मुंबई का वानखेड़े स्टेडियम, जिसे भारतीय क्रिकेट का दिल और मक्का माना जाता है, आज एक अजीब से संकट से गुजर रहा है. यह वही मैदान है जहां भारत ने 2011 में महेंद्र…

मुंबई का वानखेड़े स्टेडियम, जिसे भारतीय क्रिकेट का दिल और मक्का माना जाता है, आज एक अजीब से संकट से गुजर रहा है. यह वही मैदान है जहां भारत ने 2011 में महेंद्र सिंह धोनी के ऐतिहासिक छक्के के साथ वनडे वर्ल्ड कप जीता था, लेकिन वर्तमान आंकड़े एक बेहद चौंकाने वाली कहानी बयां कर रहे हैं. पिछले 8 सालों में इस प्रतिष्ठित मैदान पर सिर्फ 2 टेस्ट मैच खेले गए हैं. बीसीसीआई द्वारा घोषित 2026-27 के घरेलू सीजन में वानखेड़े को सिर्फ 1 इंटरनेशनल मैच (जनवरी 2027 में जिम्बाब्वे के खिलाफ तीसरा वनडे) की मेजबानी सौंपी गई है. इस फैसले ने न सिर्फ मुंबई के क्रिकेट प्रेमियों को निराश किया है, बल्कि मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) को भी बीसीसीआई के सामने अपनी नाराजगी और मांगें रखने के लिए मजबूर कर दिया है. आखिर क्यों भारतीय क्रिकेट के इस सबसे पावरफुल सेंटर से इंटरनेशनल मैच कम होते जा रहे हैं? चलिए इस आर्टिकल में इसे समझने की कोशिश करते हैं

नए दावेदारों का उभार: एक दौर था जब भारत में गिने-चुने बड़े इंटरनेशनल स्टेडियम (मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, दिल्ली, बेंगलुरु) ही हुआ करते थे, जिससे अधिकांश बड़े मुकाबले इन्हीं शहरों को मिलते थे. हालांकि, पिछले एक दशक में भारतीय क्रिकेट का बुनियादी ढांचा तेजी से बदला है. अहमदाबाद में बना दुनिया का सबसे बड़ा नरेन्द्र मोदी स्टेडियम, लखनऊ का इकाना स्टेडियम, और इंदौर, राजकोट, रांची, गुवाहाटी, रायपुर और धर्मशाला जैसे शहरों में विश्व स्तरीय मैदान तैयार हो चुके हैं

टियर-2 शहरों को प्राथमिकता: BCCI की नई नीति के मुताबिक, अब देश के हर कोने में क्रिकेट पहुंचाने के लिए 'रोटेशन पॉलिसी' (बारी-बारी से मैच देने का नियम) लागू किया गया है. इसके तहत छोटे और टियर-2 शहरों को ज्यादा से ज्यादा मैच दिए जा रहे हैं, ताकि वहां के फैंस को भी स्टेडियम जाकर लाइव इंटरनेशनल मैच देखने का मौका मिल सके. लेकिन बीसीसीआई के इस नए नियम का सबसे बड़ा झटका मुंबई और कोलकाता जैसे उन बड़े शहरों को लगा है, जहां पहले हमेशा टेस्ट मैच और बड़े मुकाबले हुआ करते थे

आजकल का क्रिकेट पूरी तरह कमाई और टिकटों की बिक्री का खेल बन चुका है. इस मामले में मुंबई का वानखेड़े स्टेडियम अन्य नए और बड़े मैदानों के सामने बहुत छोटा पड़ जाता है. दरअसल, 2011 वर्ल्ड कप से पहले जब वानखेड़े स्टेडियम को नए सिरे से संवारा गया, तो दर्शकों के बैठने के लिए आरामदायक बकेट सीटें लगाई गईं. इस चक्कर में स्टेडियम की सीटिंग क्षमता घटकर सिर्फ 33000 रह गई. वहीं अहमदाबाद के नरेन्द्र मोदी स्टेडियम में 1 लाख 32 हजार से ज्यादा लोग एक साथ मैच देख सकते हैं, जबकि कोलकाता के ईडन गार्डन्स की क्षमता 65 हजार से ऊपर है. यही वजह है कि जब भी BCCI को किसी बड़े मुनाफे वाले या 'ब्लॉकबस्टर' मैच की प्लानिंग करनी होती है, तो वह वानखेड़े को छोड़कर उन स्टेडियमों को चुनता है जहां ज्यादा टिकट बिक सकें और बंपर कमाई हो

