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UP Election 2027: यूपी के सीतापुर जिले की 9 सीटों पर किसका है दबदबा, कौन मारेगा बाजी?

🕐 20 Sep 2026, 04:00 pm• 6 min padho • Chugal Khor News
UP Election 2027: यूपी के सीतापुर जिले की 9 सीटों पर किसका है दबदबा, कौन मारेगा बाजी?

UP Election 2027: उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. सभी दल अभी से चुनावी तैयारियों में जुट गए हैं. ऐसे में सत्ताधारी पार्टी बीजेपी भी राज्य की सभी सीटों पर तैयारियां कर रही है. क्योंकि यूपी का चुनाव 2029 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए काफी महत्वपूर्ण है. ऐसे में आज हम आपको सीतापुर जिले के राजनीतिक और सामाजिक समीकरण के बारे में बताने जा रहा है. क्योंकि सीतापुर जिले में विधानसभा की कुल 9 सीटें हैं. ऐसे में ये जिला सभी दलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है. सीतापुर में की नौ विधानसभा सीटों में 1. महोली, 2. सीतापुर, 3. हरगांव (अजा / SC), 4. लहरपुर, 5. बिसवां, 6. सेवता, 7. महमूदबाद, 8. सिधौली (अजा / SC) और 9. मिश्रिख (अजा / SC) शामिल है

सबसे पहले बात करते हैं सीतापुर जिले के ऐतिहासिक और भौगोलिक परिदृश्य के बारे में- उत्तर प्रदेश का सीतापुर जिला नैमिषारण्य की पवित्र भूमि, गोमती और सारंग नदी के उपजाऊ तटों पर बसा है. ये प्रसिद्ध पौराणिक तीर्थ स्थल नैमिषारण्य, चक्रतीर्थ, ऐतिहासिक स्थलों, प्रसिद्ध मंशाराम की बालूशाही और नैमिष के पावन धार्मिक आयोजनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जिला उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक अत्यंत प्रतिष्ठित, सामाजिक और रणनीतिक शक्ति केंद्र माना जाता है

जहां लखनऊ अपनी प्रशासनिक चमक-धमक और अयोध्या अपने धार्मिक इतिहास के लिए जाना जाता है, वहीं सीतापुर अपने समृद्ध कृषि क्षेत्र, गन्ने की पैदावार, पारंपरिक हस्तशिल्प और गहरे सामाजिक-राजनीतिक समीकरणों के कारण प्रदेश के सियासी पटल पर बेहद असरदार भूमिका निभाता है. आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर यूपी के इस रणनीतिक रूप से अहम जिले में भी राजनीतिक दलों ने अपनी बिसात बिछाने शुरू कर दी है

सीतापुर न केवल राज्य का धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र है, बल्कि यहां का विशाल कृषि उत्पादन नेटवर्क, नैमिषारण्य का आध्यात्मिक पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का ताना-बाना इसकी पहचान को अटूट मजबूती प्रदान करता है. मिश्रिख के पवित्र तीर्थों से लेकर सीतापुर शहर के व्यापारिक केंद्रों तक, और महोली व हरगांव के उपजाऊ ग्रामीण अंचलों से लेकर लहरपुर, बिसवां, सेवता, महमूदाबाद और सिधौली तक, सीतापुर की जनता का हर राजनीतिक फैसला लखनऊ की विधानसभा की दिशा और दशा को गहराई से प्रभावित करता है

सीतापुर की राजनीति का मिजाज राज्य के अन्य क्षेत्रों से काफी अलग और दिलचस्प है. 9 विधानसभा सीटों वाला यह जिला सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से बेहद विविधतापूर्ण है. यहां चुनावी वैतरणी पार करने के लिए किसानों को फसलों का उचित मूल्य, गन्ना भुगतान, आवारा पशुओं की समस्या, कानून-व्यवस्था, नैमिषारण्य तीर्थ क्षेत्र का विकास, स्वास्थ्य व शिक्षा सुविधाएं और स्थानीय युवाओं के रोजगार के मुद्दे बेहद निर्णायक सिद्ध होते हैं

ऐतिहासिक रूप से सीतापुर की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (BJP), समाजवादी पार्टी (SP), बहुजन समाज पार्टी (BSP) और कांग्रेस का मजबूत जनाधार देखने को मिला है. यहां हमेशा बहुकोणीय और तीखा मुकाबला देखने को मिलता है, जहां जातीय समीकरण और स्थानीय जन-मुद्दे हार-जीत की रेखा तय करते हैं. कृषि आधारित अर्थव्यवस्था, गन्ना किसानों के सवाल, तीर्थाटन विकास और बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर हमेशा से चुनावी नतीजों की दिशा तय करते आए हैं

यहां के सियासी मैदान में मुख्य मुद्दे किसानों की खुशहाली, कृषि विकास, कानून-व्यवस्था, नैमिषारण्य व ग्रामीण क्षेत्र का इंफ्रास्ट्रक्चर और युवाओं का रोजगार के इर्द-गिर्द घूमते हैं. आखिर सीतापुर जिले की 9 विधानसभा सीटों का राजनीतिक इतिहास क्या कहता है? किन सीटों पर किस दिग्गज का पलड़ा भारी रहा है? और आगामी महामुकाबले में किसकी चुनावी रणनीति सटीक बैठेगी? चलिए समझते हैं

