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बहुजन समाज पार्टी के राजनीतिक सफर में 25 नवंबर की तारीख एक बड़े बदलाव की गवाह बनने जा रही है। लोकसभा में पहले से ही BSP का कोई सांसद नहीं है और अब राज्यसभा से भी पार्टी का प्रतिनिधित्व खत्म होने जा रहा है। BSP के इकलौते राज्यसभा सांसद रामजी गौतम का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। इसके बाद संसद के दोनों सदनों में पार्टी की मौजूदगी पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
कांशीराम ने 1984 में BSP की स्थापना दलित और वंचित वर्गों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के उद्देश्य से की थी। इसके बाद पार्टी ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी मजबूत जगह बनाई और एक दौर में प्रदेश की सत्ता पर भी कब्जा किया। लेकिन पिछले एक दशक से पार्टी के चुनावी प्रदर्शन में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। 2012 के विधानसभा चुनाव में BSP को 206 के मुकाबले 80 सीटों पर सिमटना पड़ा था और इसके बाद पार्टी की विधानसभा में संख्या लगातार घटती गई।उत्तर प्रदेश विधानसभा में भी BSP का खाता बंद हो चुका है।
बलिया की रसड़ा सीट से BSP के एकमात्र विधायक उमाशंकर सिंह के निधन के बाद विधानसभा में पार्टी का कोई विधायक नहीं बचा। अब राज्यसभा में भी रामजी गौतम का कार्यकाल खत्म होने के बाद BSP के पास संसद में कोई प्रतिनिधि नहीं रहेगा।राज्यसभा की खाली हो रही 10 सीटों के लिए चुनाव आयोग ने चुनाव कार्यक्रम जारी कर दिया है। मौजूदा विधानसभा के संख्या बल के हिसाब से BSP के लिए इन चुनावों में सीट हासिल करना मुश्किल है। ऐसे में 25 नवंबर के बाद BSP का लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में प्रतिनिधित्व नहीं रहेगा।जिस पार्टी ने कभी उत्तर प्रदेश की राजनीति में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी, उसके लिए मौजूदा स्थिति राजनीतिक बदलाव के एक बड़े दौर को दिखाती है। अब BSP के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को मजबूत करने और आने वाले चुनावों में अपना खोया हुआ राजनीतिक आधार वापस हासिल करने की है।






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