उत्तर प्रदेश में सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने और बाढ़ नियंत्रण को प्रभावी बनाने के लिए योगी सरकार ने प्रदेश की जर्जर जल संरचनाओं के आधुनिकीकरण पर बड़ा फोकस कि…

उत्तर प्रदेश में सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने और बाढ़ नियंत्रण को प्रभावी बनाने के लिए योगी सरकार ने प्रदेश की जर्जर जल संरचनाओं के आधुनिकीकरण पर बड़ा फोकस किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पिछले साढ़े नौ वर्षों में बैराज, बांध, हेड रेगुलेटर और अन्य जल यांत्रिक संरचनाओं के पुराने और क्षतिग्रस्त गेटों को चरणबद्ध तरीके से बदला गया है। साथ ही आपदा या आकस्मिक स्थिति में तत्काल इस्तेमाल के लिए कई प्रमुख जल संरचनाओं के स्पेयर गेट भी तैयार कर सुरक्षित रखे गए हैं।

सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव अनिल गर्ग के मुताबिक, लंबे समय से इस्तेमाल में आ रहे कई बैराज और बांधों के गेट खराब हो चुके थे। इन्हें प्राथमिकता के आधार पर बदला जा रहा है, ताकि सिंचाई के लिए पानी की आपूर्ति बाधित न हो और बाढ़ के दौरान जल संरचनाओं का संचालन सुरक्षित तरीके से किया जा सके। पीलीभीत के चुक्का हेड रेगुलेटर के चारों गेट बदले जा चुके हैं। लखनऊ के गोमती बैराज के सभी 10 गेटों का प्रतिस्थापन पूरा हो चुका है। बुलंदशहर के नरौरा बैराज के 61 गेटों में से 13 बदले जा चुके हैं, जबकि बाकी 48 गेटों के निर्माण और प्रतिस्थापन का काम जारी है।

एटा के तातारपुर एलजीसी एवं पीएलजीसी कनेक्टिंग रेगुलेटर और हेड रेगुलेटर के कुल 20 गेट भी बदले जा चुके हैं।जल संरचनाओं के आधुनिकीकरण में सबसे बड़ी तकनीकी उपलब्धियों में पानी के भीतर गेटों का प्रतिस्थापन शामिल है। ललितपुर के माताटीला बांध, मेजा-जरगो लिंक रेगुलेटर और कचनौदा बांध में करीब 60 से 70 फीट की गहराई में स्थित अंडर-स्लूइस गेटों को आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक और विशेषज्ञ गोताखोरों की मदद से बदला गया। कचनौदा बांध में करीब 60 फीट की गहराई पर दो अंडर-स्लूइस गेटों का प्रतिस्थापन पूरा किया गया है, जबकि एक स्पेयर गेट भी सुरक्षित रखा गया है।विभाग के मुताबिक, दिल्ली के ओखला बैराज के 27 में से 18 गेट बदले जा चुके हैं और आपात स्थिति के लिए तीन स्पेयर गेट तैयार रखे गए हैं।

हरिद्वार के भीमगौड़ा बैराज के 22 में से आठ खराब गेट बदले गए हैं। रामपुर के कैनरी बैराज के 15 में से नौ और गाजियाबाद के हिंडन बैराज के सभी आठ गेटों का प्रतिस्थापन किया जा चुका है। इन गेटों का निर्माण विभाग की आईएसओ प्रमाणित कार्यशालाओं बरेली और झांसी में किया गया है।सरकार का जोर केवल पुराने गेटों को बदलने तक सीमित नहीं है। संभावित आपदा और आकस्मिक परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रमुख बैराजों और बांधों में स्पेयर गेट भी तैयार रखे जा रहे हैं। हमीरपुर के मौदहा, महोबा के लहचूरा, बिजनौर के खो बैराज, बहराइच के घाघरा बैराज और लखीमपुर खीरी के शारदा बैराज समेत कई महत्वपूर्ण जल संरचनाओं के लिए स्पेयर गेट सुरक्षित किए गए हैं। इससे किसी गेट में अचानक खराबी आने पर उसे तत्काल बदला जा सकेगा और सिंचाई के पानी की आपूर्ति प्रभावित होने से बचाई जा सकेगी।चंदौली के चंद्रप्रभा बांध में करीब 80 फीट की गहराई पर स्थित अंडर-स्लूइस गेटों से रिसाव की समस्या को भी विभाग ने गंभीरता से लिया है। रिसाव के कारण सिंचाई योग्य पानी की बर्बादी हो रही थी। निरीक्षण के बाद अधिकारियों को विशेषज्ञ गोताखोरों और आधुनिक तकनीक की मदद से पानी के भीतर रिसाव को स्थायी रूप से रोकने के निर्देश दिए गए हैं। कार्य की गुणवत्ता से समझौता न करने और समयबद्ध तरीके से रिसाव को पूरी तरह रोकने पर भी जोर दिया गया है, ताकि खरीफ और आगामी फसलों के लिए नहरों में पर्याप्त पानी पहुंचाया जा सके।योगी सरकार की इस कवायद का उद्देश्य जल संरचनाओं को सुरक्षित और आधुनिक बनाने के साथ सिंचाई के पानी की हर बूंद का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है। पुराने गेटों के प्रतिस्थापन, पानी के भीतर तकनीकी कार्य और स्पेयर गेटों की व्यवस्था से प्रदेश में सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण तंत्र को नई मजबूती मिली है।