ग्रेटर नोएडा, 26 सितंबर। उत्तर प्रदेश अब इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से आगे बढ़कर एआई, सेमीकंडक्टर, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बन…

ग्रेटर नोएडा, 26 सितंबर। उत्तर प्रदेश अब इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से आगे बढ़कर एआई, सेमीकंडक्टर, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का अगला ग्रोथ इंजन बनने की क्षमता रखता है और राज्य में टेक्नोलॉजी, रिसर्च, इनोवेशन और मैन्युफैक्चरिंग का मजबूत इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है।ग्रेटर नोएडा में ‘यूपीज जर्नी फ्रॉम इलेक्ट्रॉनिक्स लीडर टू एआई एंड सेमीकंडक्टर पावरहाउस’ सत्र को संबोधित करते हुए जितिन प्रसाद ने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब देश और दुनिया में निवेश की चर्चा के दौरान उत्तर प्रदेश का नाम प्रमुखता से लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय विजन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार के बेहतर समन्वय से प्रदेश में बदलाव की गति तेज हुई है।

जितिन प्रसाद ने कहा कि टेक्नोलॉजी और ट्रेड देश की विकास यात्रा के दो महत्वपूर्ण इंजन हैं। उत्तर प्रदेश में इन दोनों क्षेत्रों को बढ़ावा देकर विकास की नई संभावनाएं तैयार की जा रही हैं। सरकार का लक्ष्य प्रदेश को टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग का प्रमुख केंद्र बनाना है।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब टेक्नोलॉजी से जुड़े निवेश को केवल नोएडा तक सीमित रखने के बजाय प्रदेश के दूसरे हिस्सों तक ले जाने पर जोर दिया जा रहा है। इससे राज्य के युवाओं के लिए रोजगार और नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने सैमसंग और योटा जैसे बड़े निवेश, डाटा सेंटर, एआई लैब्स और अन्य टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर को प्रदेश में बन रहे नए इकोसिस्टम का हिस्सा बताया।उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि उत्तर प्रदेश में डिजाइन और रिसर्च से लेकर सेमीकंडक्टर कंपोनेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट तक पूरी वैल्यू चेन विकसित हो। इससे प्रदेश को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा।जितिन प्रसाद ने कहा कि भारत अब केवल उत्पादों की असेंबली तक सीमित नहीं रह सकता। इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम जैसी पहलों के जरिए देश में कंपोनेंट निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भारत की डिजाइन क्षमता और प्रतिभा को दुनिया पहले से पहचानती है। अब जरूरत डिजाइन और टैलेंट के साथ मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को जोड़ने की है।केंद्रीय मंत्री ने उद्योग जगत से सरकारी प्रोत्साहन और सब्सिडी का लाभ उठाते हुए अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि सरकार जमीन, नीतियां, मंजूरियां और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करा सकती है, लेकिन लंबे समय में उद्योगों को प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर बनना होगा। निवेशकों के लिए सुरक्षित और स्थिर नीतिगत वातावरण जरूरी है, ताकि वे लंबे समय के निवेश संबंधी फैसले ले सकें।जितिन प्रसाद ने कहा कि उत्तर प्रदेश में एआई का इस्तेमाल सिर्फ नई तकनीक अपनाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य उत्पादकता, दक्षता और लागत प्रतिस्पर्धा बढ़ाना होना चाहिए। यदि एआई के इस्तेमाल से कोई एमएसएमई अपनी लागत कम कर पाता है या उत्पादन क्षमता बढ़ाता है, तो यही तकनीक के वास्तविक इस्तेमाल का लाभ होगा।उन्होंने युवाओं को एआई इनोवेटर्स, रिसर्चर्स और एडॉप्टर्स के तौर पर तैयार करने पर जोर दिया। साथ ही आईआईटी कानपुर समेत शोध संस्थानों और उद्योगों के बीच सहयोग को और मजबूत करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के सामने टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ने का बड़ा अवसर है। आने वाले वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आज से तैयारी करनी होगी, ताकि प्रदेश के युवाओं को बेहतर अवसर मिल सकें और उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख टेक्नोलॉजी एवं मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में अपनी भूमिका मजबूत कर सके।उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स आलोक कुमार ने कहा कि राज्य सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के साथ मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स यानी GCC के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दे रही है। नोएडा में पहले से कई GCC काम कर रहे हैं, जबकि लखनऊ में भी कुछ GCC ने अपनी गतिविधियां शुरू कर दी हैं।आलोक कुमार ने कहा कि नई GCC पॉलिसी और आईटी पॉलिसी के जरिए नोएडा के साथ लखनऊ और कानपुर में भी अधिक GCC आकर्षित करने का लक्ष्य है। लखनऊ में आईबीएम समेत कई आईटी और टेक्नोलॉजी कंपनियां मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि राज्य की GCC और आईटी नीतियों को मजबूत किया गया है और आईटी एवं आईटी इनेबल्ड सर्विसेज यानी ITES को पहले ही इंडस्ट्री स्टेटस दिया जा चुका है।