गंगा के अर्धचंद्राकार घाट, मंदिरों की घंटियां, सदियों पुरानी परंपराएं और संकरी गलियों की अपनी अलग पहचान काशी को दुनिया के दूसरे शहरों से अलग बनाती हैं। आस्था औ…

गंगा के अर्धचंद्राकार घाट, मंदिरों की घंटियां, सदियों पुरानी परंपराएं और संकरी गलियों की अपनी अलग पहचान काशी को दुनिया के दूसरे शहरों से अलग बनाती हैं। आस्था और अध्यात्म के केंद्र के रूप में पहचान रखने वाली काशी अब आधुनिक पर्यटन सुविधाओं, बेहतर कनेक्टिविटी और विकसित हो रहे पर्यटन स्थलों के चलते देश-दुनिया के पर्यटकों के लिए और आकर्षक बन रही है।

पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2014 से जुलाई 2026 तक 52 करोड़ 71 लाख 41 हजार 814 भारतीय और विदेशी पर्यटक वाराणसी पहुंचे। इनमें 52 करोड़ 40 लाख 46 हजार 803 भारतीय और 30 लाख 95 हजार 11 विदेशी पर्यटक शामिल हैं। अकेले जुलाई 2026 तक 4 करोड़ 65 लाख 60 हजार 419 पर्यटक वाराणसी पहुंचे, जिनमें 4 करोड़ 64 लाख 27 हजार 878 भारतीय और 1 लाख 32 हजार 541 विदेशी पर्यटक शामिल हैं।वर्ष 2014 में वाराणसी में कुल 54 लाख 89 हजार 997 पर्यटक आए थे। इसके मुकाबले वर्ष 2026 में जुलाई तक ही पर्यटकों की संख्या कई गुना अधिक हो चुकी है। कोरोना काल के दौरान वर्ष 2020 और 2021 में पर्यटन प्रभावित हुआ, लेकिन इसके बाद पर्यटकों की संख्या में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई।

वर्ष 2022 में 7 करोड़ 12 लाख से अधिक, वर्ष 2023 में 8 करोड़ 54 लाख से अधिक, वर्ष 2024 में 11 करोड़ से अधिक और वर्ष 2025 में 17 करोड़ 30 लाख से अधिक पर्यटकों ने काशी का रुख किया।काशी में बढ़ती पर्यटकों की संख्या का असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। होटल, गेस्ट हाउस, रेस्तरां, नाव संचालन, फूल-माला, पूजा सामग्री, टैक्सी-ऑटो, टूर एवं ट्रैवल सेवाओं के साथ स्थानीय बाजार और हस्तशिल्प उत्पादों की मांग बढ़ी है। पर्यटन से जुड़े नाविकों, गाइडों, दुकानदारों, कारीगरों और छोटे कारोबारियों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी बने हैं।वर्ष 2014 में केंद्र में मोदी सरकार और वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद काशी में पर्यटन से जुड़ी सुविधाओं और बुनियादी ढांचे के विस्तार पर जोर दिया गया।

सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी में सुधार के साथ घाटों के विकास, स्वच्छता, सार्वजनिक सुविधाओं और प्रमुख धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों के विकास ने पर्यटकों के अनुभव को व्यापक बनाया है।काशी विश्वनाथ धाम के विकास, घाटों के सौंदर्यीकरण, सारनाथ में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार और गंगा में रिवर क्रूज जैसी गतिविधियों ने काशी के पर्यटन को धार्मिक और आध्यात्मिक दायरे से आगे बढ़ाकर सांस्कृतिक, विरासत और अनुभव आधारित पर्यटन से भी जोड़ा है। विश्व पर्यटन दिवस पर काशी की तस्वीर में आया यह बदलाव प्राचीन विरासत और आधुनिक पर्यटन सुविधाओं के संगम को दर्शाता है।पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि सरकार का प्रयास काशी की सदियों पुरानी परंपराओं को सुरक्षित रखते हुए पर्यटकों को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ना है, ताकि दुनिया भर से आने वाले लोग केवल दर्शन ही नहीं, बल्कि काशी की संस्कृति, विरासत और जीवनशैली का भी अनुभव कर सकें।