लखनऊ। उत्तर प्रदेश में हर घर तक पहुंच रहे पेयजल की गुणवत्ता पर अब गांव स्तर पर भी लगातार नजर रखी जा रही है। जल जीवन मिशन के तहत करीब पांच लाख महिलाओं को फील्ड…
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में हर घर तक पहुंच रहे पेयजल की गुणवत्ता पर अब गांव स्तर पर भी लगातार नजर रखी जा रही है। जल जीवन मिशन के तहत करीब पांच लाख महिलाओं को फील्ड टेस्ट किट (एफटीके) के जरिए पानी की गुणवत्ता जांच का प्रशिक्षण दिया गया है। ये महिलाएं अब सुजलाम शक्ति समूह के माध्यम से गांवों में पेयजल की नियमित जांच और निगरानी कर रही हैं।जल गुणवत्ता निगरानी के लिए तैयार किए गए इस नेटवर्क के तहत वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2026-27 तक खबर लिखे जाने तक 1,39,68,795 जल नमूनों की जांच की जा चुकी है। इनमें वर्ष 2022-23 में 39,47,102, 2023-24 में 36,68,743, 2024-25 में 38,19,440, 2025-26 में 5,51,221 और 2026-27 में अब तक 19,82,289 जल नमूनों का परीक्षण किया गया है।
जल जीवन मिशन के पहले चरण में प्रत्येक राजस्व गांव से पांच महिलाओं को पेयजल गुणवत्ता की जांच के लिए प्रशिक्षित किया गया था। स्वयं सहायता समूहों की प्रशिक्षित महिलाओं के साथ आंगनबाड़ी और आशा कार्यकत्रियों को भी पात्रता के आधार पर प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के बाद इन्हें फील्ड टेस्ट किट उपलब्ध कराई गई, जिससे गांव स्तर पर पानी में आयरन, नाइट्रेट, क्लोराइड समेत विभिन्न अशुद्धियों की प्राथमिक जांच की जाती है।एफटीके से जांच के दौरान किसी नमूने में बैक्टीरियोलॉजिकल खामी मिलने पर उसे जिला और राज्य स्तर की प्रयोगशालाओं में विस्तृत जांच के लिए भेजा जाता है। पेयजल की गुणवत्ता की जांच भारतीय मानक आईएस-10500:2012 के आधार पर की जाती है।
प्रशिक्षित महिलाएं हर महीने फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन यानी एफएचटीसी, स्वास्थ्य केंद्रों, हैंडपंप और अन्य पेयजल स्रोतों से नमूने लेकर उनकी जांच करती हैं। इसके लिए निर्धारित मानदेय के आधार पर उन्हें भुगतान भी किया जाता है। इससे जहां गांवों में पेयजल की गुणवत्ता पर निगरानी मजबूत हुई है, वहीं ग्रामीण महिलाओं के लिए आय का एक अतिरिक्त माध्यम भी तैयार हुआ है।सुजलाम शक्ति समूहों की भूमिका सिर्फ पानी की गुणवत्ता जांच तक सीमित नहीं है। प्रशिक्षित महिलाओं को ग्रामीणों को सुरक्षित पेयजल के इस्तेमाल, जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन के प्रति जागरूक करने की जिम्मेदारी भी दी जाती है। इसके अलावा इन महिलाओं को ग्राम स्तर पर गठित होने वाली जल समितियों में सदस्य के रूप में भी शामिल किया जाता है।
पिछले सात वर्षों में गांव, ब्लॉक और जिला स्तर पर सुजलाम शक्ति समूहों का नेटवर्क तैयार किया गया है। यह नेटवर्क पेयजल की नियमित निगरानी के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण और जागरूकता अभियानों में भी भूमिका निभा रहा है।उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक योगेश कुमार के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण पेयजल पहुंचाना विभाग की प्राथमिकता है। गांव स्तर पर प्रशिक्षित महिलाओं को जल गुणवत्ता जांच से जोड़कर निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया है। पेयजल आपूर्ति से जुड़ी शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर भी विभाग लगातार काम कर रहा है। जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश में पेयजल आपूर्ति और गुणवत्ता निगरानी के क्षेत्र में प्रगति हुई है और आगे निगरानी व्यवस्था तथा सेवा गुणवत्ता को और मजबूत किया जाएगा।वित्तीय वर्ष 2022-23 में 39,47,102, 2023-24 में 36,68,743, 2024-25 में 38,19,440, 2025-26 में 5,51,221 और 2026-27 में खबर लिखे जाने तक 19,82,289 जल नमूनों की एफटीके से जांच की गई है।वित्तीय वर्ष 2026-27 के आंकड़ों के अनुसार इस तरह कुल 1,39,68,795 जल नमूनों का परीक्षण किया जा चुका है।






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