उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले मे नारायणी गंडक इस बार फिर कहर बनकर उतरी है। दो दिन की मूसलाधार बारिश और नेपाल के देवघाट बैराज से करीब 5.91 लाख क्यूसेक तथा वाल्मी…

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले मे नारायणी गंडक इस बार फिर कहर बनकर उतरी है। दो दिन की मूसलाधार बारिश और नेपाल के देवघाट बैराज से करीब 5.91 लाख क्यूसेक तथा वाल्मीकिनगर बैराज से 4.16 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद नदी उफान पर है

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उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले मे नारायणी गंडक इस बार फिर कहर बनकर उतरी है। दो दिन की मूसलाधार बारिश और नेपाल के देवघाट बैराज से करीब 5.91 लाख क्यूसेक तथा वाल्मीकिनगर बैराज से 4.16 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद नदी उफान पर है। सालिकपुर, महादेवा, मारिचहवा, शिवपुर, नारायणपुर और गोपालपुर समेत एक दर्जन गांव जलमग्न हैं। घरों में पानी घुसने के बाद लोग बच्चों, बुजुर्गों और मवेशियों के साथ एनएच-27बी किनारे बने राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं

सालिकपुर और महादेवा में पंचायत भवन से लेकर जूनियर हाई स्कूल तक पानी से घिर गए हैं। गलियां नदी का हिस्सा बन चुकी हैं। कई परिवार अब भी कमर तक पानी में डूबे घरों की चौखट छोड़ने को तैयार नहीं हैं। महिलाएं जरूरी सामान सिर पर रखकर निकल रही हैं, जबकि बुजुर्ग लाठी के सहारे सुरक्षित ठिकाने तक पहुंच रहे हैं। बच्चों की चहल-पहल की जगह नावों की आवाज सुनाई दे रही है

पानी में डूब गई किसानों की महीनों की मेहनत

खेतों में लहलहाती धान और गन्ने की फसल पानी में समा गई है। किसानों का कहना है कि महीनों की मेहनत कुछ घंटों में बह गई। पशुओं के चारे की भी भारी किल्लत हो गई है। कई परिवार ट्रैक्टर-ट्रालियों और सड़क किनारे ऊंचे स्थानों पर रात गुजार रहे हैं। हर किसी की नजर अब घटते पानी और सरकारी मदद पर टिकी है

हर कदम पर खतरा, सांपों ने बढ़ाई दहशत

बाढ़ प्रभावित इलाकों में हर पल जिंदगी से जंग चल रही है। कोई मां बच्चे को गोद में उठाकर पानी पार कर रही है तो कोई युवक सिर पर राशन रखकर घर बचाने की कोशिश कर रहा है। हैंडपंप डूबने से पेयजल संकट गहरा गया है। पानी बढ़ने के साथ जहरीले सांपों का खतरा भी बढ़ गया है। ग्रामीणों के चेहरे पर सिर्फ एक सवाल है यह की परीक्षा आखिर कब खत्म होगी

नाव से पहुंचे अफसर, राहत शिविरों में बांटा जा रहा भोजन

प्रशासन ने राहत शिविरों में भोजन, दवा और स्वास्थ्य सेवाएं शुरू कर दी हैं। खड्डा के उपजिलाधिकारी डा. संतराज सिंह और विधायक विवेकानंद पांडेय नाव से गांव-गांव पहुंचकर हालात का जायजा ले रहे हैं। स्वास्थ्य टीमें बीमारियों पर नजर बनाए हुए हैं। जिलाधिकारी संजय चौहान ने अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने और हर जरूरतमंद तक सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए हैं

राहत से ज्यादा स्थायी समाधान की मांग

बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि हर साल गंडक उनके सपनों, घरों और फसलों को बहा ले जाती है। उनका दर्द यही है कि राहत सामग्री कुछ दिन का सहारा बन सकती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं। ग्रामीण मजबूत तटबंध और बेहतर बाढ़ प्रबंधन की मांग कर रहे हैं, ताकि अगली बारिश में किसी मां को अपने बच्चे को कंधे पर बैठाकर घर छोड़ने की मजबूरी न झेलनी पड़े। अभी भी कई गांवों में लोग पानी घटने की आस में खुले आसमान के नीचे इंतजार कर रहे हैं