उन्नाव। उत्तर प्रदेश के उन्नाव में शुक्रवार दोपहर ARTO श्वेता वर्मा ने आरटीओ कार्यालय का अचानक निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यालय के सभी काउंटरों का जायजा लिया औ…
उन्नाव। उत्तर प्रदेश के उन्नाव में शुक्रवार दोपहर ARTO श्वेता वर्मा ने आरटीओ कार्यालय का अचानक निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यालय के सभी काउंटरों का जायजा लिया और वहां अपने काम के लिए पहुंचे आवेदकों से सीधे बातचीत की। निरीक्षण के दौरान कार्यालय में कोई बाहरी व्यक्ति मौजूद नहीं मिला।
अचानक हुए निरीक्षण से कुछ देर के लिए आरटीओ कार्यालय में हलचल रही। ARTO ने अलग-अलग काउंटरों पर पहुंचकर आवेदकों से पूछा कि उन्हें अपना काम कराने में किसी तरह की परेशानी तो नहीं हो रही है और क्या वे आवेदन से जुड़ी प्रक्रिया स्वयं पूरी कर रहे हैं।
निरीक्षण के बाद ARTO श्वेता वर्मा ने बताया कि परिवहन कार्यालय में समय-समय पर इस तरह की जांच की जाती है। इसका उद्देश्य यह देखना है कि आवेदक अपना काम स्वयं करा रहे हैं या किसी बाहरी व्यक्ति की मदद ले रहे हैं।
उन्होंने बताया कि शुक्रवार को हुई जांच के दौरान सभी आवेदक अपना काम खुद कराते हुए मिले। आवेदकों से उनकी समस्याओं के बारे में भी जानकारी ली गई और मौके पर ही समाधान कराने का प्रयास किया गया।
ARTO ने बताया कि परिवहन विभाग की ज्यादातर सेवाएं अब ऑनलाइन और फेसलेस मोड में उपलब्ध हैं। कई सेवाओं के लिए आवेदकों को आरटीओ कार्यालय आने की जरूरत नहीं होती और वे घर बैठे प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि ऑटो अप्रूवल जैसी सुविधाओं के जरिए भी कई काम ऑनलाइन पूरे किए जा सकते हैं। जिन सेवाओं के लिए कार्यालय आना जरूरी हो, उनके लिए आवेदक स्वयं संबंधित काउंटर पर जाकर प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
किसी तरह की परेशानी होने पर आवेदकों को ARTO या RI से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
परिवहन विभाग की ओर से 14 से 19 सितंबर तक ‘मिशन सेफ फ्यूचर 3.0’ अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य स्कूली वाहनों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और वाहनों में आवश्यक अटेंडेंट की व्यवस्था की जांच करना है।
ARTO श्वेता वर्मा के मुताबिक, अभियान के तहत अब तक जांच टीमों ने करीब 70 स्कूली वाहनों की जांच की है। जांच में पांच वाहन अनफिट पाए गए हैं, जबकि कमियां मिलने पर 45 स्कूली वाहनों के चालान किए गए हैं।
अभियान के दौरान स्कूली वाहनों में अटेंडेंट की मौजूदगी को भी प्रमुखता से जांचा जा रहा है। विभाग की ओर से निर्देश दिए गए हैं कि जिन वाहनों में छात्राओं का आवागमन होता है, उनमें महिला अटेंडेंट की मौजूदगी सुनिश्चित की जाए।
परिवहन विभाग की टीमें स्कूल प्रबंधन और वाहन चालकों को भी स्कूली बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियमों के प्रति जागरूक कर रही हैं।
‘मिशन सेफ फ्यूचर 3.0’ अभियान के तहत केवल वाहन फिटनेस और अटेंडेंट की व्यवस्था ही नहीं, बल्कि स्कूली वाहन चालकों के चरित्र सत्यापन पर भी जोर दिया जा रहा है।
स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि चालक का चरित्र सत्यापन कराने के बाद ही उसे स्कूली वाहन चलाने की जिम्मेदारी दी जाए। इसका उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा से जुड़े जोखिमों को कम करना है।
उत्तर प्रदेश मोटर वाहन नियमावली-2019 के तहत प्रत्येक विद्यालय में विद्यालय यान सुरक्षा समिति का गठन किया जाना है। समिति की साल में चार बैठकें आयोजित की जानी हैं।
इन बैठकों में स्कूली वाहनों की फिटनेस, परमिट, अटेंडेंट की व्यवस्था, चालक के चरित्र सत्यापन और अन्य सुरक्षा मानकों की समीक्षा की जाएगी।
परिवहन विभाग शिक्षा विभाग के सहयोग से सभी विद्यालयों में विद्यालय यान सुरक्षा समितियों का शत-प्रतिशत गठन सुनिश्चित कराने पर जोर दे रहा है।
उन्नाव में आरटीओ कार्यालय के औचक निरीक्षण के साथ-साथ स्कूली वाहनों की जांच का अभियान भी परिवहन विभाग की सक्रियता को दर्शाता है। एक ओर कार्यालय में आवेदकों की सुविधाओं और फेसलेस सेवाओं की निगरानी की जा रही है, वहीं दूसरी ओर स्कूली वाहनों की फिटनेस, चालकों के सत्यापन और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मानकों को जांचा जा रहा है।
विभाग का जोर इस बात पर है कि स्कूली बच्चों को लाने-ले जाने वाले वाहनों में सुरक्षा नियमों का पालन अनिवार्य रूप से हो और नियमों में लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की जाए।





