4…
4 उत्तराखंड की राजनीति में टिहरी विधानसभा सीट ऐसी सीटों में गिनी जाती है, जहां चुनावी मुकाबला कई बार बेहद करीबी रहा है। यहां पार्टी के साथ-साथ उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़, स्थानीय समीकरण और क्षेत्रीय मुद्दे भी चुनावी परिणाम को प्रभावित करते रहे हैं। कभी निर्दलीय उम्मीदवार ने कांग्रेस के दिग्गज नेता को शिकस्त दी, तो कभी बीजेपी ने सीट पर कब्जा जमाया। 2022 में भी मुकाबला महज 951 वोटों के अंतर से तय हुआ। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर टिहरी का सियासी गणित एक बार फिर चर्चा में है।
टिहरी विधानसभा सीट के पिछले चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो 2012 का चुनाव बेहद अहम रहा। इस चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार दिनेश धनै ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता किशोर उपाध्याय को महज 377 वोटों से हराकर बड़ा उलटफेर किया था। दिनेश धनै को 12,026 वोट मिले, जबकि किशोर उपाध्याय को 11,649 वोट हासिल हुए। बीजेपी के धन सिंह नेगी तीसरे स्थान पर रहे।इस नतीजे ने साफ कर दिया था कि टिहरी में किसी एक पार्टी की पकड़ को चुनावी जीत की गारंटी नहीं माना जा सकता।
2017 के विधानसभा चुनाव में टिहरी की तस्वीर पूरी तरह बदल गई। बीजेपी के धन सिंह नेगी ने निर्दलीय दिनेश धनै को 6,840 वोटों के अंतर से हराकर सीट पर कब्जाकिया। धन सिंह नेगी को 20,896 वोट मिले, जबकि दिनेश धनै के खाते में 14,056 वोट आए।इस चुनाव में बीजेपी की बढ़त ने टिहरी में पार्टी के मजबूत संगठन और चुनावी रणनीति को सामने रखा। लेकिन अगले चुनाव में एक बार फिर मुकाबला काफी करीबी हो गया।
2022 के चुनाव से पहले टिहरी की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय बीजेपी में शामिल हुए और बीजेपी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे। उनके सामने एक बार फिर निर्दलीय दिनेश धनै थे।मुकाबले में किशोर उपाध्याय को 19,802 वोट मिले, जबकि दिनेश धनै ने 18,851 वोट हासिल किए। इस तरह किशोर उपाध्याय ने महज 951 वोटों के अंतर से चुनाव जीत लिया।यानी 2012 में 377 वोट और 2022 में 951 वोट—दोनों चुनाव बताते हैं कि टिहरी में छोटे वोट अंतर भी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
टिहरी सामान्य विधानसभा सीट है और यहां राजपूत-ठाकुर तथा ब्राह्मण मतदाताओं की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है। अनुसूचित जाति मतदाता भी चुनावी समीकरण का अहम हिस्सा हैं। हालांकि जातीय समीकरणों के साथ पहाड़ी क्षेत्रों से जुड़े स्थानीय मुद्दे भी चुनावी बहस को प्रभावित कर सकते हैं।
पलायन, रोजगार, सड़क और परिवहन, स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा, पर्यटन और स्थानीय स्तर पर विकास जैसे मुद्दे 2027 में राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
2027 में बीजेपी के सामने मौजूदा विधायक किशोर उपाध्याय की राजनीतिक पकड़ को बनाए रखने की चुनौती होगी। कांग्रेस के लिए मजबूत संगठन और प्रभावी स्थानीय चेहरे का सवाल अहम रहेगा। वहीं दिनेश धनै लगातार चुनावी मुकाबलों में मौजूद रहे हैं और टिहरी की राजनीति में उनका नाम एक महत्वपूर्ण स्थानीय चेहरा माना जाता है।
फिलहाल टिहरी का इतिहास यही संकेत देता है कि यहां चुनावी मुकाबला केवल पार्टी के नाम से तय नहीं होता। 377 वोटों से लेकर 951 वोटों तक के अंतर ने पिछले चुनावों में पूरी तस्वीर बदल दी। अब 2027 में देखना होगा कि टिहरी में सियासी बाजी पार्टी के संगठन के नाम रहती है, उम्मीदवार के चेहरे पर टिकती है या फिर पहाड़ के स्थानीय मुद्दे चुनावी गणित को नई दिशा देते हैं।
रश्मि सिंह एक अनुभवी पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें हिंदी पत्रकारिता, न्यूज़ रिपोर्टिंग और डिजिटल मीडिया का व्यापक अनुभव है। उन्होंने मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है और अपने पत्रकारिता करियर में कई बड़े मीडिया संस्थानों और न्यूज़ चैनलों के साथ काम किया है।राजनीति, जनसरोकार, उत्तर प्रदेश की सियासत और समसामयिक मुद्दों पर उनकी विशेष पकड़ है। खबरों को सरल, तथ्यपरक और पाठकों के लिए रोचक अंदाज में प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है। डिजिटल पत्रकारिता के बदलते दौर में रश्मि सिंह का प्रयास है कि पाठकों तक तेज, विश्वसनीय और आसान भाषा में तथ्य आधारित खबरें पहुंचें।
Forgot your password? Get help






टिप्पणियाँ 0