उत्तर प्रदेश के बिजनौर में गंभीर आपराधिक मामलों में फंसाने की धमकी देकर कथित तौर पर वसूली करने वाले एक नेटवर्क को लेकर पुलिस की कार्रवाई चर्चा में है, पुलिस के…

उत्तर प्रदेश के बिजनौर में गंभीर आपराधिक मामलों में फंसाने की धमकी देकर कथित तौर पर वसूली करने वाले एक नेटवर्क को लेकर पुलिस की कार्रवाई चर्चा में है, पुलिस के मुताबिक, इस मामले में दुष्कर्म, सामूहिक दुष्कर्म, पॉक्सो और एससी/एसटी एक्ट जैसे गंभीर कानूनों में शिकायत या मुकदमा दर्ज कराने की धमकी देकर लोगों पर दबाव बनाने के आरोप सामने आए हैं, मामले में आजाद समाज पार्टी की पूर्व महिला नेता रविता गौतम उर्फ रविता देवी और नौशाद हसन समेत कई आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है, पुलिस के अनुसार, इस पूरे प्रकरण की जांच के दौरान कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों की भूमिका भी सामने आई है।

पुलिस के अनुसार, एक शिकायतकर्ता संजीव कुमार ने आरोप लगाया कि उसे गंभीर मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर 10 लाख रुपये की मांग की गई थी, पुलिस के मुताबिक, पैसे नहीं देने के बाद उसके खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म की शिकायत दर्ज कराई गई, जांच में पुलिस ने उस शिकायत को असत्य पाए जाने का दावा किया और मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया की गई हालांकि, संबंधित आरोपों और मामलों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही माना जाएगा।

– अनंत सिंह-नीरज कुमार विवाद पर ललन सिंका बड़ा बयान, बोले- ‘ताली एक हाथ से नहीं बजती’

पुलिस की जांच में जुल्फेकार उर्फ बब्बू लंगड़ा का नाम कथित तौर पर सामने आया है, पुलिस के अनुसार, नेटवर्क व्यक्तिगत विवाद, संपत्ति विवाद या पुरानी रंजिश वाले लोगों को निशाना बनाता था और गंभीर मुकदमों में फंसाने या समझौते के नाम पर दबाव बनाने की कोशिश करता था, इस मामले में अलग-अलग थानों में कई मुकदमे दर्ज होने की जानकारी सामने आई है, सितंबर के अंत तक पुलिस ने 18 प्राथमिकी दर्ज होने और 14 आरोपियों के जेल भेजे जाने की जानकारी दी थी।

बिजनौर पुलिस के अनुसार, रविता गौतम और नौशाद को भी गिरफ्तार किया गया है, पुलिस जांच में दोनों की कथित भूमिका गंभीर मामलों में शिकायत दर्ज कराने और लोगों पर दबाव बनाने से जुड़ी बताई गई है, मामले में पुलिस अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच कर रही है, इस पूरे मामले ने एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा किया है कि कमजोर और पीड़ित वर्गों की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानूनों के संभावित दुरुपयोग को कैसे रोका जाए, जबकि वास्तविक पीड़ितों को न्याय और सुरक्षा भी सुनिश्चित हो, कानून विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी शिकायत के झूठे या सही होने का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही होता है। इसलिए किसी भी आरोपी या शिकायतकर्ता के संबंध में अंतिम निष्कर्ष अदालत के फैसले के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।

फिलहाल बिजनौर पुलिस की जांच जारी है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तथा पूर्व में दर्ज शिकायतों की भी पड़ताल की जा रही है, मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और अदालत की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।