महोली): सीतापुर जिले की इस विधानसभा सीट पर वर्ष 2022 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार शशांक त्रिवेदी ने जीत हासिल की थी. उन्होंने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को कड़े मुकाबले में पीछे छोड़ते हुए शानदार बढ़त बनाई थी. इस सीट पर बीजेपी की जीत ने क्षेत्र में पार्टी के संगठन और जनाधार को और अधिक मजबूत साबित किया. क्षेत्रीय मतदाताओं ने क्षेत्र के विकास और सुरक्षा के मुद्दों को ध्यान में रखते हुए अपना समर्थन दिया था

सीतापुर सदर: सीतापुर की इस महत्वपूर्ण सदर सीट पर बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे राकेश राठौर 'गुरु' विजयी रहे थे. उनका मुकाबला समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व विधायक राधेश्याम जायसवाल के साथ था. यह मुकाबला बेहद रोमांचक और कांटे की टक्कर वाला रहा, जिसमें आखिर में बीजेपी उम्मीदवार ने बाजी मारी. इस जीत के साथ ही बीजेपी ने इस हाई-प्रोफाइल सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने में सफलता पाई थी

हरगांव (अजा): सीतापुर की हरगांव सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित हरगांव विधानसभा सीट पर भी बीजेपी उम्मीदवार सुरेश राही ने जीत दर्ज की थी. उन्होंने चुनाव में अपने विरोधी प्रत्याशियों को पराजित करते हुए निर्णायक बढ़त हासिल की थी. इस जीत के बाद उन्हें राज्य सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी. क्षेत्र की जनता ने उनके पक्ष में मतदान कर विकास कार्यों और सरकारी नीतियों पर भरोसा जताया था

लहरपुर: सीतापुर जिले की लहरपुर विधानसभा सीट सीतापुर जिले की उन चुनिंदा सीटों में शामिल रही जहां समाजवादी पार्टी को सफलता मिली. यहां से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार अनिल कुमार वर्मा ने शानदार जीत का परचम लहराया था. उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को चुनावी मैदान में मात देते हुए सीट पर कब्जा किया. इस सीट पर सपा की जीत ने यह साबित किया कि विपक्षी दल का यहां मजबूत स्थानीय आधार है

बिसवां: सीतापुर की बिसवां विधानसभा सीट पर 2022 के चुनाव में बीजेपी के निर्मल वर्मा ने जीत हासिल की. उन्होंने अपने विरोधियों को पछाड़ते हुए चुनावी वैतरणी पार की और विधानसभा पहुंचे. इस सीट पर भाजपा की रणनीति और स्थानीय समीकरण पूरी तरह से सफल साबित हुए थे. मतदाताओं ने क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं के समाधान की उम्मीद के साथ बीजेपी प्रत्याशी का समर्थन किया

सेवता: सीतापुर जिले की सेवता विधानसभा सीट पर भी बीजेपी के उम्मीदवार ज्ञान तिवारी ने उल्लेखनीय जीत दर्ज की. उन्होंने चुनाव के दौरान विभिन्न मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाते हुए मतदाताओं को अपने पाले में किया. कड़े संघर्ष वाले इस चुनावी मैदान में उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ दिया. इस जीत से जिले में एनडीए गठबंधन और भाजपा की स्थिति को और अधिक मजबूती मिली

महमूदबाद: सीतापुर की इस बेहद अहम और राजनीतिक रूप से संवेदनशील सीट पर बीजेपी की तरफ से मैदान में उतरीं आशा मौर्य विजयी रहीं. उन्होंने यहां के पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों को बदलते हुए शानदार चुनावी सफलता प्राप्त की. बीजेपी प्रत्याशी की इस जीत को पार्टी की एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा गया. क्षेत्र के विकास और सामाजिक संतुलन के मुद्दों ने इस चुनाव परिणाम को तय करने में बड़ी भूमिका निभाई

सिधौली (अजा): सीतापुर की ये सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सिधौली सीट पर भाजपा के मनीष रावत ने जीत का परचम लहराया. उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों को पीछे छोड़ते हुए विधानसभा चुनाव में स्पष्ट बढ़त बनाई. इस जीत के साथ ही इस सुरक्षित सीट पर लंबे समय बाद राजनीतिक बदलाव देखने को मिला. स्थानीय जनता ने क्षेत्र के विकास और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बीजेपी के पक्ष में मतदान किया था

मिश्रिख (अजा): मिश्रिख सुरक्षित विधानसभा सीट पर बीजेपी के उम्मीदवार राम कृष्ण भार्गव ने विजय हासिल की. उन्होंने अपने विरोधियों को हराकर सीट पर भगवा ध्वज लहराया और अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की. चुनाव के दौरान यहाँ सुरक्षा, विकास और सामाजिक कल्याण की योजनाएं मुख्य चर्चा का केंद्र रहीं. जनता के भारी समर्थन के चलते भाजपा उम्मीदवार ने यहां एक सुरक्षित और निर्णायक जीत दर्ज की

स्रोत: NewsNationTV

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