आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने सोमवार को बादल परिवार पर तीखा हमला करते हुए ऐतिहासिक अकाली दल पर कुर्बानियों पर बने पंथक आंदोलन को ए…

आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने सोमवार को बादल परिवार पर तीखा हमला करते हुए ऐतिहासिक अकाली दल पर कुर्बानियों पर बने पंथक आंदोलन को एक पारिवारिक राजनीतिक पार्टी में बदलने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि पार्टी लीडरशिप ने योजनाबद्ध तरीके से सिख संस्थाओं पर कब्जा जमाया है. उन्हें निजी और राजनीतिक फायदे के लिए उपयोग करने का प्रयास किया है

मीडिया को संबोधित करते हुए, आप पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने कहा कि अकाली मोर्चों का इतिहास कुर्बानियों का इतिहास रहा है, जिसमें आम अकाली सिर्फ कंधे पर परना रखकर जेल जाते थे और अपनी कुर्बानियों से 'जत्थेदार' का खिताब हासिल करते थे. पन्नू ने कहा,"वह शब्द कमाया हुआ था, यह ऐसी चीज नहीं थी, जिसे जिसे कोई अपने नाम के साथ जोड़े." उन्होंने आगे कहा कि यह परंपरा अब खत्म हो चुकी है. एक खास परिवार ने इस मोर्चे पर कब्जा कर लिया है. उन्होंने कहा कि प्रकाश सिंह बादल भी अपने पूरे राजनीतिक करियर में अपने नाम के साथ 'जत्थेदार' नहीं जोड़ पाए क्योंकि उस दर्जे के लिए बहुत बड़े योगदान की जरूरत होती थी

शिरोमणि अकाली दल के लीडर और पूर्व एसजीपीसी मेंबर अमरजीत सिंह चावला के खिलाफ हाल ही में दर्ज एफआईआर का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि आनंदपुर साहिब सराय में एक महिला द्वारा लगाए गए आरोपों ने सिख संस्थाओं के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. उन्होंने सवाल किया, “एफआईआऱ में एक महिला का आरोप है कि उसे आनंदपुर साहिब सराय में बंधक बनाकर रखा गया था

बलतेज पन्नू ने खास तौर पर एसजीपीसी प्रधान हरजिंदर सिंह धामी की भूमिका पर सवाल उठाए और धामी से यह बताने की मांग की कि जब महिला शिकायत लेकर उनके पास आई तो क्या कार्रवाई की गई. उन्होंने पूछा, “आप कहते हैं कि पुलिस की कोई ज़रूरत नहीं है और आप सब कुछ खुद संभाल लेंगे, तो आप हफ्तों और महीनों तक चुप क्यों रहे?”

बलतेज पन्नू ने अमरजीत सिंह चावला से जुड़े राजनीतिक और संगठनात्मक संबंधों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने पूछा कि यूथ अकाली दल के प्रधान सरबजीत सिंह झिंजर ने बहरीन की एक महिला के लिए टिकट का इंतज़ाम क्यों किया, विरसा सिंह वल्टोहा इसमें क्यों शामिल थे और असल में प्रेस कॉन्फ्रेंस किस मकसद से बुलाई गई थी. उन्होंने कहा कि सुखबीर सिंह बादल और हरजिंदर सिंह धामी को इन सवालों के जवाब देने होंगे

बलतेज पन्नू ने आगे सवाल उठाया कि गंभीर आरोपों के बावजूद अमरजीत सिंह चावला अपने नाम के बाद 'भाई' शब्द का इस्तेमाल क्यों करते रहे, जबकि सिख परंपरा में ऐसे टाइटल व्यवहार और योगदान से मिलते हैं. उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब की कार्रवाई का भी ज़िक्र किया, जिसने विवाद के बाद 20 सितंबर को अमरजीत सिंह चावला और एसजीपीसी कर्मचारी मलकीत सिंह को खालसा पंथ से निकाल दिया था. उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "यह घटना कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि बादल परिवार के सिख संस्थाओं पर कब्ज़ा करने और उनका इस्तेमाल करने के एक बड़े ट्रेंड का हिस्सा है."

2015 के बेअदबी विवाद का ज़िक्र करते हुए, बलतेज पन्नू ने कहा, "बुर्ज जवाहर सिंह वाला से श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का सरूप चोरी किया गया था और महीनों तक प्रशासन को चुनौती देने वाले पोस्टर लगाए गए थे, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई. जब बेअदबी की घटनाओं के बाद सिख समुदाय विरोध करने के लिए सड़कों पर उतरा, तो प्रदर्शनकारियों पर पानी की बौछारें, आंसू गैस और गोलियां चलाई गईं."

कोटकपूरा और बहबल कलां गोलीकांड की घटनाओं का ज़िक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि जिस तरह से बादल सरकार ने स्थिति को संभाला, उससे सिख समुदाय की आस्था को ठेस पहुंची है. उन्होंने कहा, “सिखों पर बेअदबी का इल्ज़ाम लगाने की कोशिश में दो सिख नौजवानों को बिना सोचे-समझे टॉर्चर किया गया. पंजाब के लोग 2015 और 2017 के बीच जो हुआ, उसे नहीं भूले हैं.”

बलतेज पन्नू ने कहा कि बादल के एजेंडे का दूसरा हिस्सा सिख संस्थाओं पर कब्ज़ा करना और फिर उनका इस्तेमाल राजनीतिक और निजी फ़ायदों के लिए करना है. पंजाब विधानसभा में एसजीपीसी के रिसोर्स का इस्तेमाल किसी और के खर्चे पर लंगर के लिए करने के बारे में दिए गए बयानों का ज़िक्र करते हुए पन्नू ने कहा, “धार्मिक संस्थाएं भी बादल परिवार के फ़ायदों को पूरा करने के लिए बनाई गई थीं. गंभीर विवादों का सामना कर रहे लोगों को बादल लीडरशिप द्वारा बार-बार अहमियत क्यों दी गई?”

बलतेज पन्नू ने कहा, "भगवंत मान सरकार पंजाब को पटरी पर लाने के लिए काम कर रही है, लेकिन बादल गुट द्वारा सिख संस्थाओं को किया जा रहा नुकसान एक और गंभीर चुनौती बन गया है." आप पंजाब के मीडिया इंचार्ज ने सिख बुद्धिजीवियों और दुनिया भर के पूरे सिख समुदाय से अपनी आवाज उठाने की अपील की. "अगर सिख बुद्धिजीवी और पंजाबी चुप रहे, तो बादल परिवार और उनकी 'जुंडली' सिख संस्थाओं और पंजाब का और नुकसान करेगी. बलतेज पन्नू ने पंजाबियों और सिख समुदाय से अपील की कि और नुकसान होने से पहले वे अपनी आवाज उठाएं. उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि सुखबीर बादल और जिन लोगों को उन्होंने सिख संस्थाओं में रखा है, उन्हें पंजाब की राजनीति और इन संस्थाओं से बाहर किया जाए."