सोशल मीडिया पर बदायूं की शिवानी कश्यप का एक वीडियो वायरल होने के बाद मामला काफी चर्चा में आ गया था, वीडियो में शिवानी ने आरोप लगाया था कि पुलिस और राजस्व विभाग…
सोशल मीडिया पर बदायूं की शिवानी कश्यप का एक वीडियो वायरल होने के बाद मामला काफी चर्चा में आ गया था, वीडियो में शिवानी ने आरोप लगाया था कि पुलिस और राजस्व विभाग की टीम ने उनकी झोपड़ी में आग लगा दी, वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दीं और पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हालांकि, बदायूं पुलिस की जांच में इस पूरे मामले को लेकर एक अलग दावा सामने आया है, पुलिस के मुताबिक, मामला जमीन की पैमाइश और कथित अवैध कब्जे से जुड़ा था और वायरल वीडियो में लगाए गए आरोपों की जांच के दौरान घटनाक्रम की तस्वीर कुछ और सामने आई।
पुलिस के अनुसार, राजस्व विभाग की टीम जमीन की पैमाइश के लिए मौके पर पहुंची थी, इसी दौरान सरकारी कार्य में बाधा डालने और विवाद की स्थिति पैदा होने की बात सामने आई, पुलिस का दावा है कि इसी दौरान शिवानी कश्यप और उनके परिवार के सदस्यों ने कथित तौर पर अपनी झोपड़ी में खुद आग लगा दी और बाद में पुलिस एवं राजस्व टीम पर आग लगाने का आरोप लगाया।
झोपड़ी में आग लगने के बाद बनाए गए वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने से मामला तेजी से चर्चा में आ गया। वीडियो के आधार पर कई लोगों ने पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए और शिवानी के समर्थन में अपनी प्रतिक्रिया दी, मामले को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह के नैरेटिव भी सामने आए हालांकि, पुलिस जांच के बाद घटना को लेकर प्रशासन की ओर से अलग तथ्य प्रस्तुत किए गए हैं, बदायूं पुलिस के मुताबिक, मामले में लेखपाल की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने शिवानी कश्यप समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने की जानकारी दी है, पुलिस की ओर से लगाए गए आरोपों की अंतिम कानूनी स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है, समाजवादी पार्टी के स्थानीय सांसद आदित्य यादव ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है, उनका कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके, बदायूं की यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली किसी घटना को पूरी जानकारी और जांच के बिना सच मान लेना कितना उचित है, एक वीडियो सामने आने के बाद लोगों की राय तेजी से बन जाती है, लेकिन किसी भी मामले में पुलिस जांच, प्रत्यक्ष साक्ष्य और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।
– अनंत सिंह-नीरज कुमार विवाद पर ललन सिंका बड़ा बयान, बोले- ‘ताली एक हाथ से नहीं बजती’
फिलहाल, इस मामले में पुलिस का दावा और राजनीतिक पक्ष दोनों सामने हैं। अब आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया से यह स्पष्ट होगा कि पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर क्या थी।






टिप्पणियाँ 0