UGC का बवाल, सामान्य वर्ग का गुस्सा और 2027 के यूपी रण से पहले दिल्ली हाईकमान में मची खलबली ! ब्राह्मण और क्षत्रिय समाज की नाराजगी से बैकफुट पर दिख रही बीजेपी…

UGC का बवाल, सामान्य वर्ग का गुस्सा और 2027 के यूपी रण से पहले दिल्ली हाईकमान में मची खलबली ! ब्राह्मण और क्षत्रिय समाज की नाराजगी से बैकफुट पर दिख रही बीजेपी ने अब अपनी सबसे बड़ी चाल चल दी है। भूमिहार, ब्राह्मण और राजपूत तीनों को साधने के लिए बीजेपी ने संगठन का दरवाजा पूरी तरह खोल दिया है। लेकिन क्या युवाओं को पद बांटने से सवर्णों का गुस्सा शांत हो पाएगा, या फिर बीजेपी का यह दांव बहुत देर से आया है? आइए पूरी राजनीतिक रणनीति को विस्तार से समझते हैं।उत्तर प्रदेश में होने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी ने भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) की नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया है। इसमें यूपी के तीन युवा चेहरों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपकर सियासी गलियारों में बड़ा संदेश दिया गया है। ब्राह्मण समाज का प्रतिनिधित्व करने वाले निखिल मणि तिवारी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है, क्षत्रिय (राजपूत) समाज से आने वाले हर्षवर्धन सिंह को राष्ट्रीय महामंत्री की कमान सौंपी गई है, और त्यागी-भूमिहार समाज को साधने के लिए विनीत वत्स त्यागी को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

इससे पहले यूपी में रोहित मिश्रा को प्रदेश युवा मोर्चा का अध्यक्ष बनाकर भी पार्टी ने इसी समीकरण को साधने की कोशिश की थी।आखिर बीजेपी को यह कदम उठाने की जरूरत क्यों पड़ी? दरअसल, हाल के दिनों में UGC के फैसलों और अन्य सामाजिक मुद्दों को लेकर सामान्य जाति यानी सवर्ण समाज के भीतर बीजेपी के खिलाफ नाराजगी खुलकर सामने आ रही थी। लगातार यह चर्चा गर्म थी कि पार्टी का पारंपरिक कोर वोटर खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है। ऐसे में 2027 के चुनाव में किसी भी बड़े सियासी नुकसान से बचने के लिए बीजेपी हाईकमान ने अब डैमेज कंट्रोल का मोर्चा संभाल लिया है।बीजेपी की यह रणनीति सिर्फ युवा मोर्चा तक सीमित नहीं है। राज्यसभा टिकटों के बंटवारे से लेकर राष्ट्रीय कार्यकारिणी के पुनर्गठन तक, पार्टी ने ब्राह्मण, राजपूत और भूमिहार समाज के साथ-साथ अन्य वर्गों के बीच भी पूरा संतुलन बनाने की कोशिश की है ताकि अपने पुराने और पारंपरिक वोट बैंक को हर हाल में एकजुट रखा जा सके।

अब सवाल यह उठता है कि क्या बीजेपी का यह चौका 2027 में रंग लाएगा और क्या सवर्ण समाज का गुस्सा शांत होकर वे दोबारा पूरी मजबूती से बीजेपी के साथ खड़े होंगे? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन एक बात साफ है कि यूपी की चुनावी जंग के लिए बीजेपी ने अपनी विसात अभी से बिछानी शुरू कर दी है।