गणेशोत्सव की ऐतिहासिक परंपरा और आस्था का संगम रविवार को पुणे के श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी गणपति मंडल में देखने को मिला. असम राइफल्स के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल…
गणेशोत्सव की ऐतिहासिक परंपरा और आस्था का संगम रविवार को पुणे के श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी गणपति मंडल में देखने को मिला. असम राइफल्स के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल विकास लखेड़ा ने मंडल का दौरा किया और शाम की महाआरती में शामिल हुए. ऐतिहासिक गणपति के दर्शन के बाद उन्होंने पुणे की गणेशोत्सव परंपरा और इसे जीवंत रखने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की
मंडल में पहुंचने के बाद लेफ्टिनेंट जनरल लखेड़ा ने विधिवत पूजा-अर्चना की और महाआरती में हिस्सा लिया. इस दौरान माहौल भक्तिमय रहा. महाआरती के बाद मंडल की ओर से उनका सत्कार किया गया. मीडिया से बातचीत में लेफ्टिनेंट जनरल लखेड़ा ने कहा कि ऐतिहासिक गणपति के सामने प्रार्थना करने का अवसर उनके लिए बेहद खास रहा. उन्होंने कहा, “एक भक्त के तौर पर जो भावना होती है, वही भावना मेरे मन में भी है. एक साधारण इंसान हूं और किसी भी व्यक्ति को भगवान के घर आने और प्रार्थना करने का अवसर मिलता है, तो यह अपने आप में एक असाधारण अवसर होता है. मैं अभिभूत हूं.”
उन्होंने देश की प्रगति, सुरक्षा और मजबूती के साथ सभी नागरिकों की खुशहाली के लिए भी प्रार्थना की. उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा है कि देश लगातार आगे बढ़े, सुरक्षित रहे, और सभी लोग समृद्ध हों. लेफ्टिनेंट जनरल लखेड़ा ने भाऊसाहेब रंगारी गणपति की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि यह परंपरा उस दौर से जुड़ी है जब भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था. उनके मुताबिक, इस इतिहास को जानना और अगली पीढ़ी तक पहुंचाना बेहद महत्वपूर्ण है
उन्होंने कहा, “जब यह मूर्ति बनाई गई थी, तब हम अंग्रेजों के शासन में थे. यह पहला सार्वजनिक गणपति था; सार्वजनिक गणपति की शुरुआत यहीं से हुई.” उन्होंने इस इतिहास को देश और समाज के लिए प्रेरणादायक बताया. लखेड़ा ने युवाओं से अपनी संस्कृति और इतिहास से जुड़े रहने की अपील भी की. उन्होंने कहा कि आधुनिकता जरूरी है, लेकिन अपनी जड़ों को भूलना नहीं चाहिए. “अपनी संस्कृति को मत भूलिए. आपकी सबसे बड़ी ताकत आपकी संस्कृति है. आपका इतिहास आपके भविष्य को तय करेगा. अपनी जड़ों से जुड़े रहिए,” उन्होंने कहा. दौरे के दौरान मंडल की ओर से पुणे के गणेशोत्सव की परंपरा, भाऊसाहेब रंगारी गणपति से जुड़ा इतिहास और विरासत को संरक्षित रखने के प्रयासों की जानकारी दी गई. मंडल का जोर इस बात पर है कि गणेशोत्सव सिर्फ एक धार्मिक आयोजन न रहकर पुणे की सांस्कृतिक पहचान और इतिहास से भी जुड़ा रहे
लेफ्टिनेंट जनरल लखेड़ा का यह दौरा ऐसे समय हुआ जब पूरा पुणे गणेशोत्सव के उत्साह में डूबा हुआ है. उनके आगमन ने मंडल के आयोजन को एक अलग विशेषता दी. महाआरती के दौरान मौजूद श्रद्धालुओं के बीच भी उत्साह देखने को मिला. पुणे के सार्वजनिक गणेशोत्सव की पहचान उसकी परंपरा और सामाजिक जुड़ाव से बनी है. भाऊसाहेब रंगारी गणपति मंडल इसी ऐतिहासिक विरासत को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है. लेफ्टिनेंट जनरल लखेड़ा ने मंडल के इन प्रयासों की सराहना करते हुए इस परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के महत्व पर जोर दिया





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