उत्तर प्रदेश की सियासत में पीडीए की राजनीति को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर जोरदार हमला बोला है। प्रदेश सरकार…

उत्तर प्रदेश की सियासत में पीडीए की राजनीति को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर जोरदार हमला बोला है। प्रदेश सरकार के मंत्री धर्मपाल सिंह ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव बिरादरी की राजनीति के सहारे मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं, लेकिन अब यह सपना पूरा होने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनावी फायदे के लिए सपा लगातार पीडीए की परिभाषा बदलती रहती है।

मंत्री धर्मपाल सिंह ने पीडीए की राजनीतिक व्याख्या करते हुए कहा कि ‘पी’ का मतलब पहली बार 2017 में पीडीए ने भाजपा को प्रचंड बहुमत दिया, ‘डी’ यानी दूसरी बार 2022 में भी पीडीए ने भाजपा को सत्ता सौंपी और ‘ए’ यानी अगली बार 2027 में भी पीडीए प्रचंड बहुमत के साथ भाजपा की सरकार बनाएगा। धर्मपाल सिंह ने दावा किया कि प्रदेश की जनता भाजपा सरकार के विकास कार्यों और कानून-व्यवस्था को देख रही है। उन्होंने कहा कि जातीय समीकरणों के सहारे सत्ता हासिल करने की राजनीति अब सफल नहीं होगी।

राज्यसभा सांसद और भाजपा नेता बृजलाल ने भी अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि योगी सरकार में युवाओं को मिल रही सरकारी नौकरियों और रोजगार के अवसरों को लेकर अखिलेश यादव असहज हैं। बृजलाल ने सपा शासनकाल में पुलिस भर्ती और यूपी पीएससी की परीक्षाओं को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों के दौरान भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आती रही हैं।

मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (जेपीएनआईसी) के मुद्दे पर अखिलेश यादव को घेरा। उन्होंने दावा किया कि करीब 200 करोड़ रुपये की परियोजना की लागत बढ़कर 865 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, लेकिन इसके बावजूद काम पूरा नहीं हुआ। राजभर के मुताबिक, सरकार ने संबंधित ट्रस्ट को भंग कर जेपीएनआईसी को एलडीए के अधीन किया और अब इसे पीपीपी मॉडल पर 30 साल की लीज पर दिए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। उन्होंने अंकित बालियान हत्याकांड को लेकर अखिलेश यादव की राजनीति पर भी सवाल उठाए।

कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद ने भी अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता में रहते हुए सपा को कुछ जातियां ही दिखाई देती हैं, जबकि सत्ता से बाहर होने के बाद पार्टी सभी वर्गों को साधने की कोशिश करती है। उन्होंने जेपीएनआईसी से जुड़े आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि संबंधित प्राधिकरण संवैधानिक संस्था है और उसके अधीन ही काम किया जा रहा है।

राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि अखिलेश यादव को योगी सरकार का हर काम खराब नजर आता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा जातिगत विद्वेष की राजनीति को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है। भाजपा नेता संगीत सोम ने भी जेपीएनआईसी विवाद को लेकर अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी धन से बनी इमारत को निजी संपत्ति के तौर पर पेश करने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल, 2027 विधानसभा चुनाव से पहले यूपी की राजनीति में पीडीए, जातीय समीकरण और विकास के मुद्दों को लेकर भाजपा और सपा के बीच जुबानी जंग तेज होती दिखाई दे रही है। आने वाले समय में इन मुद्दों का चुनावी राजनीति पर कितना असर पड़ता है, यह देखने वाली बात होगी।