Rishikesh Karnaprayag Rail Project: उत्तराखंड की पहाड़ियों में रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाली ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना ने निर्माण के क्षेत्र में एक अ…

Rishikesh Karnaprayag Rail Project: उत्तराखंड की पहाड़ियों में रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाली ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना ने निर्माण के क्षेत्र में एक अहम पड़ाव पार कर लिया है. परियोजना की पहली निकास सुरंग को सफलतापूर्वक आर-पार कर दिया गया है. 5.5 किलोमीटर लंबी निकास सुरंग का ब्रेकथ्रू हुआ. इस उपलब्धि के बाद निर्माण कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों ने तिरंगा हाथ में लेकर खुशी जताई

इस परियोजना का बड़ा हिस्सा पहाड़ों के अंदर सुरंगों के निर्माण से जुड़ा है. ऐसे में किसी सुरंग को आर-पार करना केवल निर्माण कार्य पूरा होने का संकेत नहीं, बल्कि जटिल पहाड़ी भूगर्भीय परिस्थितियों में इंजीनियरिंग टीम की प्रगति को भी दर्शाता है. अब मुख्य सुरंग को भी आर-पार करने की दिशा में काम और तेज किया जा रहा है

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना में कुल 28 सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है. मुख्य रेल सुरंगों के समानांतर निकास सुरंगें भी बनाई जा रही हैं. इनका इस्तेमाल आपात स्थिति में यात्रियों और कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए किया जा सकेगा. इन निकास सुरंगों में जरूरत पड़ने पर एंबुलेंस और छोटे वाहन भी चल सकेंगे. वहीं मुख्य सुरंगों में यात्री और मालगाड़ियों का संचालन प्रस्तावित है. परियोजना से जुड़े आंकड़ों के अनुसार अब तक 22 सुरंगों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है

परियोजना की पहली सुरंग ढालवाला से शिवपुरी के बीच करीब 10 किलोमीटर लंबी है. इसमें नीर गडडू से शिवपुरी तक के हिस्से में सुरंग निर्माण का काम पूरा हो चुका है. वहीं ढालवाला से नीर गडडू के बीच का हिस्सा निर्माण की दृष्टि से अधिक चुनौतीपूर्ण रहा है. इस क्षेत्र में बड़ी भूगर्भीय दरार होने के कारण सुरंग खोदाई के दौरान विशेष सावधानी बरतनी पड़ी. इसके अलावा सुरंग के अलग-अलग हिस्सों में भूमिगत जलस्रोत भी मौजूद हैं. खासकर खारास्रोत और नीर क्षेत्र में कई जलस्रोत होने के कारण इंजीनियरों को खुदाई के दौरान लगातार सतर्क रहना पड़ा

सुरंग निर्माण का काम रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) और मैक्स इंफ्रा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की टीम की निगरानी में किया जा रहा है. इंजीनियरों और कर्मचारियों ने भूगर्भीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया. कंपनी के परियोजना प्रबंधक निशीथ शर्मा ने बताया कि करीब 5.5 किलोमीटर लंबी निकास सुरंग का ब्रेकथ्रू सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है. इस हिस्से में कई जटिलताएं थीं, लेकिन टीम ने काम को सफलतापूर्वक पूरा किया

निकास सुरंग का काम पूरा होने के बाद अब मुख्य सुरंग को आर-पार करने की तैयारी तेज कर दी गई है. आरवीएनएल के उप महाप्रबंधक सिविल ओपी मालगुड़ी के मुताबिक, निकास सुरंग का ब्रेकथ्रू हो चुका है और मुख्य सुरंग पर काम तेजी से जारी है. मुख्य सुरंगों और उनके समानांतर बनाई जा रही निकास सुरंगों का नेटवर्क इस परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है. पहाड़ी क्षेत्र में किसी आपात स्थिति के दौरान वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होने से सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना की कुल लंबाई करीब 125 किलोमीटर है. इसके तहत 12 नए रेलवे स्टेशन बनाए जा रहे हैं। परियोजना में कुल 19 पुलों का निर्माण भी शामिल है. इस रेल लाइन पर यात्री ट्रेनों की अधिकतम गति 100 किलोमीटर प्रति घंटा, जबकि मालगाड़ियों की अधिकतम गति 65 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है. परियोजना में मुख्य और निकास सुरंगों का बड़ा नेटवर्क तैयार किया जा रहा है. मुख्य निकास सुरंगों की कुल लंबाई करीब 213 किलोमीटर बताई गई है

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना पूरी होने के बाद उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में रेल कनेक्टिविटी का विस्तार होगा. सड़क मार्ग पर निर्भरता वाले इन इलाकों में रेल परिवहन एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध कराएगा. परियोजना में लगातार हो रही सुरंगों और पुलों की प्रगति से यह साफ है कि पहाड़ी भूभाग में रेल नेटवर्क तैयार करने का काम चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रहा है. पहली निकास सुरंग का ब्रेकथ्रू इसी निर्माण यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है. अब मुख्य सुरंगों के निर्माण पर फोकस बढ़ने के साथ परियोजना के अगले चरण की तैयारियां भी तेज होंगी