प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23 और 24 सितंबर को केंद्रीय मंत्रियों के साथ दो दिवसीय विशेष ‘चिंतन शिविर’ करेंगे. नई दिल्ली स्थित सेवा तीर्थ में होने वाली इस उच्चस्…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23 और 24 सितंबर को केंद्रीय मंत्रियों के साथ दो दिवसीय विशेष ‘चिंतन शिविर’ करेंगे. नई दिल्ली स्थित सेवा तीर्थ में होने वाली इस उच्चस्तरीय बैठक में सरकार के अब तक के कामकाज की समीक्षा के साथ-साथ विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को लेकर आगे की रणनीति और नई प्राथमिकताओं पर मंथन किया जाएगा. बैठक का पहला सत्र 23 सितंबर को शाम करीब 4 बजे से शुरू होगा, जबकि 24 सितंबर को पूरे दिन विचार-विमर्श का कार्यक्रम रहेगा

इस बार का चिंतन शिविर खास इसलिए भी है क्योंकि इसमें कैबिनेट स्तर पर मंत्रालयों के कामकाज, नीतियों और भविष्य की योजनाओं को लेकर विस्तृत चर्चा होगी. इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्य मंत्रियों और स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों के साथ अलग-अलग दौर की समीक्षा और बातचीत कर चुके हैं. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सरकार के अब तक के कामकाज की समीक्षा करना ,योजनाओं और नीतियों को लागू करने की समय सीमा और स्थिति समझना है

दो दिवसीय चिंतन शिविर से पहले प्रधानमंत्री ने मंत्रियों के कई समूह बनाने के निर्देश दिए हैं. जानकारी के मुताबिक आधे दर्जन से ज्यादा ग्रुप बनाए गए हैं और प्रत्येक ग्रुप में करीब आठ मंत्री शामिल हैं. इन समूहों में एक-दूसरे से जुड़े मंत्रालयों के मंत्रियों को रखा गया है, ताकि संबंधित विषयों पर पहले से चर्चा और विचार-विमर्श करके मंत्री बैठक में आए. इन ग्रुपों की कई दौर की बैठक चिंतन शिविर से पहले हुई है. इसमें मंत्री अपने-अपने मंत्रालय से जुड़े मुद्दों, चुनौतियों और संभावित समाधानों पर चर्चा करके अपने प्रस्तुति की तैयारी किए. इसके बाद समूह की ओर से मुख्य बैठक में संबंधित विषयों पर प्रस्तुति और विचार रखे जाएंगे

चिंतन शिविर में सिर्फ पुराने कामकाज की समीक्षा ही नहीं होगी, बल्कि भविष्य की योजनाओं को लेकर नए विचारों पर भी चर्चा होगी. सभी मंत्रियों से अपने-अपने विभाग से जुड़े नए आइडिया और सुझाव लेकर आने को भी कहा गया है. बैठक में इन सुझावों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी. जिन प्रस्तावों पर सहमति बनेगी, उन्हें आगे नीतिगत प्रक्रिया में ले जाया जा सकता है और जरूरत के मुताबिक कैबिनेट के सामने मंजूरी के लिए रखा जा सकता है

मंत्रियों को अपने-अपने मंत्रालय का रिपोर्ट कार्ड भी तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं. इसमें खास तौर पर यह जानकारी रखी जाएगी कि मंत्रालय में अब तक कितने नए काम पूरे हुए हैं, कितने काम अभी लंबित हैं और जनकल्याण से जुड़े कामों का कितना असर हुआ है. मंत्रालयों को अपनी प्रगति को आंकड़ों और प्रतिशत के रूप में भी पेश करने के लिए कहा गया है, ताकि कामकाज की स्थिति को स्पष्ट तरीके से समझा जा सके. मंत्रालयों और विभागों से अपनी उपलब्धियों के साथ-साथ उन क्षेत्रों की जानकारी भी रखने को कहा गया है, जहां अभी सुधार की जरूरत है

