लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाले 3.54 लाख रसोइयों को बड़ा तोहफा दिया…

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाले 3.54 लाख रसोइयों को बड़ा तोहफा दिया है। सरकार ने रसोइयों के मासिक मानदेय में ₹1,000 की बढ़ोतरी कर दी है। अब रसोइयों को ₹2,000 के बजाय ₹3,000 प्रतिमाह मानदेय मिलेगा।

इसके अलावा रसोइयों और उनके परिवारों को सालाना ₹5 लाख तक कैशलेस इलाज, दुर्घटना की स्थिति में ₹2 लाख की आर्थिक सहायता और परिधान के लिए ₹1,000 की राशि दी जाएगी। पहले परिधान के लिए ₹500 मिलते थे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित राज्यस्तरीय रसोइया सम्मान समारोह में इन घोषणाओं की जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने 11 रसोइयों को बढ़े हुए मानदेय का चेक, कैशलेस चिकित्सा कार्ड और परिधान किट देकर नई व्यवस्था की शुरुआत की।

योगी सरकार के कार्यकाल में रसोइयों के मानदेय में यह तीसरी बढ़ोतरी है। राज्य में प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत सरकारी विद्यालयों में बच्चों को गर्म, ताजा और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने में रसोइयों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

राज्य में कार्यरत रसोइयों में करीब 93 प्रतिशत महिलाएं हैं। ऐसे में सरकार के इस फैसले से बड़ी संख्या में महिला रसोइयों को सीधे आर्थिक लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रसोइयों से विद्यालय की रसोई को साफ-सुथरा रखने और बच्चों को निर्धारित साप्ताहिक मेन्यू के अनुसार पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की अपील की।

उन्होंने कहा कि रसोई में बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर रोक होनी चाहिए। भोजन तैयार करते समय विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है, ताकि उसमें छिपकली, कीड़ा या कोई अन्य बाहरी वस्तु न गिर सके।

मुख्यमंत्री ने फूड प्वाइजनिंग को बच्चों के जीवन से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए भोजन की सुरक्षा और गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही।

प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत बेसिक शिक्षा परिषद के करीब 1.42 लाख विद्यालयों में 1.46 करोड़ से अधिक बच्चों को गर्म, ताजा और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

सरकार की ओर से स्कूलों में भोजन की व्यवस्था के साथ-साथ विद्यालयों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने सरकारी विद्यालयों के जर्जर भवनों को लेकर भी सरकार की योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन कायाकल्प के तहत स्कूलों में फर्श, शौचालय, रसोई, पेयजल, पुस्तकालय, डिजिटल लाइब्रेरी और स्मार्ट क्लास जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं।

वहीं, प्रोजेक्ट अलंकार के तहत माध्यमिक विद्यालयों के पुराने और जर्जर भवनों को बदलने का काम किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक सरकारी स्कूलों के बच्चे अब केवल अक्षर ज्ञान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भाषा, गणित, अंग्रेजी और विज्ञान जैसे विषयों में भी आगे बढ़ रहे हैं।

समारोह में मुख्यमंत्री ने 11 रसोइयों को सम्मानित किया। इनमें सीतापुर की किरन देवी, लखनऊ की आशा तिवारी, गोरखपुर की सुनीता और रेखा देवी, अलीगढ़ की सुदेश देवी और पिंकी देवी, वाराणसी की सरिता दीक्षित, हरदोई की गीता देवी, लखीमपुर खीरी की सीमा सिंह, उन्नाव की खिलाना और रायबरेली की रेखा शामिल रहीं।

सभी को बढ़े हुए मानदेय का चेक, कैशलेस चिकित्सा कार्ड और परिधान किट प्रदान की गई। इसके साथ ही प्रदेश के विभिन्न जिलों और तहसील स्तर पर भी रसोइया सम्मान समारोह आयोजित किए गए।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछली सरकार और समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार में नकल को जन्मसिद्ध अधिकार बना दिया गया था और नकल के जरिए प्रदेश की “अक्ल नीलाम” कर दी गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था अब ‘स्केल’ से ‘स्किल’ की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार के दौरान प्रदेश में कानून-व्यवस्था और विकास के क्षेत्र में व्यापक बदलाव हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। श्रमिकों के बच्चों के लिए प्रदेश के 18 मंडलों में 18 अटल आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न स्टॉलों का भी निरीक्षण किया। बच्चों ने उन्हें अपने स्कूल में चल रही गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने बच्चों से बातचीत की और कुछ बच्चों को अपने हाथ से खीर भी खिलाई।

समारोह में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह, विधायक नीरज बोरा, विधान परिषद सदस्य अवनीश कुमार सिंह और रामचंद्र प्रधान सहित कई वरिष्ठ अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।