GST Search Case:वकील पुनीत बत्रा के केबिन में GST विभाग की तलाशी और कंप्यूटर जब्त किए जाने से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट…

GST Search Case:वकील पुनीत बत्रा के केबिन में GST विभाग की तलाशी और कंप्यूटर जब्त किए जाने से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें हाईकोर्ट ने तलाशी को वैध माना था

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने बत्रा की चुनौती पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के संचालन पर रोक लगाई है. मामला अब वकील और उसके मुवक्किल के बीच होने वाली गोपनीय कानूनी बातचीत की सुरक्षा की सीमा से भी जुड़ गया है

दरअसल, GST विभाग ने Bass Legal LLP के परिसर में तलाशी ली थी. कार्रवाई के दौरान बत्रा के केबिन से दस्तावेज और कंप्यूटर जब्त किया गया था. बत्रा का कहना था कि कंप्यूटर में उनके मुवक्किलों से जुड़ी ऐसी जानकारी हो सकती है, जो वकील-मुवक्किल के बीच गोपनीय संवाद के दायरे में आती है

इससे पहले 18 सितंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने तलाशी के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी थी. हाईकोर्ट ने कहा था कि अगर जांच एजेंसी के पास प्रथम दृष्टया ऐसी सामग्री है, जिससे वकील की अपनी भूमिका जांच के दायरे में आती है, तो केवल वकील होने के आधार पर तलाशी से छूट नहीं मिल सकती

हाईकोर्ट ने GST अधिनियम की धारा 67(2) के तहत की गई तलाशी को वैध माना था. हालांकि, अदालत ने जब्त इलेक्ट्रॉनिक डेटा की जांच के दौरान सुरक्षा उपाय अपनाने और दूसरे मुवक्किलों से जुड़ी गोपनीय जानकारी को सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए थे

अब सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य सवाल यह है कि वकील-मुवक्किल के बीच गोपनीयता और कानूनी विशेषाधिकार की सीमा क्या होगी, खासकर तब जब जांच वकील की अपनी भूमिका से जुड़ी हो. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर फिलहाल रोक है और इस मुद्दे पर आगे की सुनवाई में कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी