Explainer: पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ यानी PTI और सरकार के बीच तनाव एक बार फिर बढ़…
Explainer: पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ यानी PTI और सरकार के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है. PTI ने देशव्यापी प्रदर्शन और इस्लामाबाद की ओर मार्च का ऐलान किया है. इसके जवाब में प्रशासन ने राजधानी और उससे जुड़े प्रमुख रास्तों पर बड़े पैमाने पर सुरक्षा इंतजाम किए हैं
सड़कों पर कंटेनर, पुलों पर रेत की बोरियां, राजमार्गों की नाकेबंदी और हजारों सुरक्षाकर्मियों की तैनाती ने इस्लामाबाद को लगभग हाई-सिक्योरिटी जोन में बदल दिया है. इस बीच इमरान खान की तीन बहनों की 30 दिन की हिरासत ने भी विवाद को और बढ़ा दिया है. ऐसे में समझते हैं कि पूरा मामला क्या है, PTI का मार्च क्यों हो रहा है और सरकार ने इतनी सख्ती क्यों की है
PTI का मुख्य मुद्दा इमरान खान की जेल से रिहाई है. इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं और उनके खिलाफ कई मामलों में कानूनी कार्रवाई हुई है. PTI लगातार आरोप लगाती रही है कि उनके साथ जेल में उचित व्यवहार नहीं किया जा रहा और उन्हें राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया जा रहा है
पार्टी ने इसी मुद्दे को लेकर देशव्यापी विरोध और इस्लामाबाद मार्च का आह्वान किया है. PTI नेताओं का कहना है कि प्रदर्शन का उद्देश्य इमरान खान की रिहाई के साथ-साथ उनके मामलों में निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया की मांग करना भी है
दूसरी ओर, सरकारी अधिकारियों का कहना है कि बड़े पैमाने पर मार्च से राजधानी में कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हो सकती है और किसी भी संभावित हिंसा को रोकने के लिए सुरक्षा कदम उठाए जा रहे हैं
प्रशासन ने PTI समर्थकों को राजधानी में प्रवेश करने से रोकने के लिए कई प्रमुख रास्तों को बंद किया है. रिपोर्टों के मुताबिक, 1,000 से ज्यादा शिपिंग कंटेनर सड़कों पर लगाए गए हैं. इनमें से कुछ कंटेनरों को नुकीले अवरोधों से मजबूत किया गया है
पुलों पर रेत की बोरियां रखी गई हैं और इस्लामाबाद की ओर जाने वाले प्रमुख राजमार्गों पर भी रोक लगाई गई है. राजधानी में सार्वजनिक सभा और भीड़ जुटाने पर प्रतिबंध लगाया गया है
शहर में लगभग 22,000 पुलिस और अन्य सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है. इसका मकसद PTI कार्यकर्ताओं और समर्थकों को बड़ी संख्या में राजधानी में पहुंचने से रोकना और संभावित टकराव को नियंत्रित करना बताया गया है
सुरक्षा इंतजाम सिर्फ इस्लामाबाद तक सीमित नहीं हैं. PTI के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में भी सुरक्षा बढ़ाई गई है
पेशावर को इस्लामाबाद से जोड़ने वाले प्रमुख मार्ग को बंद किया गया है. यही वह क्षेत्र है जहां PTI का मजबूत राजनीतिक आधार है और पार्टी को उम्मीद है कि यहां से बड़ी संख्या में समर्थक राजधानी की ओर मार्च कर सकते हैं
खैबर पख्तूनख्वा के अधिकारियों ने सुरक्षा कदमों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी बताया है. वहीं PTI नेताओं का कहना है कि सरकार की कार्रवाई उनके शांतिपूर्ण राजनीतिक प्रदर्शन को रोकने की कोशिश है
राजधानी की नाकेबंदी का असर सिर्फ राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहा है. प्रमुख रास्ते बंद होने और आवाजाही प्रभावित होने से आम नागरिकों तथा कारोबारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है
