प्रतापगढ़ में थाने के अंदर युवक की मौत, परिवार ने लगाया हत्या का आरोप
प्रतापगढ़: उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले की पट्टी कोतवाली में 22 वर्षीय अर्जुन गौतम उर्फ शैलेश की मौत के बाद मामला गरमा गया है। युवक का शव सोमवार को कोतवाली परिसर के एक कमरे से जुड़े शौचालय में मिला था। पुलिस के मुताबिक, अर्जुन ने कथित तौर पर फंदा लगाकर जान दी। वहीं, परिवार ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे हत्या बताया है। मामले में पुलिस और लड़की के परिवार के कुछ सदस्यों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
पुलिस के मुताबिक, अर्जुन पर 17 वर्षीय किशोरी को बहला-फुसलाकर ले जाने से जुड़ा मामला दर्ज था। पुलिस ने किशोरी को बरामद करने के बाद अर्जुन को पूछताछ के लिए पट्टी कोतवाली बुलाया था। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान अर्जुन शौचालय गया और कुछ देर बाद वहां उसका शव मिला।
पुलिस के अनुसार, अर्जुन को लॉकअप में नहीं रखा गया था और वह जांच अधिकारी के कमरे में पूछताछ के लिए मौजूद था। घटना के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
अर्जुन के पिता लल्लू राम ने पुलिस की कहानी पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उनके बेटे के साथ थाने में मारपीट की गई और उसकी मौत के बाद घटना को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई। परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच और CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग की है। इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
अर्जुन के पिता की शिकायत के आधार पर लड़की के पिता और भाई के साथ अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या, आपराधिक धमकी और SC/ST एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।
घटना के बाद प्रतापगढ़ के एसपी दीपक भूकर ने पट्टी कोतवाल आनंद पाल सिंह और विवेचक ओंकार सिंह को निलंबित कर दिया। दोनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, प्रथम दृष्टया ड्यूटी में लापरवाही के आधार पर यह कार्रवाई की गई।
मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पुलिस ने कोतवाली परिसर की CCTV फुटेज और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य सुरक्षित किए हैं। प्रतापगढ़ के जिलाधिकारी ने मामले में मजिस्ट्रियल जांच की सिफारिश की है। अब जांच में यह स्पष्ट होना है कि अर्जुन की मौत किन परिस्थितियों में हुई और पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई।
फिलहाल मामले को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। पुलिस आत्महत्या की बात कह रही है, जबकि परिवार हत्या का आरोप लगा रहा है। ऐसे में मजिस्ट्रियल जांच, CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्य इस मामले की वास्तविक परिस्थितियों को सामने लाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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