोशिश करती है, तो यह उसकी बड़ी भूल साबित होगी।

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “किसी के रोके नहीं रुकेगा, अब दिल्ली में देश जुटेगा,” उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी देश की युवा ऊर्जा के साथ खड़ी है। उनके इस बयान के बाद जंतर-मंतर पर प्रस्तावित आंदोलन को लेकर राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।

अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में जंतर-मंतर को केवल एक प्रदर्शन स्थल तक सीमित न बताते हुए इसे नई चेतना और जागरण का प्रतीक बताया, उन्होंने आरोप लगाया कि अगर बीजेपी सरकार ताकत के बल पर आंदोलनकारियों को रोकने की कोशिश करती है, तो इसका विरोध देश के दूसरे हिस्सों में भी देखने को मिल सकता है, सपा प्रमुख ने लिखा कि यदि आंदोलनकारियों को रोका गया, तो देश में हर जगह जंतर-मंतर बन जाएगा। उनके बयान को युवाओं और प्रदर्शनकारियों के समर्थन में राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

अखिलेश यादव ने अपने खास अंदाज में शायरी के जरिए भी बीजेपी सरकार पर हमला बोला, उन्होंने सुरक्षा इंतजामों और युवाओं के हौसले का जिक्र करते हुए लिखा:

“माना बादशाहों का बंदोबस्त है बख्तरबंद,पर उन्होंने देखा न नौजवानों का दमखम।यहां हौसलों की भी तैयारी है चाकचौबंद,हैं साथ सब, मानकर इसको अंतिम जंग।”

किसीके रोके नहीं रुकेगाअब दिल्ली में देश जुटेगा!हम देश की युवा ऊर्जा के साथ हैं। भाजपा सरकार अगर समझ रही है कि वो ताक़त के बल पर जनता को रोक लेगी तो ये उसकी और भी बड़ी भूल साबित होगी। ‘जंतर-मंतर’ अब एक जगह का नाम नहीं, एक नई चेतना और जागरण का प्रतीक बन गया है। अगर सरकार ने…

सपा प्रमुख की इस शायरी को आंदोलन और युवाओं के समर्थन में दिए गए राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी है, रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के साथ केंद्रीय सुरक्षा बलों की भी तैनाती की गई है वहीं, कुछ मेट्रो स्टेशनों पर सेवाएं बंद किए जाने और दिल्ली आने वाली कई ट्रेनों के रद्द होने की खबरों के बीच पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए जा रहे हैं, प्रदर्शन से जुड़े संगठनों की ओर से चुनाव प्रक्रिया और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए जा रहे हैं। वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया इस मुद्दे के महत्वपूर्ण पहलू हैं।

इस बीच, इंडिया गठबंधन के सांसदों की ओर से भी चुनाव से जुड़े मुद्दों पर गतिविधियां जारी हैं, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, विपक्षी सांसदों ने शुक्रवार रात राष्ट्रपति से मुलाकात की थी और बताया था कि उनकी बात सुनी गई, इसके बाद सोमवार, 12 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश (CJI) से मुलाकात का कार्यक्रम बताया गया है, विपक्ष की इन गतिविधियों के बीच जंतर-मंतर आंदोलन को अखिलेश यादव का समर्थन मिलने से राजनीतिक बहस और तेज होने के आसार हैं, जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन, दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और विपक्षी नेताओं के बयानों ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है, अखिलेश यादव ने युवाओं के साथ खड़े होने का संदेश देते हुए सरकार को चेतावनी दी है कि जनता की आवाज को ताकत के बल पर दबाने की कोशिश उलटा असर डाल सकती है।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रदर्शन को लेकर दिल्ली में आगे क्या स्थिति बनती है और केंद्र सरकार तथा चुनाव आयोग की ओर से इन मांगों पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।