प्रयागराज सिर्फ संगम की धरती नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की सियासत का भी अहम केंद्र है, यहां होने वाला राजनीतिक बदलाव अक्सर प्रदेश की राजनीति की दिशा और दशा पर अस…

प्रयागराज सिर्फ संगम की धरती नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की सियासत का भी अहम केंद्र है, यहां होने वाला राजनीतिक बदलाव अक्सर प्रदेश की राजनीति की दिशा और दशा पर असर डालता है। इसी प्रयागराज की शहर पश्चिमी विधानसभा सीट एक बार फिर 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले चर्चा में है, करीब 4.5 लाख मतदाताओं वाली यह सीट लंबे समय से सत्ता, वर्चस्व, जातीय समीकरण और स्थानीय मुद्दों की राजनीति का केंद्र रही है, कभी जनसंघ का प्रभाव रहा, फिर बाहुबली नेताओं का दबदबा देखने को मिला और अब पिछले दो विधानसभा चुनावों से बीजेपी इस सीट पर अपना कब्जा बनाए हुए है.

आजादी के बाद जब इलाहाबाद शहर पश्चिमी विधानसभा सीट अस्तित्व में आई, तब यहां अलग-अलग राजनीतिक दलों का प्रभाव देखने को मिला, 1980 में जनसंघ के तीर्थलाल कोहली विधायक बने, जबकि 1984 में रामगोपाल यादव ने जीत दर्ज की, इसके बाद 1989 से इस सीट की राजनीति में बड़ा बदलाव आया, 2002 तक लगातार पांच चुनावों में अतीक अहमद का दबदबा रहा, इस दौर में शहर पश्चिमी की राजनीति में बाहुबल और अपराध से जुड़े आरोपों की चर्चा प्रमुख रही।

शहर पश्चिमी सीट पर सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ 2004 के उपचुनाव में आया, बसपा प्रत्याशी राजू पाल ने अतीक अहमद के छोटे भाई अशरफ को हराकर चुनाव जीत लिया, इसके बाद 2005 में राजू पाल की हत्या कर दी गई। इस मामले में अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ पर आरोप लगे थे, राजू पाल की हत्या के बाद हुए उपचुनाव में बसपा ने उनकी पत्नी पूजा पाल को मैदान में उतारा, लेकिन सपा प्रत्याशी अशरफ ने उन्हें हरा दिया, हालांकि 2007 में पूजा पाल ने वापसी की और जीत दर्ज की, इसके बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में भी पूजा पाल ने जीत हासिल की और शहर पश्चिमी की राजनीति में बड़ा बदलाव दर्ज किया।

2017 के विधानसभा चुनाव में शहर पश्चिमी की सियासत ने एक बार फिर करवट ली, पहली बार इस सीट पर बीजेपी ने जीत दर्ज की और सिद्धार्थ नाथ सिंह विधायक बने, 2022 में भी बीजेपी ने अपना प्रदर्शन दोहराया और सिद्धार्थ नाथ सिंह लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए, इसके साथ ही बीजेपी ने शहर पश्चिमी को अपने मजबूत राजनीतिक गढ़ के तौर पर स्थापित किया।

अब 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं, इसी बीच राजा भैया की जनसत्ता दल लोकतांत्रिक पार्टी ने शहर पश्चिमी सीट से अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर दिया है, पार्टी के महानगर अध्यक्ष सत्य प्रकाश सिंह ने बी.के. सिंह ‘राजू’ को प्रयागराज शहर पश्चिमी विधानसभा क्षेत्र से पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया है, इस घोषणा के बाद आने वाले विधानसभा चुनाव में मुकाबला और दिलचस्प होने के संकेत मिल रहे हैं।

शहर पश्चिमी विधानसभा सीट में करीब 4.5 लाख मतदाता हैं, यह प्रयागराज की बड़ी मतदाता संख्या वाली विधानसभा सीटों में शामिल है, बताए जा रहे सामाजिक समीकरण के मुताबिक यहां करीब 85 हजार मुस्लिम मतदाता, 65 हजार पिछड़ा वर्ग, 60 हजार दलित मतदाता, 35 हजार मौर्य मतदाता, 20 हजार ब्राह्मण मतदाता मौजूद हैं।

इन आंकड़ों से साफ है कि किसी एक सामाजिक वर्ग का समर्थन अकेले चुनावी जीत की गारंटी नहीं देता, अलग-अलग समुदायों का रुख, उम्मीदवार की पकड़ और राजनीतिक गठबंधन 2027 के नतीजे पर बड़ा असर डाल सकते हैं।

शहर पश्चिमी में पिछले दो चुनावों से बीजेपी का दबदबा है, ऐसे में उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने मजबूत आधार को बनाए रखने की होगी, वहीं विपक्षी दल बीजेपी के इस गढ़ में सेंध लगाने की कोशिश करेंगे, जनसत्ता दल लोकतांत्रिक की एंट्री ने मुकाबले में एक नया कोण जोड़ दिया है, 2027 का चुनाव नजदीक आने के साथ उम्मीदवारों, गठबंधन और स्थानीय मुद्दों की तस्वीर साफ होगी, लेकिन इतना तय है कि प्रयागराज शहर पश्चिमी की सियासी जंग इस बार भी प्रदेश की सबसे चर्चित चुनावी लड़ाइयों में शामिल हो सकती है।