आरक्षण के मुद्दे पर पूरे देश में फिर से हाहाकार मचा हुआ है! एक तरफ सड़कों पर ब्राह्मण और क्षत्रिय समाज का गुस्सा सातवें आसमान पर है, तो दूसरी तरफ नेताओं के बयान…

आरक्षण के मुद्दे पर पूरे देश में फिर से हाहाकार मचा हुआ है! एक तरफ सड़कों पर ब्राह्मण और क्षत्रिय समाज का गुस्सा सातवें आसमान पर है, तो दूसरी तरफ नेताओं के बयानों का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा! लेकिन इस बार आग में घी डालने का काम किया है उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के एक ताजा बयान ने।

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मौर्य जी के इस बयान के बाद सामान्य वर्ग में नाराजगी की एक नई लहर दौड़ गई है। आखिर ऐसा क्या कह दिया डिप्टी सीएम ने, और क्यों सवर्ण समाज के अपने ही नेता इस पूरे मुद्दे पर चुप्पी साधे बैठे हैं? आइए आपको बताते हैं इस बड़ी खबर की पूरी इनसाइड स्टोरी! आरक्षण, एससी-एसटी एक्ट और यूजीसी के नियमों को लेकर देश का सामान्य वर्ग लगातार सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहा है। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में यूजीसी के खिलाफ जबरदस्त विरोध प्रदर्शन देखने को मिला है। सामान्य वर्ग का सीधा कहना है कि प्रतिभा के साथ खिलवाड़ बंद होना चाहिए। केशव प्रसाद मौर्य का बड़ा बयान इसी गरमा-गर्मी के बीच जब मीडिया ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से आरक्षण पर सवाल पूछा, तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा— “आरक्षण से किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जाएगी और न ही आगे ऐसा होने दिया जाएगा। जब तक देश को जरूरत है, आरक्षण व्यवस्था लागू रहेगी।”मौर्य ने सुप्रीम कोर्ट की 50% आरक्षण सीमा का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने सामान्य वर्ग के गरीबों के लिए अलग से 10% EWS आरक्षण की व्यवस्था की है, इसलिए मौजूदा व्यवस्था में किसी बदलाव की जरूरत नहीं है। डिप्टी सीएम के इस बयान पर सामान्य जाति के लोगों का कहना है कि वे भी तो यही मांग कर रहे हैं! अगर आरक्षण देना ही है, तो जाति के आधार पर नहीं बल्कि आर्थिक आधार पर (EWS की तर्ज पर) दिया जाए, ताकि हर समाज के असली गरीब को उसका हक मिल सके। खबर का सबसे बड़ा और कड़वा पहलू यह है कि एक तरफ जहाँ नरेंद्र मोदी, चिराग पासवान, चंद्रशेखर आजाद, मायावती, अखिलेश यादव, राहुल गांधी और अब केशव प्रसाद मौर्य खुलकर आरक्षण के पक्ष में खड़े हैं… वहीं दूसरी तरफ सामान्य वर्ग का नेतृत्व करने वाले बड़े नेता पूरी तरह खामोश हैं! चाहे विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे हों, डिप्टी सीएम बृजेश पाठक हों,रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह हों, या फिर हरीश द्विवेदी, दयाशंकर सिंह और नितिन नवीन की टीम के नए महामंत्री हों… ये तमाम सवर्ण चेहरे आज आरक्षण के इस गर्म मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं और अपनी-अपनी पार्टियों के स्टैंड के साथ चुपचाप खड़े नजर आ रहे हैं। “सवाल यही है कि जब चुनाव आते हैं तो सामान्य वर्ग का वोट सबको चाहिए होता है, लेकिन जब उनके मुद्दों और हक की बात आती है, तो उनके अपने ही नेता मौनव्रत धारण कर लेते हैं। अब देखना यह होगा कि सड़कों पर उतरा यह आक्रोश राजनीति का क्या नया रुख तय करता है!”