Ghaziabad News: गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र में जमीन पर कथित तौर पर अवैध निर्माण और कब्जे के प्रयास का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता मनोज पवार ने गाजियाबाद के…

Ghaziabad News: गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र में जमीन पर कथित तौर पर अवैध निर्माण और कब्जे के प्रयास का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता मनोज पवार ने गाजियाबाद के पुलिस कमिश्नर, जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री को शिकायत भेजकर मामले में कार्रवाई की मांग की है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि संबंधित जमीन के स्वामित्व और कब्जे को लेकर मामला पहले से न्यायालय में विचाराधीन है। उनका दावा है कि जमीन के संबंध में न्यायालय का स्टे भी बताया गया है। इसके बावजूद कुछ लोगों द्वारा मौके पर निर्माण कराने और जमीन पर कब्जे का प्रयास किया गया।

हालांकि, न्यायालय के कथित स्टे की शर्तों, उसकी वर्तमान वैधता और जमीन के स्वामित्व संबंधी वास्तविक स्थिति की पुष्टि संबंधित न्यायालय और राजस्व रिकॉर्ड से ही की जा सकती है।

शिकायत के मुताबिक, विवादित जमीन सूर्य नगर, गाजियाबाद-लोनी क्षेत्र में स्थित है। मनोज पवार का आरोप है कि जमीन के स्वामित्व और कब्जे को लेकर पहले से न्यायालय में विवाद चल रहा है।

शिकायतकर्ता का दावा है कि अदालत के आदेश के बावजूद कुछ लोग मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य कराने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों से मामले की जांच कर जमीन पर किसी भी तरह के निर्माण या कब्जे की कोशिश को रोकने की मांग की है।

मनोज पवार के अनुसार, उन्हें 23 और 24 सितंबर को जमीन पर निर्माण और कब्जे के प्रयास की जानकारी मिली। इसके बाद वह मौके पर पहुंचे और वहां मौजूद लोगों से कथित तौर पर निर्माण कार्य रोकने तथा न्यायालय के आदेश का पालन करने को कहा।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसी दौरान उनके साथ गाली-गलौज की गई और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी गई। उन्होंने पूरे घटनाक्रम की जानकारी पुलिस को देते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

शिकायत के अनुसार, संदीप यादव समेत छह लोगों की भूमिका को लेकर शिकायतकर्ता ने सवाल उठाए हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

हालांकि, ये आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं। इन आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी। केवल शिकायत दर्ज होने से किसी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोप साबित नहीं माने जा सकते।

शिकायतकर्ता के मुताबिक, जमीन को लेकर विवाद पहले से न्यायालय में लंबित है। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में किसी भी पक्ष द्वारा मौके की स्थिति बदलने के लिए निर्माण या कब्जे का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।

वहीं, कथित स्टे की वास्तविक प्रकृति, उसमें दिए गए निर्देश और उसकी वर्तमान स्थिति की पुष्टि न्यायालय के आधिकारिक रिकॉर्ड से ही की जा सकती है। जमीन के स्वामित्व और कब्जे से जुड़े अधिकारों का अंतिम निर्धारण भी संबंधित न्यायिक एवं राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर होगा।

मनोज पवार ने पुलिस से पूरे मामले की जांच करने और कथित तौर पर धमकी देने तथा निर्माण कराने का प्रयास करने वाले लोगों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि विवाद बढ़ने से पहले पुलिस और प्रशासन को मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए, ताकि मौके पर कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब न हो और किसी भी पक्ष द्वारा जबरन कब्जे या निर्माण की स्थिति पैदा न हो।

शिकायतकर्ता ने गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर और जिलाधिकारी के अलावा मुख्यमंत्री से भी मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।

उन्होंने अधिकारियों से जमीन से जुड़े दस्तावेज, राजस्व रिकॉर्ड और न्यायालय के आदेश की जांच कराने की मांग की है। साथ ही मौके की वास्तविक स्थिति की जांच कर उचित कार्रवाई करने की अपील की है।

इस मामले में अब जांच के दौरान यह स्पष्ट होना है कि संबंधित जमीन पर न्यायालय का आदेश किस प्रकृति का है, उसकी वर्तमान स्थिति क्या है और क्या किसी पक्ष को मौके पर निर्माण की अनुमति प्राप्त है।

इसके अलावा 23 और 24 सितंबर को मौके पर हुए घटनाक्रम तथा गाली-गलौज और धमकी के आरोपों की भी जांच की जाएगी।

फिलहाल मामला शिकायत और आरोपों के स्तर पर है। पुलिस जांच, संबंधित पक्षों के बयान, जमीन के दस्तावेज और न्यायालय के आदेश के आधार पर ही आगे की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

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