मुख्यमंत्री ने विशेष अदालतों में लंबित जांचों और मामलों की समयबद्ध समीक्षा के निर्देश दिए

देहरादून, सितंबर 2026 : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि अत्याचार से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति को समय पर न्याय, सुरक्षा, सम्मान और सभी उचित सहायता मिले। उन्होंने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के कार्यान्वयन में अधिक संवेदनशीलता, जवाबदेही और प्रभावशीलता का भी आह्वान किया।

मुख्यमंत्री सचिवालय में अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए गठित राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि समिति की बैठकें औपचारिक समीक्षा तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए और यह सुनिश्चित करने के लिए ठोस कार्रवाई होनी चाहिए कि पीड़ितों को बिना किसी देरी के न्याय और सहायता मिले।

धामी ने 2024 से अधिनियम के तहत पंजीकृत मामलों की समीक्षा की जिनमें जांच अभी भी लंबित है और अधिकारियों को देरी के कारणों की जांच करने और प्राथमिकता के आधार पर उनका समयबद्ध निपटान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि पुराने एवं गंभीर मामलों में पुलिस, प्रशासन एवं अभियोजन विभाग आपस में समन्वय बनाकर प्रभावी कार्रवाई करें

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को विशेष अदालतों में लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करने का भी निर्देश दिया. उन्होंने पुराने मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए पुलिस और अभियोजन विभाग के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। जहां आवश्यक हो, अदालतों के समक्ष प्रभावी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए विशेष लोक अभियोजक उपलब्ध कराए जाने चाहिए

धामी ने कहा कि पीड़ितों को अनुमन्य राहत के भुगतान में देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि जिन मामलों में राहत भुगतान में देरी हुई है, उनकी अलग से समीक्षा की जानी चाहिए

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रभावित परिवारों को सहायता केवल वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं होनी चाहिए। परिवारों को उनकी जरूरतों के आधार पर चिकित्सा देखभाल, शिक्षा, सुरक्षा, पुनर्वास और अन्य पात्र सरकारी योजनाओं से भी जोड़ा जाना चाहिए

गंभीर एवं संवेदनशील मामलों में पीड़ितों एवं उनके परिवारों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि किसी घटना के कारण प्रभावित परिवारों के बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो। पात्र बच्चों को छात्रवृत्ति एवं अन्य शैक्षणिक सहायता योजनाओं से जोड़ा जाये

बैठक में प्रभावित परिवारों की काउंसलिंग, चिकित्सा सहायता, सुरक्षा और सामाजिक एवं आर्थिक पुनर्वास की व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। धामी ने निर्देश दिया कि प्रत्येक जिले में अधिनियम के तहत मामलों की नियमित निगरानी के लिए वरिष्ठ स्तर पर जवाबदेही तय की जाए