अधिकारियों की सोशल मीडिया आजादी पर लगेगी लगाम! सरकार ला रही सोशल मीडिया आचार संहिता -

सोशल मीडिया के दौर में अब सरकारी अधिकारियों की ऑनलाइन सक्रियता भी सरकार की निगरानी के दायरे में आ सकती है। अधिकारियों के बीच बढ़ते रील्स, वीडियो, स्टोरी और निजी राय पोस्ट करने के चलन को देखते हुए सरकार ‘सोशल मीडिया आचार संहिता’ लाने की तैयारी कर रही है।दरअसल, अधिकारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट और अलग नियमों की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है। मौजूदा आचरण नियम उस दौर में बनाए गए थे, जब सोशल मीडिया जैसी डिजिटल दुनिया अस्तित्व में नहीं थी।
ऐसे में सरकारी ड्यूटी के दौरान सोशल मीडिया के इस्तेमाल, निजी पोस्ट और पद से जुड़े प्रचार को लेकर कोई स्पष्ट सोशल मीडिया कोड मौजूद नहीं है।बताया जा रहा है कि अधिकारियों के बीच सोशल मीडिया का क्रेज तेजी से बढ़ा है। ड्यूटी के दौरान रील्स देखने, वीडियो शेयर करने और सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। यही वजह है कि सरकार अब अधिकारियों के सोशल मीडिया व्यवहार को लेकर एक स्पष्ट आचार संहिता तैयार करने पर विचार कर रही है।इस प्रस्ताव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वरिष्ठ नौकरशाहों के साथ बातचीत में सोशल मीडिया कोड लाने की संभावना पर विचार करने का निर्देश दिया है। कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन की ओर से सचिवों को भेजे गए संदेश में बैठक के प्रमुख बिंदुओं का भी उल्लेख किया गया है।
मामला सिर्फ सोशल मीडिया के इस्तेमाल तक सीमित नहीं है। सरकारी अधिकारियों की ओर से कई बार सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने काम, उपलब्धियों और पद का महिमामंडन करने पर भी सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में प्रस्तावित सोशल मीडिया आचार संहिता का मकसद सरकारी सेवा की गरिमा, निष्पक्षता और जिम्मेदारी को बनाए रखना भी हो सकता है।इसी बीच सरकार नागरिकों को सरकारी सेवाओं तक आसान पहुंच देने के लिए ‘एक भारत’ पोर्टल शुरू करने पर भी विचार कर रही है। फिलहाल अलग-अलग सरकारी सेवाओं के लिए नागरिकों को अलग-अलग वेबसाइटों पर जाना पड़ता है और कई जगह अलग यूजरनेम-पासवर्ड की जरूरत होती है।
प्रस्तावित ‘एक भारत’ पोर्टल के जरिए नागरिकों को अलग-अलग सरकारी सेवाओं तक एक ही यूजरनेम और पासवर्ड के माध्यम से पहुंच देने की योजना पर काम चल रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, संबंधित विभागों के बीच इसको लेकर कई दौर की बैठकें भी हो चुकी हैं।यानी एक तरफ सरकार डिजिटल सेवाओं को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की तैयारी कर रही है, तो दूसरी तरफ सरकारी तंत्र के भीतर सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर भी नियम तय करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।सवाल सिर्फ यह नहीं कि अधिकारी सोशल मीडिया पर कितना समय बिताते हैं।
बड़ा सवाल यह है कि सरकारी पद की गरिमा और निजी सोशल मीडिया गतिविधियों के बीच सीमा आखिर कहां तय हो?इसी सीमा को स्पष्ट करने के लिए प्रस्तावित सोशल मीडिया आचार संहिता आने वाले समय में सरकारी अधिकारियों के ऑनलाइन व्यवहार के लिए एक नया नियम-कायदा तय कर सकती है।
स्रोत: Filmitics
