Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले दलित वोट बैंक को लेकर सियासी गतिविधियां तेज होती नजर आ रही हैं। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और…

Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले दलित वोट बैंक को लेकर सियासी गतिविधियां तेज होती नजर आ रही हैं। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर की हालिया सोशल मीडिया पोस्ट ने पार्टी की अंदरूनी राजनीति को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। कौशल किशोर ने बिना किसी का नाम लिए लिखा कि “गेंद जितनी ऊपर जानी थी चली गई, अब नीचे आ रही है और इसकी स्पीड को कोई कम नहीं कर सकता।”

इसके बाद उनकी एक अन्य पोस्ट में संगठन और विचारधारा के संदर्भ में कहा गया कि जब कोई संगठन अपने उसूलों से भटकता है तो उससे जुड़े लोगों का विश्वास भी टूटने लगता है। इन बयानों को लेकर यूपी की सियासत में तरह-तरह के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। हालांकि कौशल किशोर ने अपनी पोस्ट में किसी नेता या पार्टी का नाम लेकर निशाना नहीं साधा है।

कौशल किशोर यूपी बीजेपी के प्रमुख दलित नेताओं में गिने जाते हैं और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। ऐसे में चुनावी माहौल के बीच उनकी ओर से लगातार की गईं इन टिप्पणियों को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषक इन बयानों को बीजेपी के भीतर चल रही संभावित असहजता और बदलते राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि अभी तक कौशल किशोर की ओर से बीजेपी छोड़ने या किसी अन्य राजनीतिक दल में जाने की कोई स्पष्ट घोषणा सामने नहीं आई है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित मतदाताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। खासतौर पर पासी समाज प्रदेश के कई विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।

ऐसे में कौशल किशोर जैसे प्रमुख दलित चेहरे के बयान स्वाभाविक रूप से राजनीतिक चर्चा का विषय बन रहे हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और आजाद समाज पार्टी समेत तमाम दल दलित मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

कौशल किशोर की ताजा राजनीतिक टिप्पणियों से पहले उनकी पत्नी और मलिहाबाद से बीजेपी विधायक जय देवी कौशल से जुड़ा काकोरी के शीतला देवी मंदिर का विवाद भी सुर्खियों में रहा था।

जय देवी कौशल ने आरोप लगाया था कि मंदिर के जीर्णोद्धार कार्यक्रम के दौरान उन्हें पूजा-अर्चना से रोका गया और उनके साथ जातिगत भेदभाव किया गया। कौशल किशोर ने भी इस मामले में अपनी पत्नी के समर्थन में आपत्ति जताई थी।

हालांकि बाद में जय देवी कौशल ने मंदिर में पूजा-अर्चना भी की। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार 21 अगस्त को जय देवी कौशल ने मंदिर में संध्या आरती में हिस्सा लेकर पूजा की थी।

कौशल किशोर से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम में अब 13 सितंबर की प्रस्तावित आत्मसम्मान रैली/बैठक को लेकर भी चर्चा तेज है। मीडिया रिपोर्टों में इसे उनके समर्थकों के जुटान के तौर पर बताया गया है।

हालांकि इस बैठक को सीधे बीजेपी से अलग होने की घोषणा के रूप में देखना अभी जल्दबाजी होगी। कौशल किशोर ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में भी किसी राजनीतिक दल से अलग होने की स्पष्ट घोषणा नहीं की है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने अपने ‘गेंद’ वाले बयान को किसी खास दल के खिलाफ टिप्पणी मानने से भी इनकार किया है।

उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव करीब आने के साथ दलित वोट बैंक एक बार फिर राजनीतिक दलों के केंद्र में है। एक तरफ आजाद समाज पार्टी के नेता चंद्रशेखर आजाद लगातार दलित मुद्दों को लेकर बीजेपी पर हमला बोलते रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बीजेपी के भीतर से आने वाले नेताओं के बयान भी राजनीतिक बहस को नई दिशा दे रहे हैं।

कौशल किशोर के ताजा बयानों का अंतिम राजनीतिक असर क्या होगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल इतना जरूर है कि उनके सोशल मीडिया पोस्ट ने यूपी बीजेपी की अंदरूनी राजनीति और दलित वोट बैंक को लेकर चर्चाओं को तेज कर दिया है।