यमन के हूती विद्रोहियों के सऊदी अरब पर लगातार हमलों के बीच सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच एक अहम बैठक हुई है. शुक्रवार को सऊदी की राजधानी रियाद में तीनों…
यमन के हूती विद्रोहियों के सऊदी अरब पर लगातार हमलों के बीच सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच एक अहम बैठक हुई है. शुक्रवार को सऊदी की राजधानी रियाद में तीनों देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने मुलाकात की. बैठक में क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और सऊदी अरब के सामने बढ़ते खतरे पर विस्तार से चर्चा की गई
बैठक में सैन्य और खुफिया जानकारी साझा करने, तीनों देशों की सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने और रक्षा क्षमताओं को आपस में जोड़ने जैसे मुद्दों पर बातचीत हुई. इस दौरान सऊदी अरब की सुरक्षा से जुड़े हालिया घटनाक्रम पर भी चर्चा की गई. मीटिंग में तुर्की के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ जनरल सेल्चुक बायराक्तारोग्लू, सऊदी अरब के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ जनरल फैय्याद बिन हमेद अल-रुवैली और पाकिस्तान के चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज एवं आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर मौजूद रहे
सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमलों के बीच हुई इस बैठक को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. हाल के दिनों में सऊदी अरब के अलग-अलग इलाकों को निशाना बनाकर ड्रोन और मिसाइल हमलों की खबरें सामने आई हैं. सऊदी अधिकारियों के अनुसार, 15 सितंबर को मक्का की दिशा में बढ़ रहे एक ड्रोन को सऊदी एयर डिफेंस ने मार गिराया था. इसके अलावा ताइफ और यानबू की ओर से बैलिस्टिक मिसाइल हमलों की भी जानकारी सामने आई है. ऐसे समय में रियाद में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के सैन्य प्रमुखों का एक साथ बैठना महत्वपूर्ण माना जा रहा है. बैठक के दौरान मक्का समेत सऊदी अरब के नागरिक और आर्थिक ठिकानों को निशाना बनाए जाने की निंदा भी की गई
सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच 7 अगस्त को मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट हुआ था. इस समझौते के तहत तीनों देशों ने आपसी सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की बात कही थी. समझौते में यह प्रावधान भी बताया गया है कि अगर तीनों में से किसी एक देश पर सशस्त्र हमला होता है, तो उसे सभी तीन देशों पर हमला माना जाएगा. इस समझौते का उद्देश्य साझा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और तीनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग बढ़ाना है. अब सऊदी अरब पर हूती हमलों के बीच यह समझौता एक महत्वपूर्ण परिस्थिति में सामने आया है
हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन प्राप्त होने की बात लंबे समय से सामने आती रही है. ऐसे में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच बढ़ता सैन्य सहयोग क्षेत्रीय समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण है. तीनों देशों ने सामूहिक रक्षा और आपसी सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता जताई है. हालांकि, अगर सऊदी अरब पर हमले आगे भी जारी रहते हैं तो पाकिस्तान और तुर्की किस स्तर पर सैन्य या अन्य सहायता देंगे, इसका पूरा विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है.ऐसे में आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि तीनों देशों के बीच हुआ रक्षा समझौता जमीन पर किस तरह लागू होता है और हूती हमलों के बढ़ते दबाव का सामना करने में इसका कितना असर दिखाई देता है
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