UP Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां तेज हो चुकी हैं. इसके साथ रोहिलखंड की राजनीति भी चर्चा के केंद्र में है. बरेली जिले की सियासी त…
UP Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां तेज हो चुकी हैं. इसके साथ रोहिलखंड की राजनीति भी चर्चा के केंद्र में है. बरेली जिले की सियासी तस्वीर खासतौर पर अहम है. यहां विधानसभा की 9 सीटें हैं और 2022 के चुनाव में भाजपा ने इनमें से 7 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि समाजवादी पार्टी को 2 सीटें मिली थीं. बरेली जिला प्रशासन के रिकॉर्ड में जिले की नौ विधानसभा सीटों में बहेड़ी, मीरगंज, भोजीपुरा, नवाबगंज, फरीदपुर, बिथरी चैनपुर, बरेली, बरेली कैंट और आंवला शामिल हैं
2027 के चुनाव में इन सीटों पर मुकाबला कई स्तरों पर देखने को मिल सकता है. भाजपा अपने 2022 के प्रदर्शन को दोहराने की कोशिश करेगी, वहीं सपा बीते चुनाव में मिली दो सीटों से आगे बढ़ने के लिए संगठन और सामाजिक समीकरणों पर जोर दे रही है. सितंबर 2026 में सपा ने प्रदेश स्तर पर 2027 की तैयारी तेज करते हुए सीटों पर जीत की क्षमता को महत्व देने की बात कही है
बरेली की नौ विधानसभा सीटों के 2022 के नतीजों पर नजर डालें तो भाजपा का दबदबा साफ दिखाई देता है. भाजपा ने मीरगंज, नवाबगंज, फरीदपुर, बिथरी चैनपुर, बरेली, बरेली कैंट और आंवला में जीत हासिल की थी. वहीं समाजवादी पार्टी ने बहेड़ी और भोजीपुरा सीट अपने नाम की थी
2022 के आंकड़े बताते हैं कि बरेली में भाजपा की सात सीटें अहम थीं, लेकिन इनमें कुछ सीटों पर जीत का अंतर अपेक्षाकृत कम रहा. यही वजह है कि 2027 में बहेड़ी, फरीदपुर, नवाबगंज और बरेली कैंट जैसी सीटों पर खास नजर रह सकती है
बहेड़ी उन दो सीटों में शामिल है जहां 2022 में सपा ने भाजपा को शिकस्त दी थी. हालांकि जीत का अंतर मात्र 3,355 वोट था. दोनों प्रमुख दलों के बीच यहां पर मुकाबला काफी करीबी रहा. 2027 में सपा के लिए यह सीट अपने कब्जे में बनाए रखने की चुनौती होगी, वहीं भाजपा इसे वापस हासिल करने के लिए पूरी ताकत लगा सकती है. इस सीट पर उम्मीदवार का चयन, स्थानीय संगठन और क्षेत्रीय मुद्दे चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकते हैं
2022 में भोजीपुरा सीट भी सपा के खाते में गई थी. शहजिल इस्लाम अंसारी ने भाजपा के बहोरन लाल मौर्य को 9,409 वोट से हराया था. यह सीट इसलिए भी अहम है क्योंकि यहां भाजपा और सपा के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला. 2027 में सपा इस सीट को अपने पास रखने की कोशिश करेगी, जबकि भाजपा 2022 की हार की भरपाई करना चाहेगी. भोजीपुरा के नतीजे बरेली जिले में दोनों दलों के प्रदर्शन की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं
फरीदपुर (एससी) सीट 2027 के लिहाज से उन सीटों में है जहां 2022 का परिणाम काफी करीबी रहा था. भाजपा के श्याम बिहारी लाल ने सपा के विजय पाल सिंह को महज 2,921 वोट से शिकस्त दी थी. इतने कम अंतर वाली सीट पर चुनावी मुकाबले में कई अहम स्थानीय मुद्दे भी असर डाल सकते हैं. भाजपा के सामने यहां अपनी बढ़त कायम रखने की चुनौती होगी. वहीं सपा के लिए बीते चुनाव की हार को पलटने का अवसर होगा
नवाबगंज में 2022 में भाजपा और सपा के बीच अहम मुकाबला था. भाजपा के एमपी आर्य गंगवार ने सपा के भगवत सरन गंगवार को 9,237 वोट से हराया था. भाजपा को करीब 48.20 फीसदी वोट मिले थे, वहीं सपा का वोट प्रतिशत करीब 44.20 फीसदी रहा था
