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Delhi-NCR Pollution: CM योगी और भूपेंद्र यादव की बैठक, यूपी के 8 शहरों में प्रदूषण नियंत्रण पर मंथन -

🕐 18 Sep 2026, 02:50 pm• 3 min padho • Chugal Khor News
Delhi-NCR Pollution: CM योगी और भूपेंद्र यादव की बैठक, यूपी के 8 शहरों में प्रदूषण नियंत्रण पर मंथन -

लखनऊ: दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश से सटे जिलों में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश में किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की सह-अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों और आगे की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक में खासतौर पर वाहनों से होने वाला प्रदूषण, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, ठोस कचरा प्रबंधन और निर्माण एवं विध्वंस (C&D) वेस्ट जैसे मुद्दों की समीक्षा की गई। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की चुनौती को देखते हुए यूपी के एनसीआर वाले हिस्से में प्रभावी नियंत्रण उपायों पर जोर दिया गया।

बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की ओर से उत्तर प्रदेश में किए जा रहे वृक्षारोपण प्रयासों का उल्लेख किया गया। प्रदेश में निर्धारित वृक्षारोपण लक्ष्यों को हासिल करने और ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत बड़े पैमाने पर पौधरोपण किए जाने की जानकारी दी गई।

उत्तर प्रदेश में पिछले वर्षों में बड़े स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाए गए हैं। वर्ष 2025 में ‘एक पेड़ मां के नाम 2.0’ अभियान के तहत प्रदेश में 37.21 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जाने की जानकारी सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है।

वायु प्रदूषण नियंत्रण को लेकर राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत किए जाने वाले सर्वे में लखनऊ के प्रदर्शन का भी उल्लेख किया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में लखनऊ 130 शहरों में पहले स्थान पर रहा। यूपी के अन्य शहरों ने भी इस सर्वे में स्थान हासिल किया है।

NCAP के तहत देश के 130 शहरों में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए अलग-अलग स्तर पर कार्ययोजनाएं लागू की जा रही हैं। इनमें सड़क और मिट्टी की धूल, वाहनों, कचरा जलाने, निर्माण गतिविधियों और औद्योगिक प्रदूषण जैसे स्रोतों पर नियंत्रण शामिल है।

बैठक में उत्तर प्रदेश के NCR से जुड़े प्रमुख शहरों में वाहन प्रदूषण को नियंत्रित करने के उपायों पर भी चर्चा हुई। इसके तहत इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने, इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने और EV Policy के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे मुद्दे सामने आए।

दिल्ली-NCR की हवा में वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में माना जाता है। ऐसे में सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने पर चर्चा को महत्वपूर्ण माना गया।

निर्माण कार्यों और सड़कों से उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने पर भी मंथन हुआ। निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपाय, सड़क की सफाई और निर्माण सामग्री के उचित प्रबंधन जैसे कदमों को प्रभावी तरीके से लागू करने पर जोर दिया गया।

बैठक में औद्योगिक प्रदूषण और स्थानीय स्तर पर प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों की निगरानी को लेकर भी चर्चा हुई। इससे पहले केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने NCR के राज्यों से प्रदूषण नियंत्रण के लिए विस्तृत कार्ययोजनाएं तैयार करने और प्रदूषण हॉटस्पॉट पर विशेष ध्यान देने की बात कही थी।

वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और Construction & Demolition Waste Management को भी बैठक में महत्वपूर्ण विषय बनाया गया।

कचरे का खुले में जलना और निर्माण सामग्री का अनियंत्रित निस्तारण स्थानीय वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में नगर निकायों के स्तर पर कचरा संग्रहण, प्रसंस्करण और वैज्ञानिक निस्तारण व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत पर चर्चा हुई।

दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण केवल एक राज्य तक सीमित समस्या नहीं है। इसके लिए दिल्ली के साथ उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान समेत संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय की जरूरत होती है। केंद्र सरकार की ओर से भी पिछले महीनों में NCR के राज्यों और स्थानीय निकायों के साथ प्रदूषण नियंत्रण को लेकर कई समीक्षा बैठकें की गई हैं।

बैठक में उत्तर प्रदेश के NCR क्षेत्र में प्रदूषण के स्रोतों की पहचान कर उनके नियंत्रण के लिए चल रहे प्रयासों की समीक्षा के साथ आगे की रणनीति पर भी चर्चा की गई।

स्रोत: Filmitics

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