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Parivartini Ekadashi 2026: 21 या 22 सितंबर, कब है परिवर्तिनी एकादशी? जानें सही तारीख व पारण का दिन

🕐 21 Sep 2026, 11:03 am• 3 min padho • Chugal Khor News
Parivartini Ekadashi 2026: 21 या 22 सितंबर, कब है परिवर्तिनी एकादशी? जानें सही तारीख व पारण का दिन

Parivartini Ekadashi 2026: सनातन धर्म में एकादशी तिथि का खास महत्व होता है. धार्मिक मान्यता है कि एकादशी का व्रत रखने से पालनहार श्री हरि विष्णु की कृपा प्राप्त होती है. जो लोग सदैव एकादशी व्रत का पालन करते हैं, उनके घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है. बता दें कि हर महीने में दो एकादशियां पड़ती है- एक शुक्ल पक्ष की और एक कृष्ण पक्ष की. प्रत्येक एकादशी की अपनी एक मान्यता होती है. परिवर्तिनी एकादशी भी उन्हीं में से एक एकादशी है. इस एकादशी पर माना जात है कि भगवान विष्णु, जो इस वक्त क्षीरसागर में योगनिद्रा में है, वहां करवट लेते हैं. इस करवट के चलते इसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है. चलिए अब जानते हैं परिवर्तिनी एकादशी की सही तारीख क्या है

द्रिक पंचांग के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी की तिथि को लेकर लोगों के मन में काफी कंफ्यूजन बना हुआ है. पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है. इस तिथि का प्रारंभ 21 सितंबर को रात 8 बजे से हो रहा है. वहीं, एकादशी तिथि का समापन 22 सितंबर को रात 9:43 मिनट पर हो रहा है. उदयातिथि के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 22 सितंबर 2026, मंगलवार के दिन रखा जाएगा

परिवर्तिनी एकादशी के दिन आपको पूजा करने के लिए कई मुहूर्त मिलेंगे-

संध्या पूजा के लिए गोधूलि मुहूर्त सबसे शुभ माना जाता है

एकादशी के दिन आपको सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करना है और फिर साफ-सुथरे वस्त्र धारण करने हैं. इस दिन पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है. इसके बाद हाथ में जल और पुष्प लेकर भगवान के सामने व्रत रखने का संकल्प लें. इसके बाद पूजा स्थल या मंदिर की सफाई करें. गंगाजल छिड़कर कर शुद्ध करें. अब एक चौकी रखें और उस पर पीला रंग का कपड़ा बिछाएं. भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा रखें. इसके बाद विष्णु जी को चंदन का टीका लगाएं और उन्हें फूल, पंचामृत तथा तुलसीदल अर्पित करें. भगवान को फल तथा नैवेद्य अर्पित करें

परिवर्तिनी एकादशी पर भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा भी करनी चाहिए. उन्हें लाल चुनरी अर्पित करें. माता को रोली की टीका लगाएं और लाल फूल चढ़ाएं. उन्हें श्रृंगार अर्पित करें. अब भगवान विष्णु के सामने घी का दीया जलाएं और ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का जाप करें. इसके पश्चात परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करें. भगवान विष्णु की आरती करें और पूजन समाप्त करें. संध्या में दोबारा विधिवत पूजा करें और शाम के समय तुलसी के पौधे पर दीया जलाएं

परिवर्तिनी एकादशी 2026 व्रत का पारण एकादशी के अगले दिन सूर्योदय के बाद किया जाता है. इसलिए, इस वर्ष 23 सितंबर 2026, बुधवार को पारण करने का दिन है. इस दिन सूर्योदय से पहले उठे स्नान आदि करें. सूर्योदय होने के बाद भगवान की पूजा करें. उन्हें भोग लगाएं. पारण के दिन जरूरतमंदों को दान कर सकते हैं. इसके बाद व्रत खोल सकते हैं

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

स्रोत: NewsNationTV

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