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लखनऊ में जब्त वाहनों को मिलेगा स्थायी ठिकाना, अहिमामऊ में तैयार हुआ पहला डिटेंशन-डम्पिंग यार्ड -

🕐 01 Sep 2026, 04:41 pm• 3 min padho • Chugal Khor News
लखनऊ में जब्त वाहनों को मिलेगा स्थायी ठिकाना, अहिमामऊ में तैयार हुआ पहला डिटेंशन-डम्पिंग यार्ड -

राजधानी लखनऊ में परिवहन विभाग द्वारा जब्त और निरुद्ध किए जाने वाले वाहनों को रखने की वर्षों पुरानी समस्या अब खत्म होने जा रही है। अहिमामऊ में परिवहन विभाग का पहला डिटेंशन-कम-डम्पिंग यार्ड तैयार हो चुका है। करीब 2.55 करोड़ रुपये की लागत से बने इस यार्ड में एक साथ 237 वाहनों को खड़ा किया जा सकेगा। तकनीकी समिति के निरीक्षण के बाद यार्ड को जल्द ही परिवहन विभाग को हस्तांतरित किए जाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

अहिमामऊ में तैयार डिटेंशन यार्ड में 136 हल्के वाहन, 15 भारी वाहन और 86 दोपहिया वाहन खड़े किए जा सकेंगे। यार्ड के शुरू होने के बाद प्रवर्तन टीमों द्वारा कार्रवाई के दौरान निरुद्ध किए गए वाहनों को रखने के लिए थानों और खुले स्थानों पर निर्भरता काफी कम हो जाएगी।लखनऊ में डिटेंशन यार्ड के लिए जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया परिवहन विभाग के निर्देश पर शुरू की गई थी। इसके बाद नगर निगम से भूमि उपलब्ध कराने के लिए अनुरोध किया गया। नगर निगम की ओर से ग्राम अहिमामऊ में 0.780 हेक्टेयर यानी करीब 83,958 वर्गफीट भूमि परिवहन विभाग द्वारा निरुद्ध वाहनों की पार्किंग के लिए अस्थायी रूप से उपलब्ध कराई गई।इसी भूमि पर मुख्य भवन, गार्ड रूम, बाउंड्रीवाल समेत अन्य जरूरी निर्माण कार्य कराए गए। इसके लिए 2.55 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि स्वीकृत की गई थी। संबंधित कार्यदायी संस्था ने 21 अगस्त 2026 को निर्माण कार्य पूरा होने की जानकारी विभाग को दी।यार्ड का निर्माण पूरा होने के बाद अब हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

हस्तांतरण से पहले तकनीकी समिति मौके का निरीक्षण करेगी। समिति में लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग और सिंचाई विभाग समेत संबंधित विभागों के अभियंताओं को शामिल किया गया है। समिति निरीक्षण के बाद अपनी रिपोर्ट देगी, जिसके आधार पर यार्ड को परिवहन विभाग को सौंपने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक लखनऊ के प्रवर्तन दलों ने 5,628 वाहनों का चालान किया है, जबकि 491 वाहनों को निरुद्ध किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक वर्तमान में निरुद्ध वाहनों को रखने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है। कई बार थानों में भी जगह की कमी होने के कारण वाहनों को निरुद्ध करने में परेशानी आती है और कार्रवाई के बाद केवल चालान कर वाहन छोड़ना पड़ता है।अहिमामऊ डिटेंशन यार्ड के संचालन के बाद इस समस्या से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है। पर्याप्त क्षमता वाला निर्धारित परिसर उपलब्ध होने से प्रवर्तन अधिकारी कार्रवाई के बाद वाहनों को सुरक्षित तरीके से यार्ड में रख सकेंगे।फिलहाल लखनऊ में निरुद्ध वाहनों को पी-4 पार्किंग और कल्ली यार्ड, पीजीआई में रखा जाता है। अहिमामऊ यार्ड के शुरू होने के बाद आवश्यकता के अनुसार इन स्थानों पर खड़े वाहनों को भी यहां शिफ्ट किया जा सकेगा। इससे अलग-अलग स्थानों पर वाहनों के बिखरे रहने की समस्या कम होगी और निरुद्ध वाहनों के लिए एक केंद्रीकृत व्यवस्था विकसित होगी।

नया डिटेंशन यार्ड केवल परिवहन विभाग के लिए पार्किंग सुविधा नहीं है, बल्कि शहर की यातायात व्यवस्था के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अभी कई जब्त वाहन थानों, सड़क किनारे या अन्य खुले स्थानों पर खड़े रहते हैं। इससे थानों में जगह घिरने के साथ ही कई जगह यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति बनती है।अहिमामऊ यार्ड के संचालन के बाद कार्रवाई के दौरान निरुद्ध वाहनों को सीधे निर्धारित परिसर में भेजा जा सकेगा। इससे थानों पर दबाव कम होगा, खुले स्थानों पर वाहनों का जमावड़ा घटेगा और सड़क किनारे खड़े वाहनों से होने वाली यातायात संबंधी परेशानियों में भी कमी आने की उम्मीद है।अपर परिवहन आयुक्त (प्रवर्तन) केडी सिंह गौर ने बताया कि सड़क सुरक्षा प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। अहिमामऊ में तैयार डिटेंशन-कम-डम्पिंग यार्ड इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि यार्ड का संचालन शुरू होने के बाद प्रवर्तन कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के साथ-साथ जब्त वाहनों को व्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से रखने की सुविधा मिलेगी। परिवहन विभाग के मुताबिक लखनऊ के बाद प्रदेश के अन्य जिलों में भी डिटेंशन और डम्पिंग यार्ड विकसित किए जा रहे हैं। अहिमामऊ यार्ड का इस्तेमाल तकनीकी निरीक्षण और हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जल्द शुरू कराया जाएगा।

स्रोत: Filmitics

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