रिपोर्टों के मुताबिक, राजधानी में जरूरी सामान की आपूर्ति और कारोबार प्रभावित हुआ है. सड़कों पर भारी सुरक्षा व्यवस्था के कारण सामान्य यातायात भी बाधित हुआ है
यानी राजनीतिक विरोध को रोकने के लिए उठाए गए सुरक्षा कदमों का सीधा असर शहर की रोजमर्रा की गतिविधियों पर भी पड़ा है
PTI ने शुरुआती तौर पर 27 सितंबर को देशव्यापी प्रदर्शन और इस्लामाबाद मार्च का कार्यक्रम रखा था. बाद में पार्टी की ओर से इसे 4 अक्टूबर तक टालने की घोषणा की गई
पार्टी नेताओं का कहना है कि तारीख आगे बढ़ाने का मकसद सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाए रखना और आंदोलन के लिए ज्यादा समय जुटाना है. हालांकि, मार्च की रणनीति और उसके स्वरूप को लेकर PTI नेतृत्व के भीतर भी चर्चा जारी रही है
इस बदलाव का एक असर यह भी हो सकता है कि राजधानी में लगाए गए कई सुरक्षा प्रतिबंध और सड़क अवरोध कुछ समय तक बने रहें या परिस्थितियों के अनुसार बदले जाएं
मार्च से पहले इमरान खान के परिवार के खिलाफ हुई कार्रवाई ने विवाद को और बढ़ा दिया. उनकी बहन अलीमा खान को 20 सितंबर को हिरासत में लिया गया. इसके बाद उजमा खान और नूरीन नियाजी को भी 30 दिनों के लिए हिरासत में लिया गया
तीनों के खिलाफ पंजाब के Maintenance of Public Order (MPO) Ordinance, 1960 के तहत कार्रवाई की गई. प्रशासन की ओर से सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर चिंता को इसका आधार बताया गया
PTI और परिवार की ओर से इन हिरासतों को चुनौती दी गई है. उनका तर्क है कि इन आदेशों में पर्याप्त आधार नहीं बताए गए और सामान्य कानूनी प्रक्रिया के बजाय निवारक हिरासत का इस्तेमाल किया गया
इमरान खान की बहनों की हिरासत के खिलाफ लाहौर हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गईं. 24 सितंबर को अदालत ने तत्काल हिरासत आदेशों को निलंबित करने की मांग स्वीकार नहीं की, लेकिन पंजाब सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा
इसका मतलब है कि अदालत ने फिलहाल तत्काल राहत नहीं दी है, लेकिन हिरासत की वैधता से जुड़े सवालों पर आगे सुनवाई जारी रहेगी
राजनीतिक रूप से दोनों घटनाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं. PTI का आंदोलन सीधे इमरान खान की रिहाई की मांग को केंद्र में रखता है. दूसरी ओर, सरकार सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को लेकर प्रतिबंध लगा रही है
इमरान खान और PTI उनके खिलाफ चल रहे मामलों को राजनीतिक कार्रवाई बताते रहे हैं और आरोपों से इनकार करते हैं. दूसरी ओर, सरकार और प्रशासन सुरक्षा तथा कानून-व्यवस्था को अपनी कार्रवाई का आधार बताते हैं. इसलिए दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि PTI 4 अक्टूबर के प्रस्तावित मार्च को किस स्वरूप में आगे बढ़ाती है और प्रशासन उसका सामना कैसे करता है
अगर बड़ी संख्या में लोग राजधानी की ओर बढ़ते हैं तो सड़क बंदी, सुरक्षा बलों की तैनाती और गिरफ्तारी जैसे कदमों का दायरा बढ़ सकता है. वहीं, लंबे समय तक राजधानी बंद रहने से आम नागरिकों और कारोबार पर पड़ने वाला दबाव भी सरकार के लिए एक अलग चुनौती बन सकता है
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम के तीन प्रमुख केंद्र हैं इमरान खान की जेल और उनकी रिहाई की मांग, PTI का प्रस्तावित इस्लामाबाद मार्च और सरकार की सुरक्षा एवं निवारक कार्रवाई. आने वाले दिनों में इन तीनों के बीच संतुलन ही पाकिस्तान के राजनीतिक माहौल की दिशा तय करेगा




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