इस सीट पर दोनों दलों के बीच वोटों का अंतर काफी बड़ा नहीं था. इसलिए 2027 में नवाबगंज उन विधानसभा क्षेत्रों में शामिल हो सकती है, जहां उम्मीदवार और स्थानीय समीकरण चुनाव पर असर कर सकता है
बरेली विधानसभा सीट भाजपा के लिए जिले की सबसे अहम सीटों में एक रही है. 2022 में डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने सपा के राजेश कुमार अग्रवाल राजेश कुमार अग्रवाल को 32,320 वोटों से हराया था. भाजपा को 53.77 फीसदी वोट मिले थे. हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में बरेली विधानसभा क्षेत्र में भाजपा और सपा के बीच अंतर कम हुआ. उपलब्ध आंकड़ों के तहत बरेली विधानसभा से भाजपा को 1,24,129 और सपा को 1,05,900 वोट मिले, यानी अंतर 18,229 वोट रहा
बरेली कैंट सीट पर 2022 में भाजपा के संजीव अग्रवाल ने सपा की सुप्रिया ऐरन को 10,768 वोट से हराया. भाजपा को करीब 50.4 फीसदी और सपा को करीब 44.9 फीसदी वोट मिले थे. यह सीट भी उन क्षेत्रों में है जहां दोनों प्रमुख दलों के बीच मुकाबला सीधे तौर पर दिखाई देता है. 2027 में यहां उम्मीदवारों की छवि, स्थानीय मुद्दे और संगठन की सक्रियता महत्वपूर्ण हो सकती है
मीरगंज में 2022 में भाजपा के डीसी वर्मा ने सपा के सुल्तान बेग को 32,840 वोट से मात दी थी. वहीं बिथरी चैनपुर में भाजपा के राघवेंद्र शर्मा ने सपा के अगम मौर्य को 15,841 वोट से हराया था. इन दोनों सीटों पर भाजपा ने मजबूत अंतर से जीत दर्ज की. ऐसे में 2027 में विपक्ष के सामने संगठन और वोट आधार को मजबूत करने की चुनौती होगी
आंवला विधानसभा सीट पर 2022 में भाजपा ने जीत हासिल की थी. जिले के नौ विधानसभा क्षेत्रों में यह सीट अलग राजनीतिक महत्व रखती है. बरेली लोकसभा क्षेत्र और आंवला लोकसभा क्षेत्र की राजनीतिक सीमाएं अलग-अलग विधानसभा सीटों पर असर डालती हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव में बरेली संसदीय सीट पर भाजपा के छत्रपाल सिंह गंगवार ने सपा के प्रवीण सिंह ऐरन को 34,804 वोट से मात दी. यह परिणाम जिले की विधानसभा सीटों के लिए सीधे तौर पर 2027 का अनुमान नहीं देता. मगर यह बताता है कि बरेली क्षेत्र में भाजपा और सपा के बीच मुकाबला लोकसभा स्तर पर काफी अहम रहा है
बरेली की चुनावी राजनीति में 2027 के दौरान स्थानीय विकास, रोजगार, सड़क और बुनियादी सुविधाएं, कानून-व्यवस्था, व्यापार, किसानों से जुड़े सवाल शहरी इलाकों की समस्याएं काफी अहम होंगी. इसके साथ ही प्रदेश पर भाजपा सरकार का प्रदर्शन और विपक्ष की ओर से उठाए मुद्दे भी स्थानीय चुनावी विमर्श पर असर डालेंगे. सपा ने 2027 की तैयारियों में संगठन को मजबूत करने को लेकर पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक समीकरण पर खास जोर देने के लिए अभियान छेड़ा है. भाजपा के सामने अपने मौजूदा संगठनात्मक आधार और 2022 में मिली बढ़त को बनाए रखने की चुनौती है
बरेली में 2027 की लड़ाई को सिर्फ भाजपा बनाम सपा के सामान्य मुकाबले के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा. बहेड़ी और भोजीपुरा में सपा के सामने अपनी सीटें बचाने की लड़ाई अहम होगी. वहीं फरीदपुर और नवाबगंज जैसे करीबी मुकाबले वाले क्षेत्रों में भाजपा की बढ़त पर नजर रहेगी. बरेली शहर और कैंट शहरी राजनीति की दिशा बताएंगे. वहीं मीरगंज, बिथरी चैनपुर और आंवला में भाजपा के मौजूदा आधार की परीक्षा होगी






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