चिंतन शिविर में शासन व्यवस्था, प्रशासनिक सुधार और सरकारी नीतियों की समीक्षा भी होगी. खास तौर पर यह देखा जाएगा कि अलग-अलग मंत्रालयों के बीच आपसी तालमेल कितना बेहतर हुआ है और इसे आगे किस तरह मजबूत किया जा सकता है. इसके साथ ही मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय के जरिए काम का बोझ कम करने, संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और सरकारी खर्च में कटौती की संभावनाओं पर भी चर्चा होगी. खास ध्यान लोककल्याणकारी योजनाओं और नीतियों पर रहेगा. यह देखा जाएगा कि अलग-अलग मंत्रालयों की योजनाओं में आपसी तालमेल कितना है और जनहित से जुड़ी सेवाओं को और बेहतर कैसे बनाया जा सकता है. इसके लिए नीतियों और सरकारी सेवाओं में सुधार का रोडमैप तैयार करने पर भी चर्चा होगी

बैठक से पहले मंत्रालयों और विभागों को कई स्तरों पर तैयारी करने के निर्देश दिए गए हैं. इनमें मंत्रालय की गतिविधियों और योजनाओं की प्रगति को दिखाने वाले लाइव डैशबोर्ड तैयार रखना, प्रगति की समीक्षा के लिए कार्ड तैयार करना और संबंधित फीडबैक को व्यवस्थित रखना शामिल है. इसके अलावा मंत्रालयों और विभागों की आधिकारिक वेबसाइटों को ज्यादा यूजर-फ्रेंडली बनाने पर भी जोर दिया गया है, ताकि आम लोगों को सरकारी योजनाओं, सेवाओं और उनसे जुड़ी जानकारी आसानी से मिल सके

चिंतन शिविर का सबसे बड़ा फोकस विकसित भारत 2047 के लक्ष्य पर रहेगा. बैठक में अब तक इस दिशा में हुई प्रगति, सामने आई चुनौतियों और कमियों की समीक्षा की जाएगी. इसके साथ ही आने वाले वर्षों में किन क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है, किन योजनाओं को तेज करने की आवश्यकता है और किन नए सुधारों को लागू किया जा सकता है, इस पर भी चर्चा होगी. यानी दो दिनों की बैठक में एक तरफ अब तक के काम का हिसाब-किताब होगा, तो दूसरी तरफ भविष्य की योजनाओं का खाका तैयार करने की कोशिश होगी

सूत्रों के मुताबिक, इस बार मंत्रालयों के अधिकारियों को 2021 के चिंतन शिविर में सामने आई सिफारिशों पर अब तक हुई कार्रवाई का लेखा-जोखा भी तैयार करने को कहा गया है. इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि पहले तय किए गए सुधारों में से कितने लागू हुए और किन सुझावों पर अभी काम बाकी है

चिंतन शिविर के समय को देखते हुए इसे संभावित कैबिनेट फेरबदल से जोड़कर भी देखा जा रहा है और कुछ हलकों में इसे अनौपचारिक तौर पर ‘फेयरवेल मीटिंग’ तक कहा जा रहा है. हालांकि उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में बैठक का मुख्य एजेंडा गवर्नेंस, कामकाज की समीक्षा, सुधार और* विकसित भारत 2047 के लिए आगे की रणनीति बताया गया* है. 2021 में भी मोदी सरकार ने इसी तरह के चिंतन और समीक्षा सत्र आयोजित किए थे. उसी साल अक्टूबर में कैबिनेट में बड़ा फेरबदल हुआ था. इसलिए इस बार भी दोनों घटनाओं के बीच संभावित संबंध को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं. लेकिन फेरबदल को लेकर अंतिम फैसला या आधिकारिक घोषणा अलग विषय है

कुल मिलाकर 23 और 24 सितंबर का यह चिंतन शिविर सरकार के लिए स्टॉकटेकिंग और फ्यूचर प्लानिंग, दोनों का मंच होगा. मंत्रियों से उनके मंत्रालय की उपलब्धियों और लंबित कामों का ब्यौरा लिया जाएगा, नए आइडिया पर चर्चा होगी, मंत्रालयों के बीच तालमेल बढ़ाने के उपायों पर मंथन होगा और जनकल्याणकारी योजनाओं तथा सरकारी सेवाओं को बेहतर बनाने का रोडमैप तैयार किया जाएगा