लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण की मां…

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण की मांग को लेकर आयोजित धर्म संसद में मंदिर निर्माण समेत कुल 12 प्रस्ताव पारित किए गए। कार्यक्रम में अलग-अलग राज्यों से आए साधु-संतों और हिंदू संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। आयोजन में इस मुद्दे को लेकर आगे भी अभियान चलाने का ऐलान किया गया।विश्व हिंदू रक्षा परिषद की ओर से आयोजित धर्म संसद का मुख्य एजेंडा मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर से शाही ईदगाह को हटाकर भव्य कृष्ण मंदिर निर्माण की मांग रहा। आयोजन से पहले लखनऊ में इससे जुड़े पोस्टर और होर्डिंग भी लगाए गए थे। आयोजकों ने दावा किया था कि कार्यक्रम में भारत समेत कई देशों से सनातन धर्म से जुड़े संत और प्रतिनिधि शामिल होंगे।

धर्म संसद में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण का प्रस्ताव रखा गया, जिसे पारित किया गया। इसके अलावा सनातन संस्कृति, धार्मिक गतिविधियों और सामाजिक स्तर पर अभियान को बढ़ावा देने से जुड़े प्रस्ताव भी पारित किए गए।कार्यक्रम में शामिल संतों और संगठनों ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़ा अभियान आगे भी जारी रहेगा। आयोजकों ने इसे धार्मिक और सामाजिक अभियान बताया है।

धर्म संसद में 6 दिसंबर को मथुरा में श्रीकृष्ण मंदिर निर्माण की मांग को लेकर बड़े कार्यक्रम का ऐलान भी किया गया। आयोजकों के मुताबिक इस कार्यक्रम में अलग-अलग राज्यों से श्रद्धालुओं और संगठन से जुड़े लोगों के पहुंचने की अपील की जाएगी।इससे पहले भी कुछ संतों और संगठनों की ओर से 6 दिसंबर को मथुरा में कारसेवा की घोषणा की जा चुकी है। अगस्त में संतों के एक समूह ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर 6 दिसंबर को कारसेवा करने की घोषणा की थी।

धर्म संसद में ‘ब्रज स्वाभिमान अभियान’ चलाने की घोषणा भी की गई। आयोजकों की ओर से कहा गया कि जो राजनीतिक दल श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण की मांग के साथ नहीं होगा, उसके कार्यालयों के बाहर नारायणी सेना की ओर से बैनर-पोस्टर लगाए जाएंगे और प्रदर्शन किया जाएगा।इस पूरे घटनाक्रम ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मुद्दे को एक बार फिर सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिया है। हालांकि, मंदिर निर्माण और परिसर से जुड़े अधिकारों का मूल विवाद अभी न्यायिक प्रक्रिया में है।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित है। 30 सितंबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान हिंदू पक्षों के बीच इस बात पर सहमति नहीं बन सकी कि ‘श्री कृष्ण विराजमान’ की ओर से अदालत में कौन प्रतिनिधित्व करेगा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर 2026 के लिए तय की। कोर्ट ने लगातार सुनवाई टलने पर भी टिप्पणी की थी।ऐसे में एक ओर जहां मामला अदालत में विचाराधीन है, वहीं दूसरी ओर धार्मिक संगठनों और संतों की ओर से आंदोलन को आगे बढ़ाने के ऐलान ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि को फिर सुर्खियों में ला दिया है।

रश्मि सिंह एक अनुभवी पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें हिंदी पत्रकारिता, न्यूज़ रिपोर्टिंग और डिजिटल मीडिया का व्यापक अनुभव है। उन्होंने मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है और अपने पत्रकारिता करियर में कई बड़े मीडिया संस्थानों और न्यूज़ चैनलों के साथ काम किया है।राजनीति, जनसरोकार, उत्तर प्रदेश की सियासत और समसामयिक मुद्दों पर उनकी विशेष पकड़ है। खबरों को सरल, तथ्यपरक और पाठकों के लिए रोचक अंदाज में प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है। डिजिटल पत्रकारिता के बदलते दौर में रश्मि सिंह का प्रयास है कि पाठकों तक तेज, विश्वसनीय और आसान भाषा में तथ्य आधारित खबरें पहुंचें।