केशव प्रसाद मौर्य ने ऐसा बयान दे दिया है, जिसने यूपी से लेकर दिल्ली तक बीजेपी की सियासत में फिर भूचाल ला दिया है! सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि केशव मौर्य मुख्यमं…
केशव प्रसाद मौर्य ने ऐसा बयान दे दिया है, जिसने यूपी से लेकर दिल्ली तक बीजेपी की सियासत में फिर भूचाल ला दिया है! सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि केशव मौर्य मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं… सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या बीजेपी हाईकमान 2027 से पहले योगी आदित्यनाथ के विकल्प की तलाश में है? क्योंकि पहले पंकज चौधरी ने कहा कि यूपी का मुख्यमंत्री कौन होगा, इसका फैसला दिल्ली करेगी… और अब केशव प्रसाद मौर्य ने अपने दिल की बात खुले मंच से कह दी—मेरा मन मुख्यमंत्री बनने का है, हो सकता है अगली बार आप मुझे यूपी के मुख्यमंत्री के रूप में देखें! बस इसी एक बयान ने योगी बनाम केशव की पुरानी कहानी को फिर जिंदा कर दिया है।
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दरअसल केशव प्रसाद मौर्य ने साफ कहा कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इसका फैसला बीजेपी के पर्यवेक्षक और विधायक दल करेंगे। यानी 2027 में बीजेपी जीतती है तो मुख्यमंत्री का चेहरा पहले से तय होगा या चुनाव के बाद विधायक दल फैसला करेगा—इस पर अभी तस्वीर साफ नहीं है। लेकिन केशव के बयान ने सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। क्योंकि 2017 से ही यूपी बीजेपी की सियासत में योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्य की राजनीतिक केमिस्ट्री चर्चा का विषय रही है। 2017 में बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी पर योगी आदित्यनाथ बैठे और केशव मौर्य डिप्टी सीएम बने। इसके बाद सरकार और संगठन को लेकर दोनों खेमों के बीच मतभेद की खबरें लगातार सामने आती रहीं। 2022 में भी टकराव की चर्चाएं तेज हुईं। केशव मौर्य अपनी सीट हार गए, लेकिन बीजेपी हाईकमान ने जातीय समीकरण और राजनीतिक संतुलन को देखते हुए उन्हें दोबारा डिप्टी सीएम बनाया। और अब नजर है 2027 पर। केशव मौर्य खुलकर मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जता रहे हैं। वहीं सबसे बड़ा सवाल ये है कि अगर बीजेपी 2027 में जीतती है तो क्या योगी आदित्यनाथ ही मुख्यमंत्री होंगे? क्योंकि अभी तक बीजेपी के किसी बड़े केंद्रीय नेता की तरफ से ऐसा स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है कि—2027 में जीत के बाद योगी ही यूपी के मुख्यमंत्री होंगे। यही खामोशी राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा पैदा कर रही है। एक तरफ केशव मौर्य पिछड़े वर्ग के बड़े चेहरे के तौर पर बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण हैं, तो दूसरी तरफ योगी आदित्यनाथ की पूरे उत्तर प्रदेश में एक अलग राजनीतिक पहचान और प्रभाव है। केशव के समर्थक जहां उन्हें पिछड़े वर्ग के मजबूत चेहरे के तौर पर देखते हैं, वहीं योगी समर्थकों का तर्क है कि अखिलेश यादव के सामने बीजेपी के पास सबसे प्रभावी चेहरा योगी आदित्यनाथ ही हैं। यानी 2027 की लड़ाई सिर्फ बीजेपी बनाम विपक्ष की नहीं है… बीजेपी के भीतर भी ये सवाल बड़ा होता जा रहा है कि चेहरा कौन होगा—योगी या कोई नया विकल्प? और अब केशव मौर्य के इस बयान ने सियासी पारा और चढ़ा दिया है। क्योंकि अगर केशव की दावेदारी मजबूत होती है तो मुकाबला सिर्फ लखनऊ की सत्ता का नहीं होगा… बल्कि बीजेपी के भीतर मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक संघर्ष देखने को मिल सकता है। अब देखना होगा कि बीजेपी हाईकमान इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया देता है… और सबसे बड़ा सवाल—क्या 2027 में बीजेपी योगी के चेहरे पर चुनाव लड़ेगी, या फिर यूपी में मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर आखिरी फैसला चुनाव के बाद होगा?