2026-27 सीजन के शेड्यूल में सबसे बड़ा झटका तब लगा जब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाली ऐतिहासिक बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के 5 टेस्ट मैचों में से एक भी टेस्ट वानखेड़े को नहीं मिला. ये मैच नागपुर, चेन्नई, गुवाहाटी, रांची और अहमदाबाद को बांटे गए हैं. इतिहास गवाह है कि वानखेड़े ने साल 2004 के बाद से ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ किसी भी टेस्ट मैच की मेजबानी नहीं की है. मार्की सीरीज से लगातार नजरअंदाज किए जाने के कारण मुंबई के फैंस में भारी असंतोष है

मुंबई में क्रिकेट मैचों के लिए सिर्फ वानखेड़े ही अकेला खिलाड़ी नहीं है, बल्कि शहर के भीतर ही मैचों को हथियाने की एक अंदरूनी जंग चलती रहती है. वानखेड़े की इस रेस में ब्रेबोर्न स्टेडियम और नवी मुंबई का डीवाई पाटिल स्टेडियम दो बड़े कॉम्पिटिटर हैं. ये दोनों मैदान भी बड़े मैचों की रेस में हमेशा आगे रहते हैं. उदाहरण के लिए, जब बड़े इंटरनेशनल मैचों या विमेंस क्रिकेट की बात आती है, तो बीसीसीआई वानखेड़े के बजाय ब्रेबोर्न स्टेडियम को चुन लेता है. सीधे शब्दों में कहें तो, जब एक ही शहर में तीन-तीन वर्ल्ड क्लास स्टेडियम होंगे, तो जाहिर है कि वानखेड़े के हिस्से के मैच बंट ही जाएंगे

भले ही वानखेड़े स्टेडियम में भारत के इंटरनेशनल मैच कम हो गए हों, लेकिन इस मैदान को आराम करने की फुरसत बिल्कुल नहीं मिलती. यह साल के 12 महीने क्रिकेट से ओवरलोड रहता है. आईपीएल के आते ही करीब दो महीने तक यह मैदान पूरी तरह बुक हो जाता है, जहां मुंबई इंडियंस अपने कम से कम 7 होम मैच खेलती है. इसके अलावा मुंबई की रणजी टीम के मैच, सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी और महिला प्रीमियर लीग की मेजबानी का लोड भी इसी मैदान पर रहता है. बीसीसीआई का सोचना बड़ा सीधा है, जिस मैदान को पहले से ही आईपीएल और घरेलू क्रिकेट के इतने सारे मैच मिल रहे हैं, उसे छोड़कर उन मैदानों को इंटरनेशनल मैच दिए जाएं जहा साल भर कोई बड़ा मुकाबला नहीं होता

वानखेड़े स्टेडियम में मैचों के इस सूखे को देखकर मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) के सचिव उन्मेष खानविलकर ने BCCI को एक ऑफिशियल चिट्ठी भेजी है. उन्होंने मांग की है कि वानखेड़े के शानदार इतिहास और इसके 'परमानेंट टेस्ट सेंटर' के दर्जे को ध्यान में रखते हुए, आने वाली सीरीज में मुंबई को ज्यादा से ज्यादा इंटरनेशनल मैच दिए जाएं. यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि आगामी घरेलू सत्र (2026-27) में वानखेड़े को सिर्फ 1 अंतरराष्ट्रीय मैच (जनवरी 2027 में जिम्बाब्वे के खिलाफ तीसरा वनडे) ही मिला है, जिसे लेकर एसोसिएशन और फैंस में चिंता है. उम्मीद है कि भविष्य के फ्यूचर टूर्स प्रोग्राम में इस ऐतिहासिक मैदान को उसका पुराना दर्जा वापस मिल सकेगा

MCA has requested BCCI to allot more international matches to the Wankhede Stadium in future schedules. (TOI). - Wankhede hosted only 2 Tests in the last 8 years. pic.twitter.com/KEvqtKfMom