दिल्ली की निचली अदालतों में सोमवार, 21 सितंबर को वकील न्यायिक कामकाज से दूर रहेंगे. दिल्ली की सभी जिला अदालतों की बार एसोसिएशन की कोऑर्डिनेशन कमिटी ने सेंट्रल…

दिल्ली की निचली अदालतों में सोमवार, 21 सितंबर को वकील न्यायिक कामकाज से दूर रहेंगे. दिल्ली की सभी जिला अदालतों की बार एसोसिएशन की कोऑर्डिनेशन कमिटी ने सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स, 1989 में किए गए बदलावों के विरोध में एक दिन काम से अलग रहने का फैसला किया है. कमिटी ने सभी बार एसोसिएशनों के सदस्यों से अपील की है कि वे सोमवार को किसी भी अदालत में व्यक्तिगत तौर पर या ऑनलाइन माध्यम से सुनवाई में शामिल न हों

कोऑर्डिनेशन कमिटी के मुताबिक, वकील सोमवार सुबह करीब 11:30 बजे अपनी-अपनी अदालतों के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन भी करेंगे. इस प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा ट्रैफिक चालान से जुड़े मामलों के निपटारे की बदली हुई व्यवस्था है. वकीलों का कहना है कि नए प्रावधानों के बाद विवादित चालानों को लेकर आम लोगों के लिए अदालत तक पहुंचने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक कठिन हो सकती है

नए नियमों के तहत चालान जारी होने के बाद संबंधित व्यक्ति को तय समय सीमा के भीतर या तो चालान की राशि जमा करनी होगी या फिर निर्धारित पोर्टल के माध्यम से उसे चुनौती देनी होगी. इसके लिए संबंधित दस्तावेज और सबूत भी जमा करने होंगे. अगर तय समय के भीतर चालान को चुनौती नहीं दी जाती है, तो उसे स्वीकार किया हुआ माना जाएगा

वकीलों की सबसे बड़ी आपत्ति उस प्रावधान को लेकर है, जिसके तहत निर्धारित प्राधिकारी के सामने चुनौती खारिज होने के बाद आगे अदालत का रुख करने के लिए चालान की 50 प्रतिशत राशि पहले जमा करनी होगी. कोऑर्डिनेशन कमिटी का कहना है कि यह शर्त उन लोगों के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है जो किसी चालान को गलत मानते हुए उसे कानूनी तौर पर चुनौती देना चाहते हैं, लेकिन बड़ी रकम पहले जमा करने की स्थिति में नहीं हैं

वकीलों ने चालान के विवादों की सुनवाई के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट की जगह एसडीएम, कार्यकारी मजिस्ट्रेट और अलग-अलग विभागों के अधिकारियों को जिम्मेदारी दिए जाने पर भी सवाल उठाया है. कमिटी का कहना है कि चालान से जुड़े विवादों का फैसला न्यायिक प्रक्रिया के तहत होना चाहिए और इसमें कार्यपालिका तथा न्यायपालिका की भूमिकाओं के बीच स्पष्ट अंतर बना रहना जरूरी है

कोऑर्डिनेशन कमिटी के मुताबिक, उसने इस मुद्दे को लेकर दिल्ली सरकार के संबंधित मंत्रियों के सामने पहले ही अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी. कमिटी का कहना है कि 27 अगस्त को सरकार को विस्तृत आपत्ति दी गई थी. इसके बाद 7 सितंबर को दिल्ली के मुख्यमंत्री और कानून मंत्री के सामने भी इस मामले को उठाया गया. कमिटी के अनुसार, कानून मंत्री के साथ हुई बैठकों में उसे आश्वासन दिया गया था कि केंद्र सरकार के साथ मामले पर चर्चा होने तक एसडीएम या अन्य विभागीय अधिकारियों को इस काम के लिए नियुक्त करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जाएगी

हालांकि, कमिटी का कहना है कि बाद में अलग-अलग विभागों के अधिकारियों को चालान के निपटारे के लिए प्राधिकारी के तौर पर अधिसूचित किया गया है. इनमें खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारी, तहसीलदार और जिला परिवहन एवं प्रवर्तन कार्यालयों से जुड़े अधिकारी शामिल बताए गए हैं

इसी घटनाक्रम के बाद 19 सितंबर को कोऑर्डिनेशन कमिटी की आपात बैठक हुई. बैठक में पूरे मामले पर चर्चा के बाद 21 सितंबर को एक दिन काम से अलग रहने का निर्णय लिया गया. कमिटी ने इसे शांतिपूर्ण विरोध बताते हुए सभी वकीलों से अनुशासन के साथ इसमें शामिल होने की अपील की है

कमिटी ने साफ किया है कि यदि उसकी आपत्तियों पर सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता है, तो आगे आंदोलन का रास्ता भी अपनाया जा सकता है. फिलहाल सोमवार को दिल्ली की निचली अदालतों में वकीलों की अनुपस्थिति और अदालतों के बाहर होने वाला प्रदर्शन इस पूरे विवाद का मुख्य केंद्र रहेगा