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9 UP Cabinet Approves ₹1,725 Crore Skill Development Plan to Build a Global Manpower Hub.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में ‘सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार क्षेत्र विकास योजना’ को मंजूरी प्रदान की गई। इस योजना का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को ‘अल्टीमेट सोर्सिंग हब ऑफ स्किल्ड मैनपावर’ और ‘ग्लोबल मैनपावर हब’ के रूप में विकसित करना है। इसके तहत प्रदेश के सभी 75 जनपदों को शामिल करते हुए नौ जोन में कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार का एकीकृत तंत्र तैयार किया जाएगा।

योजना के माध्यम से युवाओं को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित करने और उन्हें देश-विदेश में उपलब्ध रोजगार के अवसरों से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा। इसके लिए कौशल विकास, प्रशिक्षण, सेवायोजन और उद्योगों की मानव संसाधन संबंधी जरूरतों के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र की अहम भूमिका है। प्रदेश में लगभग 96 लाख एमएसएमई उद्यम हैं, जो देश के कुल लगभग 6.77 करोड़ उद्यमों का 14.2 प्रतिशत हैं। औद्योगिक उत्पादन में इस क्षेत्र का योगदान लगभग 60 प्रतिशत और निर्यात में करीब 45 प्रतिशत बताया गया है। इस क्षेत्र में तीन करोड़ से अधिक लोग कार्यरत हैं।

उद्योगों की बढ़ती जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराने के लिए यह योजना लागू की जाएगी। इसके माध्यम से युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण देकर उनकी रोजगार क्षमता बढ़ाने और उद्योगों की कुशल कार्यबल संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में काम किया जाएगा।

योजना के पहले चरण में पांच प्रमुख स्थानों पर कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों का विकास संबंधित विभागों, औद्योगिक विकास प्राधिकरणों और सार्वजनिक-निजी सहभागिता (पीपीपी) मॉडल के माध्यम से किया जाएगा।

इन केंद्रों के माध्यम से स्थानीय औद्योगिक गतिविधियों, बाजार की मांग और रोजगार की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण की व्यवस्था विकसित की जाएगी।

प्रदेश के सभी 75 जनपदों को नौ जोन में विभाजित कर हब एवं स्पोक मॉडल पर एकीकृत कौशल विकास एवं रोजगार तंत्र स्थापित किया जाएगा। जोनवार व्यवस्था के तहत स्थानीय उद्योगों और बाजार की आवश्यकताओं का आकलन कर प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए जाएंगे।

योजना में जोन का प्रस्तावित विभाजन इस प्रकार है:

इस व्यवस्था से विभिन्न उद्योगों, बाजार क्षेत्रों और विभागों की मानव संसाधन संबंधी जरूरतों का आकलन कर रोजगार के अवसरों के सृजन में मदद मिलेगी।

प्रत्येक केंद्र की स्थापना के लिए 10 से 25 एकड़ तक की उपयुक्त और भारमुक्त भूमि की व्यवस्था की जाएगी। केंद्रों तक आवागमन सुगम बनाने के लिए निकटवर्ती राजमार्ग या एक्सप्रेसवे से दो वर्ष के भीतर चार लेन की सड़क संपर्क सुविधा उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है।

केंद्रों का विकास एवं संचालन सार्वजनिक-निजी सहभागिता आधारित डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, संचालन एवं हस्तांतरण (डीबीएफओटी) मॉडल अथवा शासकीय संस्थाओं के माध्यम से किया जाएगा।

योजना के अंतर्गत अलग-अलग शैक्षिक पृष्ठभूमि वाले युवाओं के लिए आवश्यकता आधारित प्रशिक्षण की व्यवस्था होगी। मानविकी और वाणिज्य जैसे गैर-तकनीकी विषयों से जुड़े युवाओं को आधारभूत कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। वहीं, आईटीआई, पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग की पृष्ठभूमि वाले युवाओं को तकनीकी कौशल उन्नयन का अवसर मिलेगा।

देश के अन्य राज्यों और विदेशों में उपलब्ध रोजगार अवसरों के अनुरूप भारतीय एवं विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा। प्रशिक्षणार्थियों के लिए छात्रावास, परिसर में सेवायोजन कार्यालय और प्लेसमेंट सेल की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही देश-विदेश में नियोजन के क्षेत्र में कार्यरत मान्यता प्राप्त एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

योजना के तहत आगामी तीन वर्षों में कुल 1,725 करोड़ रुपये व्यय होने का अनुमान है। निजी विकासकर्ताओं और प्रशिक्षण प्रदाताओं को आवश्यकता के अनुसार वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा सकेगी।

योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य, जिला और परियोजना स्तर पर समन्वय एवं निगरानी की व्यवस्था की गई है। इसके तहत केंद्रों की स्थापना, संचालन, वित्तीय प्रबंधन, प्रशिक्षण की गुणवत्ता और रोजगार संबंधी गतिविधियों की निगरानी की जाएगी।

इसके अतिरिक्त, कौशल प्रशिक्षण और सेवायोजन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए डिजिटल डैशबोर्ड, डेटा विश्लेषण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित तकनीकी सुविधाओं का उपयोग किया जाएगा। इस उद्देश्य से उपयुक्त प्रौद्योगिकी भागीदार के चयन का भी प्रावधान किया गया है।

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