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मोहन भागवत के ‘भारत भगवान बुद्ध का देश’ बयान पर सियासी संग्राम, राम-कृष्ण के जिक्र को लेकर उठे सवाल -

🕐 03 Sep 2026, 06:11 pm• 3 min padho • Chugal Khor News
मोहन भागवत के ‘भारत भगवान बुद्ध का देश’ बयान पर सियासी संग्राम, राम-कृष्ण के जिक्र को लेकर उठे सवाल -

RSS प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे के दौरान दिए गए एक बयान ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक नई बहस छेड़ दी है, न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम के दौरान भागवत ने भारत को ‘भगवान बुद्ध का देश’ बताते हुए शांति, करुणा और सद्भाव को भारतीय पहचान का हिस्सा बताया, भागवत के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे कि भारत की पहचान का जिक्र करते समय भगवान राम, भगवान कृष्ण और सनातन परंपरा का उल्लेख क्यों नहीं किया गया हालांकि, उनके पूरे संबोधन के संदर्भ को लेकर अलग-अलग दावे भी सामने आ रहे हैं।

मोहन भागवत इन दिनों अमेरिका के दौरे पर हैं, जहां वह विभिन्न संगठनों और समुदायों के बीच भारत, हिंदुत्व और सनातन संस्कृति को लेकर अपनी बात रख रहे हैं, इसी दौरान न्यूयॉर्क में अपने संबोधन में उन्होंने भारत को भगवान बुद्ध की धरती बताते हुए कहा कि भारत की पहचान शांति, करुणा और सद्भाव जैसे मूल्यों से होती है, इसके बाद सोशल मीडिया पर बयान के एक हिस्से को लेकर बहस तेज हो गई, सवाल उठाया गया कि यदि भारत की सांस्कृतिक पहचान की बात हो रही थी, तो राम, कृष्ण और सनातन परंपरा का उल्लेख क्यों नहीं किया गया।

भागवत के बयान पर जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरि ने भी सवाल उठाए हैं, उन्होंने RSS प्रमुख से हिंदुत्व की स्पष्ट परिभाषा को लेकर सवाल किया, स्वामी यतींद्रानंद गिरि का कहना है कि हिंदू समाज के एक हिस्से में इस बात को लेकर भ्रम है कि हिंदुत्व को किस रूप में देखा और समझा जाए, उन्होंने अलग-अलग सार्वजनिक बयानों का हवाला देते हुए सवाल किया कि कभी भारत को हिंदू राष्ट्र बताया जाता है, कभी भगवान बुद्ध की धरती के रूप में उसकी पहचान बताई जाती है और कभी भारत में मुसलमानों की भूमिका को लेकर बयान सामने आते हैं, ऐसे में हिंदू समाज यह जानना चाहता है कि RSS की नजर में हिंदुत्व की स्पष्ट परिभाषा आखिर क्या है।

हालांकि, पूरे संदर्भ को देखें तो भागवत ने भगवान बुद्ध को सनातन परंपरा से अलग बताने की बात नहीं कही, उनके संबोधन में वैदिक हिंदू परंपरा और बौद्ध परंपरा को व्यापक भारतीय और सनातन सांस्कृतिक विरासत की धाराओं के रूप में देखने की बात सामने आई, भगवान बुद्ध के संदेश को भारत की शांति, करुणा और सद्भाव की परंपरा से जोड़ते हुए उन्होंने भारतीय संस्कृति में बुद्ध के योगदान को रेखांकित किया, हिंदू राष्ट्र के सवाल पर भी भागवत ने भारत को हिंदू राष्ट्र बताते हुए कहा कि इसके लिए किसी संवैधानिक या कानूनी मुहर की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह देश की सदियों पुरानी सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा विषय है।

इस पूरे विवाद के बीच यह दावा भी सामने आया है कि मोहन भागवत के संबोधन के केवल एक हिस्से को सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा है, दावा है कि ‘भारत भगवान बुद्ध का देश है’ वाले हिस्से को संदर्भ से अलग करके प्रचारित किया गया, जबकि उनके पूरे संबोधन में भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और हिंदुत्व से जुड़े व्यापक विचार भी शामिल थे हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल दावों को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और बयान के संदर्भ को लेकर बहस जारी है।

स्रोत: Filmitics

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