मामला खाद्य सुरक्षा विभाग के विशेष निरीक्षण के दौरान सामने आया
पैकिंग तिथि को निर्माण तिथि अंकित करने की प्रथा पर रोक
उपभोक्ताओं को अब खाद्य उत्पाद की वास्तविक उम्र और शेल्फ लाइफ के बारे में सही जानकारी मिलेगी
खाद्य श्रृंखला में पुराने या निम्न गुणवत्ता वाले उत्पादों के उपयोग की संभावना को कम करने में मदद मिलेगी
लखनऊ, सितम्बर 2026: खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा उपभोक्ताओं को सही एवं पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने डिब्बाबंद खाद्य उत्पादों के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किये हैं। विभाग ने अब उत्तर प्रदेश की भौगोलिक सीमा के भीतर पैक किए जाने वाले खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग पर वास्तविक निर्माण तिथि अंकित करना अनिवार्य कर दिया है। निर्माण की तारीख के स्थान पर पैकिंग की तारीख अंकित नहीं की जा सकती
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के आयुक्त द्वारा लिया गया यह निर्णय हाल ही में खाद्य निर्माण इकाइयों के विशेष निरीक्षण के दौरान तथ्य सामने आने के बाद लिया गया है। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कुछ निर्माता किसी खाद्य पदार्थ का उत्पादन करने के बाद उसे लंबे समय तक भंडारण कर रहे थे। बाद में, जब उसी खाद्य पदार्थ को छोटे-छोटे पैकेटों में पैक किया जाता है, तो पैकेज पर उत्पादन की वास्तविक तारीख अंकित करने के बजाय, जिस तारीख को इसे पैक किया गया है, वह अंकित की जाती है।
इसी तरह, कुछ मामलों में रीलेबलर्स और रीपैकर्स भी केवल पैकिंग की तारीख ही अंकित कर रहे थे। ऐसी स्थिति में उपभोक्ता को यह जानकारी नहीं मिल पाती है कि संबंधित खाद्य पदार्थ वास्तव में कब निर्मित या संसाधित हुआ था। इससे उपभोक्ता के लिए उत्पाद की वास्तविक भंडारण अवधि और उसकी गुणवत्ता के संबंध में भ्रम पैदा हो सकता है
किसी भी खाद्य पदार्थ की शेल्फ लाइफ उसके निर्माण की तारीख से ही शुरू हो जाती है
किसी खाद्य पदार्थ के उपयोग की एक निश्चित अवधि होती है जिसे शेल्फ लाइफ भी कहा जाता है। यह अवधि खाद्य पदार्थ के वास्तविक निर्माण या प्रसंस्करण की तारीख से शुरू होती है। समय बीतने के साथ खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता में गिरावट आ सकती है। ऐसी स्थिति में, यदि किसी पुराने उत्पाद को कई महीनों बाद छोटे पैकेटों में पैक किया जाता है और उस दिन की पैकिंग तिथि को प्राथमिक तिथि के रूप में प्रदर्शित किया जाता है, तो उपभोक्ता को यह आभास हो सकता है कि उत्पाद अपेक्षाकृत ताजा है।






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