कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने बुधवार को उन दावों पर पलटवार किया, जिनमें कहा गया था कि वे पंजाब छोड़कर अमेरिका चले गए हैं. अपने भतीजे के घर प्रवर्तन निद…

कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने बुधवार को उन दावों पर पलटवार किया, जिनमें कहा गया था कि वे पंजाब छोड़कर अमेरिका चले गए हैं. अपने भतीजे के घर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हालिया छापेमारी को लेकर मुंडियां ने कहा कि इस कार्रवाई के दौरान एक विधवा, बच्चों और एक गर्भवती औरत को परेशान किया गया. उन्होंने कहा कि पंजाबियों को ईडी के छापों या धमकियों से नहीं डराया जा सकता. उन्होंने कहा कि, "हम पंजाबी हैं और हम डरने वाले नहीं हैं."

मीडिया को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री और आप पंजाब के नेता हरदीप सिंह मुंडियां ने रवनीत सिंह बिट्टू की टिप्पणियों का जवाब देते हुए कहा, "मैं यह प्रेस कॉन्फ्रेंस चंडीगढ़ में कर रहा हूं, अमेरिका में नहीं." उन्होंने कहा कि बिट्टू बुधवार से दावा कर रहे थे कि वे अमेरिका चले गए हैं. उन्होंने कहा, "अपनी टिकट कटने के बाद, ऐसा लगता है कि रवनीत सिंह बिट्टू ने समराला रोड पर एक ट्रैवल एजेंसी शुरू कर दी है और मेरी और मेरे भतीजे की अमेरिका की टिकट बुक कर दी है."

कैबिनेट मंत्री ने ईडी की ओर से उनके भतीजे के घर पर की गई छापेमारी के तरीके पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि परिवार पहले ही एक त्रासदी का सामना कर चुका है. जिसके बाद उनका भतीजा अपने बच्चों समेत लुधियाना आ गया था और परिवार के पालन-पोषण के लिए व्यवसाय शुरू किया था. हरदीप सिंह मुंडियां ने कहा, "ईडी की तलाशी के दौरान एक विधवा और उसकी छोटी बेटी को परेशान किया गया और धमकाया गया."

उन्होंने बताया कि यह तलाशी सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक जारी रही और बच्चों से पूछताछ की गई कि वे उनके साथ क्यों रहते हैं. उन्होंने कहा, "अधिकारियों ने परिवार को कहा कि वे मुझे संदेश दें कि मैं 'आप' छोड़ दूं और मेरा भतीजा मेरा समर्थन करना बंद कर दे, क्योंकि 'आप' एक 'गलत पार्टी' है. यह बात सवाल खड़े करती है कि इस कार्रवाई का मकसद सिर्फ जांच करना है या राजनीतिक दबाव बनाना है."

हरदीप सिंह मुंडियां ने बताया कि छापेमारी के दौरान एक छोटी बच्ची घंटों भूखी रोती रही और एक महीने के नवजात बच्चे को दूध तक नहीं पिलाने दिया गया. उन्होंने सवाल किया, "मेरे भतीजे की गर्भवती पत्नी को बिना बैठने दिए तीन से चार घंटे खड़ा रखा गया. जब अधिकारी जाने लगे तो परिवार ने घर से बरामद हुई चीजों का लिखित रिकॉर्ड मांगा. इस पर अधिकारियों ने एक दस्तावेज दिया जिसमें लिखा था कि पुराने घरेलू सामान के अलावा कुछ भी बरामद नहीं हुआ है. अगर कुछ बरामद ही नहीं हुआ तो परिवार को तीन-चार घंटे क्यों परेशान किया गया?"