बसपा प्रमुख मायावती ने पार्टी संगठन और परिवार के सदस्यों की भूमिका को लेकर बड़ा फैसला किया है। मायावती ने साफ किया है कि उनके भाई आनंद कुमार के बेटे आकाश आनंद…
बसपा प्रमुख मायावती ने पार्टी संगठन और परिवार के सदस्यों की भूमिका को लेकर बड़ा फैसला किया है। मायावती ने साफ किया है कि उनके भाई आनंद कुमार के बेटे आकाश आनंद और बेटी को अब पार्टी की कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इसके बजाय आनंद कुमार के परिवार से केवल ईशान आनंद को पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी देकर आगे बढ़ाया जाएगा। मायावती ने कहा कि यह फैसला उन्होंने काफी विचार-विमर्श के बाद पार्टी और बहुजन आंदोलन के हित में लिया है।मायावती ने अपने बयान में कहा कि राजनीति में सफलता और समाज के लिए काम करने के लिए नेताओं को अपने भाई-बहनों और करीबी रिश्तेदारों के मोह से ऊपर उठकर पूरी ईमानदारी और निष्ठा से काम करना चाहिए।
उन्होंने बसपा संस्थापक कांशीराम का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने राजनीति में आने के बाद अपने करीबी रिश्तेदारों को राजनीतिक लाभ देने से हमेशा दूरी बनाए रखी और अपना पूरा जीवन बहुजन समाज के हित में समर्पित किया।मायावती ने कहा कि वह भी कांशीराम के पदचिह्नों पर चलते हुए अपनी पूरी जिंदगी बहुजन समाज के लिए समर्पित कर चुकी हैं। उन्होंने बताया कि लड़की होने के कारण उन्हें मजबूरी में अपने किसी न किसी भाई-बहन को साथ रखना पड़ा, जिसके तहत उनके छोटे भाई आनंद कुमार लंबे समय से उनकी सेवा में कार्यरत हैं। आनंद कुमार के आग्रह पर ही उन्होंने उनके बड़े बेटे आकाश आनंद को राजनीति में आगे बढ़ाया था।आकाश आनंद को लेकर मायावती ने कहा कि शादी के बाद उनकी गतिविधियों और रवैये के कारण उन्हें पार्टी से अलग करना पड़ा।
मायावती ने अपने पोस्ट में आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि आकाश अब उनके प्रभाव में हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में आकाश आनंद को दोबारा पार्टी में शामिल करना पार्टी के साथ विश्वासघात होगा और वह ऐसा फैसला नहीं करेंगी।मायावती ने कहा कि अब आनंद कुमार के परिवार से किसी ऐसे सदस्य को आगे बढ़ाया जाएगा, जो आकाश आनंद के रास्ते पर न चले। उन्होंने आकाश आनंद की बहन को लेकर भी स्पष्ट किया कि भविष्य में शादी के बाद उनके मामले में भी ऐसी स्थिति पैदा होने की आशंका को देखते हुए उन्हें पार्टी की जिम्मेदारी से दूर रखा जाएगा।मायावती ने बताया कि अब ईशान आनंद को पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी देकर आगे बढ़ाया जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर ईशान आनंद भविष्य में पार्टी विरोधी कोई गंभीर गतिविधि करते हैं तो उन्हें भी पार्टी से बाहर कर दिया जाएगा। ऐसी स्थिति में आनंद कुमार के परिवार के किसी अन्य सदस्य को पार्टी में कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी और इसके बजाय पार्टी के किसी मिशनरी व वफादार दलित कार्यकर्ता को आगे बढ़ाया जाएगा।
अपने फैसले को स्पष्ट करते हुए मायावती ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के 23 फरवरी 1956 को उनके बेटे यशवंत बी. आंबेडकर को लिखे पत्र का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस पत्र में आंबेडकर ने सार्वजनिक संपत्ति और संस्थागत जिम्मेदारी के मामले में अपने बेटे को भी नियमों का पालन करने की चेतावनी दी थी। मायावती ने कहा कि इसी विचार से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने परिवार से ऊपर पार्टी और आंदोलन के हित को रखा है।मायावती ने कहा कि 23 सितंबर को बसपा की ऑल इंडिया बैठक बुलाई गई है, जिसमें देश और जनहित के जरूरी मुद्दों के साथ पार्टी से जुड़े इस विषय पर भी चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि उनके लिए पूरा बहुजन समाज ही उनका असली परिवार है और शोषित समाज को सत्ता की मास्टर चाबी के जरिए शासक वर्ग बनाना ही उनका मिशन और संकल्प है।




