उत्तर प्रदेश के भदोही में रविवार से 50वें इंडिया कारपेट एक्सपो की शुरुआत हो गई। चार से सात अक्टूबर तक आयोजित होने वाले इस एक्सपो में देश-विदेश के खरीदार और काल…

उत्तर प्रदेश के भदोही में रविवार से 50वें इंडिया कारपेट एक्सपो की शुरुआत हो गई। चार से सात अक्टूबर तक आयोजित होने वाले इस एक्सपो में देश-विदेश के खरीदार और कालीन उद्योग से जुड़े कारोबारी हिस्सा ले रहे हैं। उद्घाटन कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के कालीन उद्योग, निर्यात और प्रदेश में तेजी से बदल रहे कारोबारी माहौल को प्रमुखता से रेखांकित किया गया। करीब 250 एग्जीबिटर्स और 65 देशों से 450 से अधिक विदेशी खरीदार इस आयोजन में हिस्सा ले रहे हैं। इनमें ब्रिक्स देशों के 106 खरीदार भी शामिल हैं।

भदोही में आयोजित यह एक्सपो प्रदेश के पारंपरिक हस्तशिल्प को वैश्विक बाजार से जोड़ने के साथ उत्तर प्रदेश की बढ़ती निर्यात क्षमता को भी सामने रख रहा है।उत्तर प्रदेश का निर्यात पिछले एक दशक में तेजी से बढ़ा है। वित्त वर्ष 2016-17 में प्रदेश का निर्यात 84,283 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 2,01,241 करोड़ रुपये पहुंच गया। यानी करीब दस वर्षों में निर्यात मूल्य में लगभग ढाई गुना की बढ़ोतरी हुई है। 2012-17 के दौरान प्रदेश की औसत वार्षिक निर्यात वृद्धि दर 4.1 प्रतिशत थी, जो 2017 के बाद बढ़कर करीब 7.3 प्रतिशत हो गई। इस तरह प्रदेश के निर्यात की रफ्तार में भी उल्लेखनीय तेजी आई है।इस बढ़ते निर्यात में पारंपरिक उत्पादों के साथ नए क्षेत्रों की हिस्सेदारी भी लगातार बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2024-25 में इलेक्ट्रॉनिक्स करीब 24 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ प्रदेश के प्रमुख निर्यात क्षेत्रों में रहा।

इंजीनियरिंग उत्पादों की हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत और खाद्य एवं डेयरी उत्पादों की हिस्सेदारी लगभग 11 प्रतिशत रही। इससे उत्तर प्रदेश की एक्सपोर्ट बास्केट में आए बदलाव का अंदाजा लगाया जा सकता है। प्रदेश अब केवल चमड़ा, हस्तशिल्प और कालीन-दरी जैसे पारंपरिक उत्पादों के भरोसे नहीं है, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल और अन्य आधुनिक औद्योगिक क्षेत्रों में भी अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहा है।कालीन उद्योग की बात करें तो भदोही उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश-दुनिया में हस्तनिर्मित कालीन के प्रमुख केंद्र के रूप में पहचान रखता है। वित्त वर्ष 2024-25 में प्रदेश के कुल कालीन निर्यात में अकेले भदोही की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत से अधिक रही। वहीं भदोही, मिर्जापुर और वाराणसी का कालीन क्लस्टर मिलकर उत्तर प्रदेश के करीब 88 प्रतिशत कालीन निर्यात में योगदान देता है। इस क्लस्टर से करीब 5,000 करोड़ रुपये का कालीन निर्यात अमेरिका, यूरोप और मिडिल ईस्ट जैसे वैश्विक बाजारों में होने का अनुमान है।कालीन उद्योग भदोही और आसपास के क्षेत्र में रोजगार का भी बड़ा आधार है।

अकेले भदोही के कालीन उद्योग से करीब पांच लाख श्रमिक, कारीगर और बुनकर जुड़े हैं। ‘एक जिला, एक उत्पाद’ यानी ओडीओपी योजना, टूलकिट वितरण, मुद्रा लोन, आधुनिक लूम और सोलर लूम जैसी पहलों के जरिए कारीगरों और बुनकरों को उत्पादन और बाजार से जोड़ने पर जोर दिया गया है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने और पारंपरिक हुनर को बाजार की नई जरूरतों के अनुरूप विकसित करने में मदद मिली है।भदोही में 7.5 एकड़ में विकसित कारपेट एक्सपो मार्ट भी इस बदलाव का अहम हिस्सा है। दिसंबर 2020 में शुरू हुआ यह अत्याधुनिक केंद्र कालीन कारोबारियों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से सीधे जोड़ने का मंच उपलब्ध करा रहा है। 50वां इंडिया कारपेट एक्सपो इसी दिशा में एक बड़ा आयोजन है, जहां भदोही के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों के कालीन निर्माता और निर्यातक अपने उत्पाद अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के सामने पेश कर रहे हैं।उत्तर प्रदेश के निर्यात में बढ़ोतरी के पीछे बेहतर कनेक्टिविटी, औद्योगिक बुनियादी ढांचे, बिजली आपूर्ति और कारोबार को आसान बनाने की दिशा में उठाए गए कदमों को भी अहम माना जा रहा है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और जेवर एयरपोर्ट जैसी परियोजनाओं से प्रदेश के औद्योगिक और निर्यात कारोबार को नई कनेक्टिविटी मिली है। ऐसे में भदोही का 50वां इंडिया कारपेट एक्सपो उत्तर प्रदेश के पारंपरिक हुनर और बदलती निर्यात अर्थव्यवस्था, दोनों की तस्वीर को एक साथ वैश्विक मंच पर पेश कर रहा है।