30 हजार शीशियां बरामद, यूपी और मध्य प्रदेश के कई जिलों में सप्लाई की थी योजना; फर्जी जीएसटी बिलों के जरिए चल रहा था कारोबार
लखनऊ । उत्तर प्रदेश में अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत यूपी एसटीएफ को बड़ी सफलता मिली है। एसटीएफ की फील्ड यूनिट प्रयागराज ने बांदा जिले में कार्रवाई करते हुए अवैध कोडीन कफ सिरप की बड़ी खेप बरामद की है। बरामद सिरप की करीब 30 हजार शीशियों की अनुमानित कीमत लगभग 3 करोड़ रुपये बताई गई है।एसटीएफ ने मौके से अंतरराज्यीय गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से कोडीन कफ सिरप के अलावा दो वाहन भी बरामद किए गए हैं। पूछताछ में सामने आया है कि गिरोह दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ से सिरप की खेप लाकर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में इसकी अवैध सप्लाई करता था।
बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे पर एसटीएफ ने घेराबंदी कर पकड़ा
एसटीएफ को सूचना मिली थी कि एक अंतरराज्यीय गिरोह डीसीएम के जरिए अवैध कोडीन कफ सिरप की खेप लेकर बांदा की ओर जा रहा है। सूचना के आधार पर एसटीएफ फील्ड यूनिट प्रयागराज की टीम ने बांदा में निगरानी शुरू की।इसी दौरान टीम को जानकारी मिली कि डीसीएम बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के रास्ते बिसंडा बाईपास से अतर्रा की ओर जाने वाला है। टीम ने बिसंडा-अतर्रा मार्ग पर बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के उत्तरी गोल चौराहे के पास घेराबंदी की।पुलिस टीम ने डीसीएम के आगे चल रही लाल रंग की टाटा नेक्सॉन कार और डीसीएम को रोककर तलाशी ली। तलाशी के दौरान दोनों वाहनों से भारी मात्रा में अवैध कोडीन कफ सिरप बरामद हुआ। मौके से चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
एसटीएफ के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बांदा निवासी धीरेन्द्र कुमार, अतर्रा निवासी प्रवीण कुमार उर्फ लकी, रोहित पांडेय और हापुड़ निवासी शेखर सिंह के रूप में हुई है।पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि उनका एक सक्रिय गिरोह है, जो कोडीन कफ सिरप की अवैध तस्करी और सप्लाई में शामिल है।
मेडिकल स्टोर की जगह नशे के कारोबार में होती थी सप्लाई
जांच में सामने आया कि गिरोह दिल्ली के द्वारका स्थित एक फार्मा प्रतिष्ठान से कोडीन कफ सिरप की खेप लेकर आता था। इसके बाद बांदा, अतर्रा, चित्रकूट और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में इसकी सप्लाई की जाती थी।एसटीएफ के अनुसार, सिरप को मेडिकल स्टोर की सामान्य बिक्री के बजाय नशे के कारोबार से जुड़े लोगों तक पहुंचाया जाता था। गिरोह द्वारा रैपर बदलकर इसे अधिक कीमत पर बेचने की बात भी पूछताछ में सामने आई है।
खेप पहुंचाने वाले चालक को मिलता था 25 हजार रुपये का इनाम
गिरोह में वाहन चालकों की भी अहम भूमिका बताई गई है। पूछताछ के मुताबिक, सिरप की खेप को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के एवज में वाहन चालक को 25 हजार रुपये तक का अलग से इनाम दिया जाता था।अवैध बिक्री से होने वाले मुनाफे को गिरोह के सदस्य आपस में बांट लेते थे।
फर्जी जीएसटी बिलों की आड़ में चल रहा था कारोबार
एसटीएफ की जांच में अवैध कारोबार से जुड़े दस्तावेजों में भी फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। आरोपियों के अनुसार, कोडीन कफ सिरप की सप्लाई और बिक्री से संबंधित जीएसटी इनवॉइस और बिलों को हमीरपुर स्थित एक मेडिकल एजेंसी के नाम से तैयार किया जाता था।जांच में ऐसी फर्म के इस्तेमाल की बात सामने आई है, जिसे वाणिज्य कर विभाग द्वारा निष्प्रयोज्य/बोगस घोषित किया जा चुका है। आरोप है कि इन्हीं दस्तावेजों की आड़ में कोडीन कफ सिरप की अवैध सप्लाई को वैध कारोबार दिखाने का प्रयास किया जाता था।
दिल्ली से यूपी और मध्य प्रदेश तक फैला था नेटवर्क
एसटीएफ की कार्रवाई से अवैध कोडीन कफ सिरप की तस्करी से जुड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का पता चला है। प्रारंभिक जांच के अनुसार गिरोह का नेटवर्क दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई जिलों तक फैला हुआ था।एसटीएफ अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों, सप्लायरों और अवैध कारोबार में इस्तेमाल किए जा रहे नेटवर्क की भी जांच कर रही है।





